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बिजली संकट-खेतीबाड़ी, कारोबार,पढाई-लिखाई सब चौपट

Fatehpur

Updated Mon, 01 Oct 2012 12:00 PM IST
देहात क्षेत्र में आपूर्ति
की व्यवस्था चरमराई
- ग्रामीण फीडरों को महज चार से छह घंटे आपूर्ति
फतेहपुर। भले ही बिजली विभाग आपूर्ति की व्यवस्था दुरुस्त होने के दावे कर रहा हो लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। मात्र चार से छह घंटे ही आपूर्ति ही ग्रामीण फीडरों को मिल पाने की वजह से खेती के कार्य पर विपरीत असर पड़ रहा है। इससे किसानों में खासा आक्रोश है। खरीफ के लिए इस समय पानी की जरूरत है लेकिन बिजली न मिलने की वजह से सिंचाई व्यवस्था प्रभावित हो रही है। खासकर धान की फसल बचाने में किसानों को दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है।
विद्युत कार्पोरेशन द्वारा निर्धारित रोस्टर के मुताबिक शहरी में कम से कम सोलह घंटे और ग्रामीण क्षेत्र में दस से बारह घंटे की आपूर्ति के निर्देश हैं हालांकि ग्रामीण क्षेत्र के अधिकांश फीडरों को महज चार से छह घंटे की आपूर्ति ही मिल पा रही है। असोथर प्रतिनिधि के मुताबिक क्षेत्र में आपूर्ति व्यवस्था बेहद ही खराब है। बमुश्किल चार से छह घंटे की बिजली ही मिल पा रही है। आपूर्ति के दौरान औसतन पंद्रह-सोलह बार कटिंग हो जाती है। निर्धारित आपूर्ति नहीं मिल पा रही है। जिसके चलते उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
धाता प्रतिनिधि के मुताबिक क्षेत्र की बिजली आपूर्ति पटरी पर नहीं लौट रही है। किसी भी फीडर समुचित आपूर्ति नहीं दी जा रही है। नियमित आपूर्ति मुहैया कराने के बजाए रोस्टर के मुताबिक दो-तीन घंटे की सप्लाई दी रही है। यह समस्याएं अन्य ग्रामीण क्षेत्रों में भी हैं। खखरेड़ू, थरियांव, हुसेनगंज आदि क्षेत्र में भी आपूर्ति ही स्थिति ऐसी ही है। अधिशाषी अभियंता आर रंजन ने कहा कि गरमी में लोड बढ़ने की वजह से कुछ दिक्कत आती है किन्तु जितनी आपूर्ति मिल रही है उतना मुहैया कराई जा रही है। बिजली की समस्या हर जगह है।
इंसेट
लगातार ब्रेकडाउन से बुरा हाल
फतेहपुर। शहर में बिजली आपूर्ति की व्यवस्था सुधरने का नाम नहीं ले रही है। आपूर्ति के दौरान लगातार ट्रिपिंग होती रहती है। ब्रेकडाउन की समस्या बहुत ज्यादा है। सबसे बड़ी बात यह कि जो भी तकनीकी दिक्कत आती है उसे रोस्टिंग के समय दुरुस्त करने के बजाए आपूर्ति के दौरान की शटडाउन देकर ठीक किया जाता है। ऐसे में जो बिजली आ भी रही है वह मिल नहीं पाती है। विभागीय आंकलन के मुताबिक कुल आपूर्ति की करीब पंद्रह फीसदी बिजली का लास विभिन्न तकनीकी खामियों की वजह से हो रहा है।
इंसेट
कनेक्शनधारकों से ज्यादा है लोड
खागा/फतेहपुर। खागा उपकेंद्र में ओवर लोडिंग की समस्या व्यापक स्तर पर है। 33 केवीए क्षमता के उपकेंद में जितने कनेक्शनधारक है। उतनी ही तादात में अवैध कनेक्शन भी चल रहे हैं। आबादी बढ़ने के साथ लगातार लोड बढ़ रहा है बावजूद इसके उपकेन्द्र की क्षमता नहीं बढ़ाई गई है, जिससे दुरुस्त सप्लाई नहीं मिल पाती है। लो-वोल्टेज की समस्या पूरे नगर में है। खासकर शाम के समय वोल्टेज बहुत की डाउन रहता है। उपभोक्ताओं के लगातार शिकायत के बाद भी ओवरलोडिंग की समस्या से निपटने के प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। उपखंड अधिकारी नंदलाल ने बताया कि उपकेन्द्र की क्षमता बढ़ाए जाने का प्रस्ताव है जिसके अमल में लाने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि अनाधिकृत कनेक्शन विच्छेदन के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है।

जर्जर लाइनें बनी
आपूर्ति में बाधक
- लोड बढ़ते ही टूटने लगते हैं तार
- दशकों पुराने तार बदलने की जरूरत
बिंदकी/फतेहपुर। निर्बाध बिजली आपूर्ति मुहैया कराने में जर्जर तार एक बड़ी रुकावट बने हुए है। विभाग द्वारा कई बार इस कार्य के लिए लाखों रुपये का स्टीमेट तैयार किया गया लेकिन मरम्मत के नाम पर एक रुपया नहीं मिला, जिससे के क्षेत्र की जर्जर विद्युत लाइनों को स्थायी तरीके से बदला जा सके।
नगर सहित बिंदकी तहसील क्षेत्र के अधिकांश ग्रामीण क्षेत्रों की विद्युत लाइन बेहद ही जर्जर हैं। लाहौरी, नई बाजार, फाटक बाजार, ललौली रोड, पैगंबरपुर, मुगल रोड सहित अधिकांश मुहल्लों में विद्युत तार जर्जर होकर झूल रहे हैं। आए दिन फाल्ट होती रहती है। गरमी में बिजली की डिमांड अधिक बढ़ गई है। लोड अधिक होने से इस तरह के मामले ज्यादा सामने आ रहे हैं। उपभोक्ताओं कहना है कि जितनी संजीदगी विभाग बिलों की उगाही में दिखाता है उतना ही तकनीकी खामियों के निराकरण में उदासीन है। नगर के मीरकपुर निवासी अशोक गुप्ता, महजरी गली के संतोष गुप्ता, पुरानी बिंदकी के रणविजय सिंह, बस स्टाप चौराहे के निकट रहने वाले कप्तान सिंह सहित तमाम वाशिंदों ने बिजली समस्या का जिक्र करते हुए आपूर्ति व्यवस्था दुरुस्त कराने की मांग की है। इन नगर वाशियों का कहना है कि तकनीकी खामियों के चलते समुचित आपूर्ति नहीं मिल पा रही है। गरमी के दिनों में बिजली आपूर्ति दुरुस्त न होने की वजह से मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
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