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वह बाबू जी! छा गए

Ghaziabad

Updated Sun, 08 Jul 2012 12:00 PM IST
सुहानी सुबह और झमाझम बारिश का दिन यूं सियासी तूफानी लेकर आएगा, यह पहले किसी ने नहीं सोचा था। अपनी-अपनी जीत के दावों के बीच नेताओं की भीड़ दोपहर बाद ही छंट गई थी। जैसे-जैसे आइना बोलता गया, सियासी समर के सूरमा खुद मैदान छोड़ते चले गए। मैदान में रह गए तो सिर्फ सुधन रावत और तेलूराम कांबोज। फिर सुधन की जीत की आवाज गूंजी और हंगामा बढ़ता चला गया। कुछ इस तरह...।
अपने मेयर तेलूराम कंबोज
भाजपा-संघ का जोर काम आया आधी रात में जिताया
पेशे से पत्रकार तेलूराम कांबोज 1962 से संघ से जुड़े हैं। स्थापना के बाद से ही भाजपा में कई तरह की जिम्मेदारियां संभालते आ रहे हैं। जिला महामंत्री और क्षेत्रीय मीडिया प्रभारी रह चुके हैं। पूर्व प्रधानमंत्री अटल विहार वाजपेई के साथ कई बार विदेश यात्रा भी चुके हैं। 73 साल की उम्र में दिन-रात मेहनत कर मेयर चुनाव
जीतना उनकी जीवटता को दर्शाने के लिए काफी है।

सुधन ः पहले खुशी फिर गम
लखनऊ तक का जोर लगाया पर कोई ‘गणित’ काम न आया

49 बरस के सुधन रावत को राजनीति विरासत में मिली है। भाई राम नरेश रावत गढ़ से विधायक रह चुके हैं। सुधन ग्रेजुएट हैं। इनका कैमिकल एवं रियल एस्टेट का कारोबार है। लंबे समय से समाजसेवा से जुड़े हैं। पूर्व में गाजियाबाद बागपत सीट से रालोद के टिकट पर चुनाव लड़ा था। रालोद के संगठन में कई अहम जिम्मेदारियां भी संभाल चुके हैं। मेयर चुनाव से कुछ ही समय पहले सपा में आए हैं।

दोपहर 01:00 बजे
भाजपाइयों ने वार्डों की मतगणना में गड़बड़ी आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू किया। विवाद हुआ तो सपा के खिलाफ मोर्चाबंदी में कांग्रेसी और निर्दलीय भी उनके साथ हो लिए। पता होते ही प्रेक्षक पहुंचे और भाजपाईयों को जांच का भरोसा देकर शांत किया। इसकेबाद भी भाजपाई नहीं माने और चुनाव आयोग को फैक्स कर प्रशासन पर सत्तारूढ़ दल के पक्ष में काम करने केआरोप लगाते रहे।

शाम 06:00 बजे
अचानक अंदर से सुधन की जीत का शोर उठा और सपाई खेमा जश्न में डूब गया। विरोधी कैंप में जिंदाबाद-जिंदाबाद का नारे गूंजे तो भाजपाइयों ने फिर आस्तीनें चढ़ा लीं। झटपट गड़बड़ी की बातें प्रदेश और राष्ट्रीय हाईकमान तक पहुंचा दी। इसके बाद सांसद राजनाथ सिंह सक्रिय हुए और प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेई। प्रशासन ने दवाब में आ गया और मेयर का रिजल्ट रोक दिया।

रात 01:00 बजे
शनिवार को निकाय चुनाव में मतगणना के समय मेयर परिणाम पर विवाद तूल पकड़ता देख चुनाव आयोग के निर्देश पर कमिश्नर एमके नारायण आधी रात को मेरठ से एमबी कालेज पहुंचे। उन्होंने पहले डीएम-एसएसपी और प्रेक्षक से वार्ता की। इसके बाद फिर खुद कम्यूटर पर वोटों की सूची जांची। फिर भाजपा-सपा नेताओं के साथ बैठक की। फिर फैसला सुनाया...

रात 01:46 बजे
सपाइयों को बाहर किया, फोर्स से धक्का-मुक्की, भाजपाइयों को फर्स्ट फ्लोर पर एक कमरे में बिठाया। दोनों ओर केनेताओं से समर्थकों को बाहर भेजने को कहा गया। घंटों तनाव में रहने के बाद भाजपा वालों की हंसी फिर लौटी और नीचे मैदान में खड़े सुधन रावत ने गले में पड़ी माला उतारी। आईजी जीएल त्रिपाठी भी मेरठ से आ गए। फिर अफसर, नेता सब भीड़ छंटने के इंतजार में जुट गए।

9583 वोट से जीते कांबोज
गाजियाबाद। टिकट बंटवारे को लेकर भारी अंतर्कलह और आपसी गुटबंदी भाजपा की राह में सबसे बड़ी बाधा थी। विधानसभा चुनाव में करारी हार भी पार्टी के मनोबल पर फर्क डाल रही थी। इतना सब होने के बाद भी राजनाथ सिंह के ‘घर’ में मिली तेलूराम की जीत भाजपा केलिए संजीवनी से कम नहीं है। तेलूराम कांबोज के लिए मुकाबला आसान नहीं था। राजनीति के माहिर खिलाड़ी सुधन रावत से उनकी सीधी टक्कर थी। मौसम हर कदम पर रफ्तार रोक रहा था। शुरू में तेलूराम के साथ पार्टी के कार्यकर्ताओं की भीड़ नजर नहीं आ रही थी मगर राजनाथ सिंह ने जैसे ही यहां आकर सबकी क्लास ली, संगठन में भी जान आ गई और बात बनती चली गई।


लोनी में रिकाउंटिंग
गाजियाबाद। मेयर पद की प्रत्याशी की आपत्ति के बाद लोनी मेयर पद की मतगणना रात दो बजे रोक दी गई। प्रत्याशी आबिदा बेगम ने आरओ को दिए शिकायती पत्र में आरोप लगाया कि रात आठ बजे 203 बूथ की काउंटिंग तक उसको 11953 मत मिलने बताए गए और मनोज धामा को 19 हजार। इसके बाद 258 बूथों की गिनती पर मनोज धामा को 28हजार मत दिखाए गए, जबकि उसको 10877 मत मिले। आबिदा बेगम ने सवाल खड़ा किया कि उसके मत आखिर कम कैसे हो गए। समाचार लिखे जाने तक काउंटिंग सीट की दोबारा से गणना करने के साथ ही एजेंटों की सीट से मिलान हो रहा था।


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