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ठंडे बस्ते में डाल देते खाकी पर दर्ज मुकदमे

Firozabad

Updated Thu, 08 Nov 2012 12:00 PM IST
फीरोजाबाद। दुराचार का मामला हो या फिर हत्या, आत्महत्या के लिए प्रेरित करने का। सभी आरोप खाकी के दामन पर लगे और अभियोग भी दर्ज हुए, लेकिन मामलों की विवेचना की रफ्तार इतनी धीमी चली कि उनके खिलाफ आज तक कार्रवाई नहीं हो सकी। पुलिस वालों पर दर्ज होने वाले मुकदमों में अक्सर प्रभावी कार्यवाही नहीं होती। इन मामलों में एफआर लगा दी जाती है या फिर ठंडे बस्ते में डाल दिए जाते हैं।
केस एक
अगस्त माह में टूंडला निवासी एक युवती को सिपाही ने शादी का झांसा देकर प्रेमजाल में फंसाया और होमगार्ड के साथ टूंडला क्षेत्र में उसकी अस्मत लूट ली। युवती ने सिपाही को नामजद करते हुए होमगार्ड के खिलाफ दुराचार का अभियोग दर्ज कराया था। युवती की तहरीर पर उसका मेडिकल कराने के बाद मामला भी दर्ज कर लिया, लेकिन आरोपी के खिलाफ कार्यवाही नहीं हुई।
केस दो
थाना रामगढ़ में दो अगस्त की सुबह शब्बू रहमान ने पुलिस दुत्कार के चलते थाने में ही आग लगा ली थी। उपचार के दौरान मौत हो गई थी। तत्कालीन थानाध्यक्ष आकील गाजी के साथ पांच अन्य के खिलाफ मुकदमा कायम हुआ। आकील गाजी आज तक गिरफ्तार नहीं किया, जबकि सभी आरोपी सलाखों के पीछे हैं।
केस तीन
हाल ही में थाना उत्तर पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए हिस्ट्रीशीटर जीशान की मौत के मामले में एसओजी प्रभारी सहित चार पुलिस वालों के खिलाफ संगीन धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। इस मामले में भी पुलिस अधिकारी कोई ठोस कार्यवाही करने के बजाए यही कह रहे हैं पहले जांच होगी बाद में कोई कार्यवाही।

कानून खाकी के लिए नहीं ?
किसी आम आदमी के खिलाफ हत्या, दुराचार, मारपीट जैसे मामले दर्ज हो जाएं तो पुलिस आरोपी की गिरफ्तारी के लिए तत्काल कार्यवाही करती है। जबकि कानून इस बात को कहता है कि विवेचना में जब तक कोई व्यक्ति दोषी नहीं पाया जाता, गिरफ्तारी नहीं की जा सकती, पर शायद कानून आम जनता पर लागू होते हैं खाकी पर नहीं।

जांच से पहले निलंबन नहीं: एएसपी
फीरोजाबाद (ब्यूरो)। जीशान की हत्या का आरोप जिन दरोगाओं पर लगाया गया, वह पुलिस अफसरों की निगाह में फिलहाल निर्दोष हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच की जा रही है। दोषी पाए जाते है तो निलंबन की कार्रवाई की जाएगी। एएसपी विपिन कुमार मिश्रा का कहना है कि आरोप लगने से कर्मचारी या अधिकारी दोषी नहीं होता है। जांच में यदि दोष सिद्ध होता है तब कार्यवाही होगी।
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