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दिल्ली से मेरठ तक कोहराम

Ghaziabad

Updated Sat, 15 Dec 2012 05:30 AM IST
गाजियाबाद/साहिबाबाद। वकीलों के चक्का जाम ने शहर की रफ्तार पर ऐसा ब्रेक लगाया कि करीब आठ घ्‍ांटे तक लोग मुसीबत झेलते रहे। सुबह 8 बजे से ही पुलिस ने डायवर्जन लागू कर दिया था। इसके बाद 10 बजे से वकीलों का धरना प्रदर्शन शुरू हो गया, जो शाम तीन बजे तक चला। जाम के कारण गाजियाबाद से दिल्ली तक कोहराम मचा रहा।
रूट डायवर्जन के दौरान नोएडा और दिल्ली आने-जाने वाले वाहन एनएच-24 से होकर गुजरे। इससे वहां भी जाम के हालात बने। ट्रांस हिंडन टू गाजियाबाद शहर रूट पूरी तरह बंद रहा। एएलटी से कोई भी वाहन राजनगर एक्सटेंशन और मेरठ रोड की तरफ नहीं जाने दिया गया। मेरठ तिराहे से वाहन मोहननगर की तरफ नहीं चले। हापुड़ मोड़ से वाहन मेरठ तिराहे की तरफ नहीं जाने दिए गए। चौधरी मोड़ से घंटाघर की तरफ भी वाहन नहीं चले। मोहननगर से गाजियाबाद की तरफ कोई भी वाहन नहीं जाने दिया। इसके अलावा इंदिरापुरम से पुस्ता रूट भी बंद कर दिया गया था।
डायवर्जन से हापुड़ चुंगी, पुराना बस अड्डा, अंबेडकर रोड, चौधरी मोड़, कालकागढ़ी चौक, जस्सीपुरा मोड़, जीटी रोड, लालकुंआ और विजयनगर बाइपास पर हजारों वाहन फंसे रहे। दस-पंद्रह मिनट का रास्ता लोगों के लिए घंटों का सफर बन गया। मुख्य मार्ग तो क्या, गलियों तक से निकलना दूभर हो गया।
जेब पर पड़ा भार: लोगों को 10 से 15 किलोमीटर का चक्कर काटकर गंतव्य तक जाना पड़ा। आटो में सफर करने वालों को अतिरिक्त किराया देना पड़ा तो अपने वाहनों से चलने वालों का अतिरिक्त पेट्रोल-डीजल खर्च हुआ। गाजियाबाद से टीएचए और टीएचए से गाजियाबाद आने वालों को सबसे ज्यादा परेशानी हुई। उन्हें भी एनएच-24 से ही आना-जाना पड़ा।



हिंडन तट से उठी थी क्रांति की चिंगारीः गिरिराज
गाजियाबाद। बार एसोसिएशन के सचिव गिरिराज सिंह का कहना है कि अधिवक्ताओं ने भी उसी हिंडन तट पर अपना बिगुल बजाया है, जहां 1857 की क्रांति के दौरान क्रांतिकारियों ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी। हम भी अपनी पश्चिमी यूपी में हाईकोर्ट बेंच मांगकर आजादी मांग रहे हैं। उनका कहना था कि यह सिर्फ अधिवक्ताओं की नहीं, बल्कि पश्चिमी यूपी की जनता की लड़ाई है। हाईकोर्ट बेंच मिलने के बाद निश्चित ही पश्चिमी यूपी की जनता को न केवल समय से न्याय मिलेगा, बल्कि उसका खर्चा भी कम होगा। हाईकोर्ट बेंच मिलने के बाद यहां के लोगों को इलाहाबाद-लखनऊ की दौड़ नहीं लगानी पडे़गी।


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