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बदलते मौसम ने बढ़ाए वायरल के मरीज

Firozabad

Updated Wed, 22 Aug 2012 12:00 PM IST
फीरोजाबाद। मौसम के उतार चढ़ाव व प्रदूषित जलापूर्ति ने शहरवासियों पर चौतरफा हमला कर दिया है। बदलते मौसम से जहां लोग बीमार हो रहे हैं। वहीं प्रदूषित जलापूर्ति कोढ़ में खाज साबित हो रही है। शहर के सरकारी व निजी अस्पतालों में वायरल, टायफाइड, पीलिया के मरीजों की भीड़ जुट रही है।
दो दिन की छुट्टी के बाद खुले शहर के सरोजनी नायडू जिला चिकित्सालय की ओपीडी में मरीजों की भीड़ लगी रही। पर्चा बनवाने से लेकर चिकित्सक को दिखाने तक मरीज परेशान थे। कतार इतनी लंबी थी दोपहर एक बजे जब पर्चा बनना बंद हुआ उसके बाद करीब एक सैकड़ा मरीजों को चिकित्सक को बिना दिखाये घर लौटना पड़ा। इसमें सबसे ज्यादा मरीज वायरल, उल्टी, पीलिया, टायफाइड बुखार के थे। मंगलवार को ओपीडी में आठ सौ से अधिक पर्चे बने। सर्जन कक्ष में सबसे ज्यादा भीड़ थी। चिकित्सक भी भीड़ होने के चलते मरीज को जल्द चलता करने में जुटे थे। मरीज अमला खातून ने बताया कि उसने एक माह का रोजा रखा था। ईद पर जब उसने रोजा तोड़ा इसके बाद से उसे सर्दी ने जकड़ लिया। नई बस्ती निवासी मीना(34), कमला (43) ने बताया कि संक्रमण के चलते चिकित्सकों ने डायरिया बताया है। कोटला निवासी मोहम्मद यूसफ, किशोर, अलीबेग, कमल जैन भी पीलिया की बीमारी से ग्रसित थे। वहीं सरकारी के साथ-साथ प्राइवेट चिकित्सक डा. दीपक अग्रवाल, डा. धर्मेंद्र अग्रवाल के क्लीनिक पर भी मरीजों की लंबी भीड़ लगी रही। इस बारे में जिला अस्पताल के चिकित्सक डा. आर एस सुधाकर का कहना है कि मौसम के बदलाव से मरीजों की संख्या बढ़ी है। पीलिया के मरीज प्रदूषित जल आपूर्ति से बढ़ रहे हैं। डा. अजय अग्रवाल ने बताया कि बदलते मौसम व उमस से लोग वायरल की चपेट में, शहर में फैली गंदगी से डायरिया लोगों पर मुसीबत बनकर टूट रहा है। इस बारे में सीएमएस डा. वीएस यादव का कहना है कि सभी मरीजों को दवाएं दी जा रही हैं। भीड़ होने के बाद भी सभी मरीजों को देखा जा रहा है।
अस्पताल में लगा गंदगी का अंबार
फीरोजाबाद। शहर की गंदगी से फैली बीमारियों को दूर करने में लगे अस्पताल प्रशासन को अस्पताल में गंदगी नजर नहीं आती। अस्पताल परिसर के बाल रोग कक्ष के बगल में कूड़े का ढेर लगा हुआ है। सफाई के अभाव में अस्पताल में मक्खी का प्रकोप व्याप्त है। इसके चलते मरीज बेबस नजर आते हैं। बीमार मरीज इंफेक्शन फैलने के डर से जल्दी घर जाते हैं।
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