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कहां गए ‘वाह साहब’

Ghaziabad

Updated Sat, 12 May 2012 12:00 PM IST

लोनी की अनहोनी ः गर्वनर इरविन के समय में तैयार इन्हीं दस्तावेजों से तय होनी है दिल्ली-यूपी की बाउंड्री लाइन

दिल्ली यूपी का सीमा विवाद निपटाने को तलाशे जा रहे हैं सिजरे
रिकार्ड में नहीं मिल रहे हैं कई गांव के आठ दशक पुराने नक्शे
विवाद निपटाने को माथापच्ची कर रहे दिल्ली यूपी के अफसर
राष्ट्रपति कार्यालय के हस्तक्षेप पर शुरू हुई नए सिरे से कवायद
सीमा विवाद में उलझे सीमावर्ती क्षेत्र में रह रहे लाखों नागरिक

दिल्ली की हद तय करने को अंग्रेजों ने 1930 में कपड़े पर जो नक्शे तैयार किए थे, उनको ‘वाह साहब’ नाम दिया था। सन 47 में अंग्रेज भारत छोड़ गए और अपने सिजरे यहीं दे गए। देखते-देखते 65 बरस गुजर गए हैं। आजाद हिंदुस्तान की सरकारें इतने लंबे समय बाद भी अंग्रेजों की तरह अपनी जमीनों के रिकार्ड नहीं तैयार कर सकीं। लोनी के पास दिल्ली-यूपी बार्डर को लेकर दोनों राज्यों में अब फिर से खींचतान शुरू हुई है तो परेशान मशीनरी फिर से सब काम छोड़कर अंग्रेजों के दिए ‘वाह साहब’ खोजती नजर आ रही है। मुश्किल ये है कि 81 बरस के बूढ़े ज्यादातर ‘वाह साहब’ वक्त के थपेड़े खाकर या तो बहुत बुरी दशा में पहुंच चुके हैं या फिर गुम ही हो गए हैं...


गाजियाबाद। दिल्ली-यूपी के बीच उभरे सीमा विवाद को निपटाने के लिए ब्रिटिश काल के जिन सिजरों (नक्शों) की तलाश हो रही है, उनमें से कुछ रिकार्ड रूम में मिल ही नहीं रहे। 81 बरस पुराने यह दस्तावेज ही बता सकते हैं कि दिल्ली की हद कहां तक है? मुश्किल यह है कि कई गांव के सिजरे रिकार्ड में अब दिख ही नहीं रहे। इसकी वजह से दोनों राज्यों के अफसर खासे टेंशन में हैं।
दरअसल, लोनी के सीमावर्ती क्षेत्र में बसी लाखों की आबादी को लेकर इन दिनों दिल्ली-यूपी के बीच खींचतान चल रही है। एक तरफ दिल्ली पंचवटी समेत कई कालोनी और ग्रामों से साफ पल्ला झाड़ रही है। वहीं, यूपी प्रशासन भी इन्हें अपना नहीं मान रहा। ये हालत तब है, जब ज्यादातर आबादी दिल्ली नगर निगम से लेकर वहां विधानसभा और लोकसभा चुनावों में मतदान करती आ रही है। अब तो दिल्ली ने धीरे-धीरे इन क्षेत्रों में जन सुविधाएं भी कम करनी शुरू कर दी हैं।
30 अप्रैल को अचानक 2000 से अधिक बिजली कनेक्शन काटे तो हाहाकार मच गया। पब्लिक ने बवाल कर दिया। हाइवे से लेकर आम रास्ते जाम कर दिए गए। मामला दिल्ली के उप राज्यपाल के दरबार तक पहुंच गया। दोनो राज्यों के अफसरों ने किसी तरह चार दिन में बिजली बहाल कर मामला तो शांत कर दिया, लेकिन सीमा विवाद गहरा गया। ज्वाइंट सेक्रेटरी मंत्रिमंडल राष्ट्रपति भवन ने मेरठ मंडल के कमिश्नर मृत्युंजय कुमार नारायण को राजस्व अभिलेखों के आधार पर सीमा विवाद निपटाने को कहा। मंडलायुक्त ने डीएम गाजियाबाद को तत्काल कार्रवाई अमल में लाने के आदेश दिए। ज्वाइंट टीम बनाई गई। गाजियाबाद और दिल्ली के एडीएम प्रशासन को नोडल अधिकारी बनाया गया। अब संयुक्त टीम 1930 में तैयार हुए नक्शों (सिजरों) के आधार पर बाउंड्री लाइन खोज हो रही है। 81 बरस पुराने वाह साहब बार्डर तय कराने में नाकाफी साबित हो रहे हैं। कई इलाकों के तो सिजरे जिला प्रशासन को ढंू़ढे हाथ नहीं आ
रहे हैं।
प्रशासन की डिमार्केशन टीम
डीसी ब्रजेश कुमार अध्यक्ष हैं। जबकि नायब तहसीलदार केपी सिंह, राजस्व निरीक्षक कृष्णपाल सिंह, मूलेंद्र शर्मा, विजय प्रमोद, संजय लेखपाल, तहसीलदार झब्बर सिंह, चकबंदी अधिकारी राकेश कटारिया, विकास यादव सहायक अधिकारी चकबंदी, जय वीर सिंह चकबंदीकर्ता और जय सिंह चकबंदीकर्ता टीम में शामिल हैं।

कहां हैं विवाद
पंचवटी कालोनी
बेहटा हाजीपुर
सादुल्लाबाद
धरोटी खुर्द
लोनी
हरमपुर
बदरपुर
पचायरा

नक्शों की कहानी
अंग्रेजों के जाने के बाद किसी भी सरकार ने अपने क्षेत्रफल के रिकार्ड को अपडेट करने में दिलचस्पी नहीं ली। सबसे अधिक अपडेट नक्शा 1930 का है। इसको वाह साहब कहा जाता है। अब वाह साहब दिल्ली यूपी के सीमा विवाद को हल कराने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। कई विवादित इलाकों के नक्‍शे प्रशासन के रिकार्ड रूम में मिल नहीं रहे हैं। जिसकी वजह से समस्या सुलझने में अड़चन आ रही है।


भू राजस्व एक्ट और वाह साहब की मदद से दिल्ली-यूपी बाउंड्री लाइन का निर्धारण किया जा रहा है। इस कार्य को दिल्ली और गाजियाबाद के अधिकारी अंजाम दे रहे हैं।
आरके शर्मा, एडीएम प्रशासन


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