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किसानों का शोर, नहीं चलेगा जोर

Ghaziabad

Updated Mon, 01 Oct 2012 12:00 PM IST
जैसे संघर्ष इस जमीन का नसीब बन गए हैं। यही वो कोट गांव है, जहां चक्रवर्ती सम्राट समुद्रगुप्त ने अश्वमेध यज्ञ किया था। यमुना-हिंडन की भूमि को बाद में मोहम्मद बिन तुगलक ने लड़ाई का मैदान बनाया। फिर मुगल आए और जमीन पर जंग का सिलसिला आगे बढ़ाया। लोनी के पास तैमूर की हिंदुस्तानी लड़ाकों से तगड़ी जंग हुई थी। हिंडन नदी किनारे मुगल सेना से भरतपुर के राजा सूरजमल का बड़ा युद्ध हुआ था। 1803 में मराठा आर्मी और सर जनरल लेक के नेतृत्व में अंग्रेज सेना के बीच लड़ाई भी इसी क्षेत्र में हुई थी। 30-31 मई 1857 हिंडन ब्रिटिश आर्मी और क्रांतिकारियों के बीच भीषण युद्ध की गवाह बनी। जंग-ए-आजादी के पूरे आंदोलन के दौरान यहां के वीर बारी-बारी आहुतियां देते रहे। आजादी के बाद सरहद पर जब-जब जंग हुई, हर बार इस जमीन के नाम उसके बेटों का बलिदान लिखा गया है। वक्त बदल गया है मगर इस जमीन पर संघर्ष नहीं थम रहे। अब जमीनों के लिए जंग हो रही हैं और गांव-गांव इसे लड़ रहे हैं किसान। अतीत में बझेड़ा खुर्द, घोड़ी बछेड़ा और भट्टा पारसौल में खूनी टकराव देख चुकी जमीन पर तनाव-तकरार की फिर वैसी ही तस्वीर नजर आ रही है। कुछ इस तरह...।
गाजियाबाद। एनएच-24 और जीडी रोड किनारे के गांवों के हजारों किसान अपने हक की खातिर फिर लामबंद होते दिखाई दे रहे हैं। शासन, प्रशासन और बिल्डरों पर जबरन भूमि अधिग्रहण के आरोप लगा रहे किसान अपनी जमीनों को बाजार भाव की कीमत लिए बिना छोड़ने को तैयार नहीं। इसके लिए वे एक -दो नहीं, छह साल से धरना-प्रदर्शन और पंचायतें कर रहे हैं मगर उनकी मांगों पर सरकार गौर नहीं कर रही।
किसानों का आरोप है कि बिल्डरों को बड़ा लाभ देने के लिए सरकारी मशीनरी उनसे औने-पौने दामों पर जमीनें छीन लेना चाहती है। जमीनों की खातिर गांव-गांव किसान लंबे समय से कोर्ट कचहरी के चक्कर लगा रहे हैं।
दुजाना गांव के 55 दिन अनशन और पांच दिन आमरण अनशन से भी बात नहीं बनी तो इलाके के किसान अब विशाल पंचायतें कर सरकार तक अपनी बात पहुंचाने की कोशिश में लगे हैं। किसान संघर्ष समिति ने साफ ऐलान कर दिया है कि जब तक किसानों की मांगें पूरी नहीं होेंगी, वे अपनी जमीनों पर बिल्डरों की टाउनशिप नहीं खड़ी होने देंगे।

पहले हक, फिर जमीन
ग्रेनो जैसा मिले मुआवजा, प्रभावित किसानों का पुनर्वास
10 फीसदी विकसित भूमि के साथ फिक्स वार्षिक पेमेंट
ग्राम समाज की जमीन से भूमिहीनों को विकसित प्लाट
टाउनशिप में किसानों को मिलें आवासीय प्लॉट व फ्लैट
जमीन देने वाले किसान परिवार के एक सदस्य को नौकरी
2005-06 में अधिग्रहीत खाली जमीन किसानों को वापस


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