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जिले में 101 बच्चे कुपोषण के हैं शिकार

Ghazipur

Updated Thu, 17 May 2012 12:00 PM IST
गाजीपुर। जिले में कुपोषण जैसी खतरनाक बीमारी छह माह से छह साल तक के गरीब बच्चों में तेजी से फैल रही है। यह खुलासा खुद जिला कार्यक्रम अधिकारी ने सीडीपीओ की मासिक बैठक में किया है। सबसे अधिक सादात और करंडा में कुपोषित बच्चों की संख्या है। इसको लेकर विभागीय अधिकारी चिंतित हैं।
जिले में छह माह से तीन वर्ष के बच्चों की संख्या 1 लाख 45 हजार 700 के करीब है। इसी तरह तीन से छह वर्ष तक के बच्चों की तादात काफी कम है। इनकी संख्या 1 लाख 27 हजार 8 के करीब बताई जा रही है। यह सभी बच्चे आंगनबाड़ी केंद्रों से पंजीकृत बताए जा रहे हैं। सभी बच्चों को स्वस्थ रखने के लिए विभाग की तरफ से पंजीरी देने का निर्देश है। बावजूद इसके आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां खुले बाजार में पंजीरी बेच रही हैं। इसका लाभ गरीब परिवार के बच्चों को नहीं मिल पा रहा है। महिला एवं बाल विकास पुष्टाहार विभाग की तरफ से भेजी गई पंजीरी में जमकर गड़बड़ी की जा रही है। इसका नतीजा यह हो रहा है कि गरीब परिवारों के बच्चों में कुपोषण का लक्षण दिखाई देने लगा है। अभी तक कुल 101 पंजीकृत बच्चों को कुपोषण का शिकार होना पड़ा है। विभाग के मुताबिक सबसे अधिक कुपोषित बच्चे सादात ब्लाक में है और सबसे कम बच्चे सदर ब्लाक में है। देखा जाए तो करंडा में 15, सदर में 5, बाराचवर में 6, देवकली में 10, बिरनो 10, रेवतीपुर 13, सादात 28, सैदपुर 28 और भदौरा में 11 बच्चे कुपोषण के शिकार हैं। कुपोषित बच्चों के परिवार की माली हालत काफी दयनीय है। इस परिवार की महिलाएं -पुरूष गरीबी के कारण बच्चों को बेहतर तरीके से रख नहीं पाते हैं। खाने-पीने का इंतजाम नहीं होने से कुपोषण तेजी से अपने पांव पसार रहा है। इन परिवारों के बच्चों का वजन भी तेजी से घट रहा है। इस पर विभाग ध्यान नहीं दे रहा है। वहीं दूसरी ओर जखनियां, मनिहारी, कासिमाबाद, मरदह, मुहम्मदाबाद, भांवरकोल, जमानियां और शहर में एक भी बच्चे कुपोषण का शिकार नहीं हुए हैं। ये सरकारी आंकड़े काफी चौंकाने वाले हैं। जिला कार्यक्रम अधिकारी इंदूबाला श्रीवास्तव ने बताया कि जिले में 101 कुपोषित बच्चे हैं। जिनकी विशेष देखभाल कार्यकत्रियों को करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि इन बच्चों को दिन में दो बार पोषाहार दिया जा रहा है। इन बच्चों का माह में दो बार वजन भी कराया जाता है।
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