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केंद्रों पर बारिश से बचाव के लिए कुछ भी नहीं

Fatehpur

Updated Wed, 20 Jun 2012 12:00 PM IST
फतेहपुर। सोमवार को हुई हल्की बारिश के बाद भी क्रय केंद्रों पर खुले में रखा किसानों का गेहूं ढकने की कोई व्यवस्था नहीं हुई है। इससे उन किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें उभर आई हैं, जिनका गेहूं क्रय केंद्रों पर खुले में पड़ा है। तौल के इंतजार में कई-कई रोज से डेरा डाले किसानों का कहना है कि अगर एक दो-दिन इसी प्रकार की अनदेखी और होती है तो खुले बाजार में तौल कराने को मजबूर होंगे।
जिले के ज्यादातर गेहूं क्रय केंद्रों पर पखवारे भर से गेहूं की तौल ठप है। इसके चलते दूर-दूर के तमाम किसान तौल के इंतजार में क्रय केंद्रों पर डेरा डाले हैं और उपज खुले आसमान के नीचे पड़ी है। सोमवार की शाम बदली छाने और कुछ देर बाद पानी बरसने से किसान चिंतित हैं। मंगलवार को ‘अमर उजाला’ की टीम ने कई क्रय केंद्रों का जायजा लिया तो तौल बंद होने के साथ ही तमाम अव्यवस्थाएं दिखीं। बारिश से निपटने का कहीं कोई इंतजाम नहीं नजर आया। बादल छाए रहने से उन किसानों के हौसले जवाब दे गए हैं जो तौल के लिए अभी भी घर-द्वार छोड़कर क्रय केंद्रों पर डेरा डाले हैं। मलवां क्रय केंद्र में चार दिन से गेहूं के साथ डेरा डाले किसान सहदेव कुमार ने बताया मानसून आ गया है। तौल के लिए रोज केवल आश्वासन मिल रहा है। उन्हीं के साथ आए शैलेंद्र सिंह ने कहा वह चौबीस घंटा और देखते है। अगर इस दौरान तौल नहीं होती है तो वह गेहूं को लदवा कर खुले बाजार में बेचने को मजबूर होंगे।
बिंदकी क्रय केंद्र पर गेहूं तौलाने के लिए दो दिन से चक्कर काट रहे किसान अवधेश मिश्र ने बताया क्रय केंद्र में गेहूं को खुले में रखवा दिया गया है। यदि इस बीच तेज बारिश हो गई तो खासा नुकसान उठाना पडे़गा। किसान सागर सिंह कहते है पिछली बार भी उनका गेहूं प्रशासन की लापरवाही से भीग गया था। इस बार भी आसार अच्छे नहीं लगते। असोथर क्रय केंद्र पर भी गेहूं का अंबार लगा है। किसान महामाया सिंह कहते हैं कि अब सरकारी समर्थन मूल्य के लाभ के चक्कर में पड़ना व्यर्थ है। उनका आरोप है कि क्रय केंद्र पर सिर्फ बिचौलियों के गेहूं की ही तौल हो रही हैं, किसानों को कोई न कोई बहाना बताकर टरकाया जा रहा है। मनांवा क्रय केंद्र पर तौल की बारी का इंतजार कर रहे किसान प्रवीण कुमार बताते हैं सोमवार को बादल छाने के बावजूद क्रय केेंद्र पर गेहूं को भीगने से बचाने की कोई व्यवस्था नहीं की गई है।
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