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10 परीक्षक कैसे जांचेंगे 42000 कापियां

Ghaziabad

Updated Thu, 03 May 2012 12:00 PM IST
गाजियाबाद। यूपी बोर्ड की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन मजाक बनकर रह गया है। गाजियाबाद के तीन मूल्यांकन केंद्रों पर परीक्षकों की उपस्थिति का आंकड़ा ऐसा है कि मूल्यांकन कार्य 10 मई तो क्या 20 मई तक भी पूरा नहीं होगा। स्थिति इतनी खराब है कि सात दिनों में मात्र दो लाख उत्तर पुस्तिकाएं ही जांची जा सकी हैं। जब मूल्यांकन की गति ही धीमी है तो त्रिस्तरीय मूल्यांकन तो दूर की बात है। अभी भी करीब 5 लाख उत्तर पुस्तिकाएं जांची जानी बाकी हैं और 8 दिन शेष हैं। बता दें कि जिले के तीनों केंद्रों पर करीब 400 परीक्षकों की कमी बनी हुई है। सबसे खराब स्थिति तो एमएमएचवी इंटर कालेज मूल्यांकन केंद्र की है। यहां होम साइंस की 42000 उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन की जिम्मेदारी मात्र 10 परीक्षकों पर है। यही नहीं संस्कृत की 15000 कापियां सात दिन से केवल 4 परीक्षक जांच रहे हैं। परीक्षकों की अनुपस्थित से परेशान मूल्यांकन केंद्र प्रभारियों ने मूल्यांकन का समय 10 से 5 के बजाए 8 से 6 बजे तक कर दिया है, लेकिन इससे भी कोई खास फर्क नहीं पड़ा है। वहीं, डीआईओएस डा. केएल वर्मा ने बीएड, पालीटेक्निक और सेल्फ फाइनेंस स्कूलों को परीक्षक भेजने के लिए पत्र भेजा है, लेकिन परीक्षक नहीं पहुंचे हैं। खास बात यह है कि सेल्फ फाइनेंस स्कूल परीक्षक भेजने को तैयार नहीं है।
सात दिनों में 50 हजार कापियां जांची गई हैं। आठ दिनों में 93 हजार कापियां जांची जानी हैं। परीक्षकों की कमी बनी हुई है। 355 परीक्षक और डीएचई को मूल्यांकन करना था, लेकिन 244 ही मौजूद हैं। ऐसे में मूल्यांकन 10 तक पूरा नहीं हो सकता। - केवी सिंह, प्रिंसिपल,सेठ मुकंदलाल इंटर कालेज

एजुकेशन और होम साइंस में परीक्षकों की कमी बड़ी समस्या है। सात दिनों में एक लाख 30 हजार कापियां ही जांची जा सकी हैं। 428 में से 328 परीक्षक ही पहुंचे हैं। 100 परीक्षक कम हैं। 30 परीक्षक भी और मिल जाएं तो स्थिति संभल सकती है।
-नूतन सक्सेना, प्रभारी मूल्यांकन,एसडी इंटर कालेज


होमसाइंस और संस्कृत में सबसे बुरी स्थिति है। परीक्षक मांगे गए हैं, लेकिन नहीं मिले। 427 में से 234 परीक्षक ही मूल्यांकन कर रहे हैं। होम साइंस में 42000 उत्तर पुस्तिकाओं में 10000 जांची जा चुकी हैं और 32000 बाकी हैं। संस्कृत में भी काफी खराब स्थिति है।
-बबलू सिंह, प्रिंसिपल एमएमएचवी

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