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बैंकों ने फसली ऋण देने से किया मना, साहूकारों की शरण में जा रहे किसान

Varanasi Bureau

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Updated Sun, 13 Aug 2017 11:52 PM IST
मुहम्मदाबाद (गाजीपुर)। प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी ऋण मोचन योजना का लाभ किसानों को भले ही न मिल पाया हो लेकिन इस योजना के चलते खरीफ के सीजन में किसानों को बैंकों ने फसली ऋण देने से हाथ खड़े कर लिए हैं। इससे किसानों को खेती के लिए अधिक ब्याज पर ऋण लेने के लिए साहूकारों की शरण में जाना पड़ रहा है।
भाजपा द्वारा विधानसभा चुनाव के दौरान सरकार बनने पर किसानों का कर्जा माफ करने एवं ब्याज मुक्त कर्ज देने का वादा किया गया था। प्रचंड बहुमत से प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने पर चुनावी घोषणा के अनुसार योगी सरकार ने अपनी पहली कैबिनेट बैठक में किसानों का कर्ज माफ करने का प्रस्ताव तो पास कर लिया लेकिन इस घोषणा को लागू करने में आने वाली आर्थिक समस्या के समाधान के लिए प्रदेश के अधिकारी पिछले चार महीने से ऋण मोचन योजना में कम से कम पैसे में किसानों की ऋण माफी योजना को कैसे निपटाया जाए। इसके लिए बैंकों से तरह तरह की सूचनाएं एवं आंकड़े लिए जाते रहे। सरकार ने 31 मार्च 2016 को किसानों के खाते में लगे ऋण को 31 मार्च 2017 तक वसूल न हो सके तो उसको माफ किए जाने का आदेश पारित किया। किसानों की सूची तैयार कराई गई। इस सूची को भी दो भागों में बांट दिया गया। एनेक्जर ए में उन किसानों को रखा गया, जिन्होंने दो वर्ष के अंदर ऋण लिया था। उसके पूर्व के ऋण लेने वाले बकाएदार किसानों को एनेक्जर बी में शामिल किया गया। पहले चरण में एनेक्जर ए के किसानों का बायोडाटा, जिसमें आधार कार्ड, मोबाइल नंबर एवं भूलेख के अनुसार गाटा संख्या सरकारी पोर्टल पर फीड कराया गया। अब उन किसानों की सूची तहसीलों में भेजकर लेखपालों से जांच कराई जा रही है। मजबूर किसान पिछले चार माह से ऋण माफी के चक्कर में बैंकों का चक्कर काट रहे हैं। ऋण किसान अवधेश कुमार, शिवनाथ यादव, शिवमुनी, रामजी, रमेशचंद्र, जगदीश नारायण आदि ने बताया कि आलू, दलहन आदि का उचित मूल्य न मिलने से किसान पहले से ही बदहाल हैं। दूसरी तरफ ऋण माफी योजना के चलते न तो हमारे कर्जे माफ हुए और न ही उसकी वजह से नया कर्ज मिल पा रहा है जिससे हमे खेती के लिए स्थानीय साहूकारों से ऋण लेकर बुआई करनी पड़ रही है। इस संबंध में उपजिलाधिकारी शिवप्रसाद ने बताया कि लेखपालों द्वारा अवैध वसूली की शिकायत मिलने पर जांच कराई जाएगी। दोषी पाए जाने पर संबंधित लेखपालों के विरुद्ध कार्रवाई होगी।
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