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गाजियाबाद-नोएडा के कॉलेज टॉप पर

Ghaziabad

Updated Mon, 09 Jul 2012 12:00 PM IST
65 फीसदी उम्मीदवारों ने चुना दोनों जिलों को, 18 कॉलेजों का नहीं खुला खाता
d अमर उजाला ब्यूरो
गाजियाबाद। यूपी एसईई काउंसलिंग में एआईईईई कोटे की सीटें भरने की राह देख रहे प्रदेश भर के इंजीनियरिंग कॉलेज जहां स्टूडेंट्स को तरस गए, वहीं, गाजियाबाद और नोएडा के संस्थानों को छात्रों ने हाथों हाथ लिया। एआईईईई कोटा काउंसलिंग में गाजियाबाद और नोएडा के इंजीनियरिंग कॉलेज टॉप पर रहे। यही वजह रही कि दो दिन चली कोटे की काउंसलिंग में 4418 उम्मीदवारों को कॉलेज अलॉट हुए और इनमें से 65 फीसदी उम्मीदवारों ने गाजियाबाद और नोएडा के संस्थानों का चुनाव किया। यही नहीं, प्रदेश के इंजीनियरिंग कॉलेजों में कुल सीटों की मात्र 15 फीसदी सीटें ही अलॉट हुईं, जबकि गाजियाबाद और नोएडा के 67 इंजीनियरिंग कॉलेजों की 38.22 फीसदी सीटें उम्मीदवारों को अलॉट हो गईं।
प्रदेश के इंजीनियरिंग कॉलेजों में एआईईईई कोटे की करीब 30,000 सीटों पर प्रवेश के लिए हुई यूपी एसईई काउंसलिंग में पंजीकृत 10,993 उम्मीदवारों में से 5600 उम्मीदवारों ने च्वाइस लॉक किया। इनमें 4418 उम्मीदवारों को ही सीट अलॉट हुई जबकि करीब 1100 उम्मीदवारों को च्वाइस लॉक कर चुके कॉलेजों में सीटें फुल होने की वजह से सीट अलॉटमेंट नहीं मिल पाया। गाजियाबाद के 43 इंजीनियरिंग कॉलेजों में एआईईईई कोटे की 4518 सीटें आरक्षित थीं। इनमें से 1632 सीटें अलॉट हुई जबकि 2886 सीटें खाली रह गईं। वहीं, नोएडा के 24 इंजीनिरिंग कॉलेजों की 3168 सीटों में से 40.32 फीसदी यानि कि 1279 सीटें अलॉट हुईं जबकि 1889 सीटों खाली बच गईं। इस तरह दोनों जिलों में कोटे की 7686 सीटों पर 2911 सीटें भरी, जबकि 4775 सीटें खाली बच गईं।

7 कॉलेजों में भरी 90% से अधिक सीटें
गाजियाबाद और नोएडा के कॉलेजों में एडमिशन का क्रेज इतना रहा कि दोनों जिलों के 7 संस्थानों में 90 प्रतिशत से अधिक सीटें भर गईं। इनमें गाजियाबाद के पांच और नोएडा के 2 इंजीनियरिंग कॉलेज शामिल हैं। इनमें एकेजीईसी में 98.72 फीसदी, गलगोटिया नोएडा में 97.40 फीसदी, जेएसएस नोएडा में 97.22, काइट में 97.66, आरकेजीआईटी में 94.44, एबीईएस ईसी में 94.27 और इंद्रप्रस्थ इंजीनियरिंग कॉलेज में 92.26 फीसदी सीटें भर गईं। वहीं, दोनों जिलों के 18 संस्‍थानों का खाता भी नहीं खुला है।

गाजियाबाद और नोएडा के संस्थान स्टूडेंट्स की प्राथमिकता पर होते हैं। हर साल इन संस्थानों में प्रवेश के लिए मारामारी की स्थिति रहती है। पिछले साल भी ऐसी ही स्थिति थी, जबकि प्रदेश के काफी संस्थानों को सीटें नहीं मिल पाई थीं।
-विपुल गोयल
प्रशासनिक अधिकारी
आरकेजीआईटी
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