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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड नहीं दे रहा एनओसी

Firozabad

Updated Wed, 29 Aug 2012 12:00 PM IST
फीरोजाबाद। एक ओर मुख्यमंत्री आगरा से लखनऊ एक्सप्रेस वे के किनारे औद्योगिक कलस्टर बनाकर औद्योेगिक विकास को गति प्रदान करने के मंसूबे बना रहे है, तो दूसरी ओर हकीकत यह है कि पिछले एक दशक से फीरोजाबाद में कोई बड़ी इंडस्ट्रीज नहीं लगी है। मुद्दा ताज संरक्षण बनाम औद्योगिक विकास का है, जिसमेें करीब 200 नई इकाईयों और विस्तारीकरण का प्रस्ताव लंबित है।
आगरा से लखनऊ एक्सप्रेस वे के किनारे फीरोजाबाद, आगरा, कन्नौज और कानपुर में एक्सप्रेस वे को औद्योगिक कलस्टरों से जोड़ा जाना है। आज हालात यह है कि फीरोजाबाद कांच और चूड़ी उद्योग के लिए दुनिया भर में जाना जाता है। इस समय यहां पर करीब 180 उद्योग है। पिछले एक दशक में एक भी नई फैक्ट्री नहीं लगी है। उद्योग केंद्र की माने तो 200 नई इंडस्ट्रीज का प्रस्ताव लंबित है। यह चालू हो जाए तो करीब 150 करोड़ का निवेश होगा और हजारों लोगों को रोजगार मिलेगा, लेकिन प्रदूषण बोर्ड के प्रावधान को लेकर गतिरोध है। वास्तविक स्थिति को परखने के लिए खुद जिलाधिकारी ने पहल की है और एक समिति बनाई है।

क्या है गतिरोध:
जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक सुधीर कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि दि एनवायरमेंट प्रोटेक्शन एक्ट 1986 की धारा (3) और (6) में वर्णित है, यदि किसी औद्योगिक क्षेत्र में प्रतिबंध लगाना है तो उसकी अधिसूचना जारी की जाएगी। धारा (5) में मंडलायुक्त को अधिकार दिए गया है। प्रतिबंध प्रदूषण फैलाने वाली और कोयला से चलने वाली इकाइयों पर है। दूसरा बोर्ड कहता है कि प्रतिबंध 1983 से लागू है तो उसके बाद 150 इंडस्ट्रीज कैसे लग गई। उनका कहना है कि माननीय उच्चतम न्यायालय रोजगार या औद्योगिक विकास के पक्ष में है। टीटीजेड में 27 ईंट भट्टों को अनुमति दी गई है। जिलाधिकारी द्वारा बनाई गई समिति सभी प्रावधानों की जांच करेंगी। जरूरत पड़ी तो राज्य उद्योग बंधु की बैठक में भी प्रकरण को लेकर जाएंगे।

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कार्यालय
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कार्यालय के क्षेत्रीय अधिकारी राजेंद्र प्रसाद का कहना है कि नई इकाईयों की स्थापना पर पर्यावरण एवं वन मंत्रालय की रोक है। फिर टीटीजेड की स्थापना तो अपने आप में महत्वपूर्ण है, ऐसे में किसी अध्यादेश और अधिसूचना की बात नहीं रह जाती है। समिति के वह भी सदस्य है, सही स्थिति स्पष्ट करेंगे।
स्थिति एक:- सूचना के अधिकार के तहत सुनील शर्मा ने संबंधित विभाग से जानकारी मांगी। इसमें 1983 के एक जीओ के अंतर्गत उसकी सही स्थिति के बारे में और किस अधिकारी ने किन परिस्थितियों में जारी करने संबंधी जानकारी पर पर्यावरण और वन मंत्रालय की ओर से कहा गया कि पुराना मामला होने के कारण रिकार्ड उपलब्ध नहीं है।
स्थिति दो:- गत वर्ष आगरा के तत्कालीन मंडलायुक्त अमृत अभिजात को पर्यावरण एवं वन मंत्रालय के निदेशक एम राना ने कहा कि नौ जनवरी 1996 से टीटीजेड में इंडस्ट्रीज का विस्तारीकरण प्रतिबंधित है। शपथ पत्र भी उच्चतम न्यायालय में विभाग की ओर से दिया गया है।

क्या कहते है उद्यमी
* यूपीजीएमएस के अध्यक्ष मोहनलाल अग्रवाल का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट और प्रदूषण बोर्ड के अपने प्रावधान है। यदि सही स्थिति सामने आए और औद्योगिक विकास हो तो क्षेत्र का भी विकास होगा।
* हनुमान प्रसाद अध्यक्ष दि ग्लास सिंडीकेट का कहना है कि 1983 का जो आदेश है, वह कोयला से चलने वाले उद्योगों पर था। अब फ्यूल और गैस से उद्योग चल रहे है। वह इतना प्रदूषण नहीं फैलाते। यदि नए उद्योग लगे, पुरानों का विस्तारीकरण हो तो शहर का भी विकास होगा।
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