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ऐसा गुंडाराज और कहां

Ghaziabad

Updated Sun, 22 Jul 2012 12:00 PM IST
गाजियाबाद। अपना शहर गाजियाबाद गुनाह और गुनाहगारों के साए में कांप रहा है। गुंडे-बदमाश बेखौफ होकर तांडव कर रहे हैं और पुलिस हांफती-कांपती नजर आ रही है। ऐसा गुंडाराज कि जनता को न दिन में चैन और न रात को आराम। अपराधी जहां चाहा, जब चाहा वारदातें कर रहे हैं और कानून के पहरेदार उनका बाल बांका नहीं कर पा रहे। इंडस्ट्री और एजूकेशन हब और हॉट सिटी जैसे तमगे लिए इस महानगर में चेन स्नेचिंग, चोरी, लूट, डकैती, सरेआम हत्याएं, मफियागीरी ही नहीं, अब अपहरण और कांट्रेक्ट किलिंग भी तेज हो गई हैं। ऐसा गुंडाराज एनसीआर क्या, प्रदेश के शायद ही किसी और जिले में होगा।
जनपद में हैं 155 गैंग
जिले में करीब 155 गिरोह सक्रिय हैं। इनमें चेन स्नेचिंग, लूट, डकैती, ठगी, अपहरण, सुपारी किलर और बदमाश शामिल हैं। पुलिस इनका डोजियर तैयार कर रही है।

24 घंटे खतरा
शहर के लोग ‘खतरों के खिलाड़ी’ बने हुए हैं। यहां 24 घंटे जान-माल का खतरा सताता रहता है। आदमी न घर में सुरक्षित है और न बाजार में। बदमाश जब-जहां चाहें तब वारदात को अंजाम देने में लगे हैं। जनता लुट रही है और पुलिस ‘पड़ताल जारी है’ के सिद्धांत पर काम कर रही है।


क्यों बढ़ रहे हैं अपराध
पूर्व में जिले में तैनात रह चुके पुलिस अधिकारियों का कहना है कि बढ़ते अपराधों के लिए विभागीय व्यवस्था भी कम जिम्मेदार नहीं है। मनपसंद तैनाती पुलिसकर्मी काम के लिए नहीं बल्कि सुविधा के लिए लेते हैं। पुलिस की गश्त ही ईमानदारी से सही समय पर हो जाए, तो भी अपराधों पर काफी लगाम लगती है। वर्दीधारी का सड़क पर नजर आना ही बदमाशों के हौसले पस्त करने के लिए काफी होता है।

बाहरी बदमाश बने हैं सिरदर्द
गैर जनपद से आकर जिले में अपराध करने वाले बदमाश पुलिस के लिए सिरदर्द बने हैं। दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, मध्यप्रदेश आदि राज्यों से बदमाश यहां वारदात करने आते हैं और वारदात के बाद खिसक जाते हैं। इसके अलावा बांग्लादेशी बदमाशों के कई गैंग भी एनसीआर में सक्रिय हैं। इसके साथ ही निम्न कारण भी हैं
एनसीआर के परिक्षेत्र में आते हैं कई प्रदेश, बदमाशों को छिपने में मिलता है लाभ
सीमावर्ती कालोनियों में लाखों किराएदार, सत्यापन न जनता चाहती न ही पुलिस
घनी और मिश्रित आबादी के बीच कौन संदिग्ध कुछ पता नहीं
वारदात के बाद बदमाश जा घुसते हैं दूसरे प्रदेश में, सीमा विवाद में उलझी रहती है पुलिस
ज्यादातर थानेदारों को थाना क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति का भी ठीक से ज्ञान नहीं



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