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एंबुलेंस भेजी, गाइड लाइन देना भूले

Ghazipur

Updated Tue, 28 Aug 2012 12:00 PM IST
गाजीपुर। सूबे के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की ओर से मरीजों को मुफ्त एंबुलेंस देने की घोषणा के अगले ही दिन जिले में दो गाड़ियां भेज दी गईं लेकिन एंबुलेंस चलाने के लिए न तो अतिरिक्त चालकों की नियुक्ति की गई और न ही अन्य कोई इंतजाम ही किया गया। ऐसे में जिला मुख्यालय पर आई दोनों एंबुलेंस खड़ी रहीं। इसको लेकर तरह-तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं जिसका जवाब स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी भी देने से कतरा रहे हैं। सीएमओ का बस यही कहना है कि ऊपर से गाइड लाइन आने के बाद ही कुछ तय किया जाएगा।
सफेद तथा लाल रंग की दो एंबुलेंस शुक्रवार को जिला मुख्यालय पहुंची। इसमें जिले के लिए भेजी गई दवाएं लदी हुई थीं जिसे जिला मलेरिया कार्यालय में खाली कराया गया। इन गाड़ियों में एंबुलेंस जैसी कोई खास सुविधा नहीं दिखाई दी। आम लोगों को यह गाड़ियां किस तरह से उपलब्ध होंगी। इस बारे में अस्पताल प्रशासन अंजान बना हुआ है। जिले में अभी और कितनी गाड़ियां आएंगी तथा इन एंबुलेंस का संचालन कैसे होगा। इस बाबत अभी तक शासन स्तर पर कोई दिशा-निर्देश सीमएओ आफिस को नहीं भेजा गया है। इस मामले में सीएमओ ने बताया कि एक एंबुलेंस जिला मुख्यालय पर जबकि दूसरी एंबुलेंस सैदपुर भेजी जाएगी लेकिन सीएमओ यह नहीं बता पाए कि एंबुलेंस का तेल किस मद से खर्च किया जाएगा। एंबुलेंस भेजने तथा यह कैसे मरीजोें को उपलब्ध होगी, यह भी सीएमओ नहीं बता सके। इधर लोगों में इस बात की चर्चा जोरों पर है कि बिना गाइड लाइन के इस एंबुलेंस को भेजने का क्या औचित्य है।
एंबुलेंस देखने के लिए आए लोगों में कुछ का कहना था कि एंबुलेंस को भी लेकर सियासत तेज हो गई है। जमानिया, मुहम्मदाबाद, जखनिया जिला मुख्यालय से काफी दूर है। यहां पर चिकित्सा सुविधाएं भी बेहतर नहीं हैं। ऐसे में सैदपुर में पहले एंबुलेंस भेजने के पीछे बड़ी चाल चली गई है। उनका तर्क था कि सैदपुर वाराणसी-गाजीपुर राजमार्ग पर है। जहां हर वक्त साधन सुविधाएं हैं और सैदपुर से वाराणसी काफी नजदीक है। ऐसे में सैदपुर को इतनी तवज्जो क्यों दी जा रही है, इसके पीछे कोई न कोई राजनीतिक हथकंडा जरूर अपनाया गया है।


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