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बारिश में भी धरती की कोख प्यासी

Firozabad

Updated Fri, 24 Aug 2012 12:00 PM IST
फीरोजाबाद। भारी बरसात से कई मोहल्लों में जलभराव है और लोग त्रस्त हैं, लेकिन धरती की कोख प्यासी की प्यासी है। अगस्त माह में हुई बरसात का पानी यदि संजो लिया जाता और भू-गर्भीय जल संभरण (वाटर रिचार्ज सिस्टम) के प्रति व्यवस्था व लोग गंभीर होते तो झमाझम हो रही बरसात फीरोजाबाद का जल संकट दूर कर देती।
फीरोजाबाद में हालात इतने खतरनाक हो गए हैं कि बरसात के मौसम में भी पानी नीचे जा रहा है और सबमर्सिबल, नकलूप ठप हो रहे हैं। भू-गर्भ जल संस्थान के आंकड़ों की माने तो अगर एक हजार एमएम बरसात पूरे साल में हो जाए तो सौ वर्ग मीटर की छत से एक लाख लीटर पानी प्राप्त होता है और इसमें 80 हजार लीटर पानी धरती के भीतर के जल स्रोतों में भेजा जा सकता है। एक हेक्टेयर क्षेत्रफल में पानी के वाटर रिचार्ज वेल या दूसरी कोई व्यवस्था हो तो 300 एमएम बरसात में दस लाख लीटर पानी प्राप्त होता है, इसमें पांच से छह लाख लीटर पानी आराम के साथ धरती की कोख में संजोया जा सकता है। इससे शहर की प्यास बुझाई जा सकती है। जबकि शहर में वाटर रिचार्ज और अन्य जल संयोजन व्यवस्थाओं का ध्यान नहीं है। शासनादेश है कि तीन सौ वर्ग मीटर से अधिक मकान का नक्शा तभी पास होगा, जब बरसात के पानी के भू-गर्भजल संरक्षण क ी व्यवस्था होगी। सरकारी भवनों में भी यह अनिवार्य है लेकिन अमल कहीं नहीं है।

मकान की छतों पर बरसात का कितना पानी
छत का क्षेत्रफल कुल बरसात के सापेक्ष उपलब्धता
वर्ग मीटर में 300 400 500 600 800 (बरसात-एमएम)
50 वर्ग मीटर 12 16 20 24 32 घन मीटर
200 वर्ग मीटर 48 64 80 96 128
250 वर्ग मीटर 60 80 100 120 160
400 वर्ग मीटर 96 128 160 192 256

नोट: आंकड़ों में बरसात मिली मीटर में है तथा पानी की उपलब्धता घन मीटर में है। एक लाख लीटर पानी सौ घन मीटर होता है।

बरसात के बाद भी वाटर रिचार्ज सिस्टम की उचित व्यवस्था नहीं होने के कारण भू-गर्भीय जल स्तर बढ़ने में बहुत अधिक सुधार होने की स्थिति नहीं है। जनपद में पांच ब्लाक अति दोहित श्रेणी में है। इनमें जितना वाटर रिचार्ज होता है, उससे अधिक दोहन हो रहा है। एक ब्लाक सेमी क्रिटिकल में चिह्नित है। थोड़ा बहुत फर्क पड़ेगा भी तो बरसात समाप्त होने के पांच छह दिन बाद। लोगों को इस दिशा में चेतना होगा।
भूगर्भ जल विज्ञानी, आगरा जोन, डा. वीके उपाध्याय
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