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‘जान बच गई वरना नहीं देख पाते जीत’

Ghaziabad

Updated Mon, 09 Jul 2012 12:00 PM IST
गाजियाबाद। विरोध, हंगामा और संघर्ष के झंझावात में फंसकर मेयर की कुर्सी पर पहुंचे तेलूराम कांबोज अब उतने ही उत्साह से लबरेज नजर आ रहे हैं। जैसे-तैसे जीत नसीब हुई है तो इसे वे लोकतंत्र की जीत बता रहे हैं। आरोपों की बौछार कर रहे हैं। पत्रकारिता के साथ राजनीति और देश-दुनिया का अपार अनुभव सहेजने वाले नए मेयर ने विजय के तुरंत बाद ‘अमर उजाला’ से दिल खोलकर दिल की बातें साझा कीं। कुछ इस तरह...।
बोले तेलूराम-मुझ पर हमले की साजिश थी, भाजपा नेताओं ने बनाया सुरक्षा घेरा
अमर उजाला : जीत-हार का फैसला फंसने के दौरान बेचैनी बताएंगे?
तेलूराम : बहुत मुश्किल क्षण थे। प्रशासन की भूमिका संदिग्ध नजर आ रही थी। बिना फैसला आए ही सपा ने जिस तरह से जीत का जश्न मनाना शुरू कर दिया था, उसमें साजिश की बू आ रही थी। हम थके थे मगर डरे नहीं। भाजपा संगठन के साथ डटे रहे और जीत मिल गई।
अमर उजाला : आखिर प्रशासन पर आरोप लगाने का आधार क्या है?
तेलूराम : प्रचार से लेकर मतदान तक पुलिस-प्रशासन की भूमिका किसी से छिपी नहीं है। अफसर खुलकर सत्तारूढ़ दल के फेवर में काम कर रहे थे। मतगणना में वार्ड के कई उम्मीदवारों को अंदर बुलाए बिना ही काउंटिंग पूरी करा देना गड़बड़ी का सबसे बड़ा प्रमाण है। यदि काउंटिंग में गड़बड़ नहीं हो रही थी तो सुधन एंड पार्टी विजय के जश्न में क्यों डूब गई थी। हकीकत तो ये है कि हम सब विरोध नहीं करते तो फैसला उलट दिया जाता! बारिश हमारी ढाल बन गई। कीचड़ में कमल खिला दिया।
तेलूराम : मानते हैं कि फैसले में देरी हुई मगर हुआ तो इंसाफ?
तेलूराम : साजिश तो लोकतंत्र का गला घोंटे जाने की थी। डीएम और कमिश्नर ने इंसाफ किया, इसके लिए दिल से शुक्रिया। डीएम बहुत दबाव में थीं मगर उन्होंने फैसला कमिश्नर के आने तक रोककर रखा। कमिश्नर ने ईमानदारी से जीत-हार का गणित जांचा और फिर मुझे जीत का प्रमाण पत्र दिलाया। आखिरकार जनशक्ति की जीत ही गई। मैं जीत तो गया मगर जीत का अंतर कम कर दिया गया।
अमर उजाला : हजारों की भीड़, हंगामा, भगदड़ में आप कहां थे?
तेलूराम : सपाई बड़ी तादाद में हंगामा करते हुए एमबी कालेज में घुस आए थे। पुलिस तमाशा देख रही थी। हालात भांपकर मैं मतगणना स्थल पर कुछ पदाधिकारियों के साथ एक तरफ खड़ा हो गया था। डर भी रहा था। दावे से कहता हूं कि साजिश मुझ पर हमले की थी। साथी भाजपा नेता मेरा सुरक्षा कवच बने रहे। आईजी-कमिश्नर के आने के बाद हालात ठीक हो गए। शुक्र है, अनहोनी बच गई।
अमर उजाला : जीत के बाद अब आगे की बताएं?
तेलूराम : सबसे पहले अखिलेश यादव सरकार से मेयर के वे सभी अधिकार बहाल करने की मांग करते हैं, जिनको बसपा सरकार ने सीज कर दिया था। सरकार ने ऐसा नहीं किया तो कोर्ट जाएंगे। रही बात विकास की तो ईमानदारी से अपना फर्ज निभाएंगे। पहले पानी का संकट दूर करेंगे। जिस इलाके में जैसी जरूरत होगी, वैसे काम कराएंगे।
पहले पानी के इंतजाम करेंगे। फिर बारी-बारी सड़क, सीवर, सफाई और पार्कों पर ध्यान देंगे। जिंदगी भर जनसेवा की है। अपना कर्म और धर्म वैसे ही पूरी शिद्दत से निभाएंगे।
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