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श्रमिक विद्यालयों में अब नहीं होगी मनमानी

Fatehpur

Updated Sun, 24 Jun 2012 12:00 PM IST
फतेहपुर। विशेष बाल श्रमिक विद्यालयों में दाखिला लेने वाले बच्चों की सच्चाई जानने के लिए छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय कानपुर की चार सदस्यीय टीम ने जिले में डेरा डाल दिया है। टीम के सदस्य सदर व बिंदकी तहसील क्षेत्र में संचालित इन विद्यालयों में पंजीकृत बच्चों के बारे में अपने स्तर से जानकारी हासिल कर रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि इस तरह की शिकायतें मिल रही थीं कि इस क्षेत्र में काम करने वाली कुछ एनजीओ ने भागदौड़ से बचने के लिए इन विद्यालयों में कई ऐसे बच्चों को पंजीकृत कर दिया, जिनका बाल श्रम से दूर-दूर का वास्ता नहीं रहा है। इसीलिए हकीकत जानने के लिए टीम आई है, ताकि मनमानी पर रोक लग सके। नए सत्र में अब वही बच्चे विशेष बाल श्रमिक विद्यालय में दाखिला पा सकेंगे, जो वास्तव में बाल श्रम में लिप्त पाए गए होंगे।
श्रम मंत्रालय से संबद्ध विशेष बाल श्रमिक विद्यालय वर्ष 2006 से संचालित हैं। जिले में उनकी संख्या 39 है। इन विद्यालयों का मकसद 8 से 14 वर्ष के ऐसे बच्चे जो बाल श्रम कर रहे हैं। उन्हें तीन साल मेें कक्षा पांच पास कराके जूनियर कक्षा में दाखिला दिलाने की जिम्मेदारी उठानी है। इस काम के लिए बाकायदा एनजीओ का सहारा लिया गया है। लेकिन एनजीओ स्तर से बाल श्रमिकों को चिंह्ति कर उन्हें समाज की मुख्य धारा से जोड़ने की कवायद खरी नहीं उतर पाई। कई ऐसी शिकायतें भी मिली कि कई ऐसे बच्चे इन विद्यालयों के रजिस्टर में जगह पा गए जो बाल श्रम से दूर-दूर तक वास्ता नहीं रखते। एनजीओ ने खुद को भागमभाग से बचाने के लिए रजिस्टर में जगह दे दी। पर वास्तव में जो बच्चे बाल श्रम कर रहे हैं वे रोज की तरह काम के बोझ तले दबे नजर आ रहे हैं।
श्रम विभाग दफ्तर से मिली जानकारी के मुताबिक ऐसी कई खामियों के सामने आने पर इस बार बाल श्रमिकों का सर्वे हो रहा है। पड़ताल करने के लिए छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय कानपुर की चार सदस्यीय टीम आई है। टीम के सदस्य सदर व बिंदकी तहसील क्षेत्र में संचालित विशेष बाल श्रमिक विद्यालयों में पंजीकृत बच्चों के बारे में अपने स्तर से जानकारी हासिल करेंगे। खागा तहसील क्षेत्र के लिए यह जिम्मा एक एनजीओ को मिला है। इलाहाबाद की नेहरू ग्राम भारती संस्था तहसील के बाल श्रमिकों का सर्वे कर रही हैं। सहायक श्रमायुक्त राजेश कुमार का मानना है एनजीओ स्तर से बाल श्रमिकों के किए जाने वाले सर्वे का मूल्यांकन होने से बाल श्रमिक विद्यालय बदले-बदले दिखाई देंगे।
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