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पहनते ही फट रहीं स्कूल ड्रेसें

Fatehpur

Updated Thu, 13 Dec 2012 05:30 AM IST
फतेहपुर। बेसिक स्कूलों में आखिर दो सौ रुपए में गुणवत्तापरक ड्रेस कैसे तैयार हो? डेढ़ सौ रुपए बच्चों के पैंट शर्ट की सिलाई, बीस रुपए से कम नहीं है टाई और बेल्ट की कीमत। शेष तीस रुपए के कपड़े में तैयार कराना है छात्रों की ड्रेस। ऐसी हालत में गुणवत्ता परक ड्रेसों का वितरण कैसे संभव होगा। खास बात तो यह है कि ड्रेस वितरण व्यवस्था शिक्षकों की नौकरी के लिए खतरा बन गई है, लेकिन अगर नौकरी बरकरार रखना है, तो ड्रेस का वितरण करना ही होगा। बेसिक शिक्षा विभाग ने परिषदीय स्कूलों में कक्षा एक से आठ तक दो लाख 84 हजार 815 छात्र-छात्राएं शिक्षारत हैं। इनमें शत प्रतिशत छात्राएं, पिछड़े, अनुसूचित जाति तथा बीपीएल कार्ड धारक परिवारों के दो लाख 46 हजार 560 बच्चों को ड्रेस वितरण के लिए विभाग ने 9 करोड़ 86 लाख 24 हजार की धनराशि जिलेभर के सभी परिषदीय स्कूलों में भेजी थी। इस धनराशि से प्रति बच्चे को प्रति ड्रेस दो सौ रुपए के हिसाब से दो सेट ड्रेस देने की व्यवस्था है। खास बात तो यह है कि बाजार में छह साल से अधिक किसी बच्चे का पैंट शर्ट सिलाने में कम से कम डेढ़ सौ रुपए सिलाई लगती है। खराब से खराब बाजार में टाई बेल्ट की कीमत बीस रुपए से कम नहीं है। इस तरह से एक ड्रेस की सिलाई और टाई बेल्ट की कीमत मिलाकर 170 रुपए खर्च हो जाते हैं। ऐसी हालत में कुल दो सौ रुपए के बजट में सिर्फ तीस रुपए पैंट शर्ट का कपड़ा खरीदने के लिए बचते हैं। इस महंगाई में तीस रुपए का पैंट शर्ट का कपडा मिलना संभव नहीं है। इसके बावजूद अगर शिक्षकों को नौकरी करना है, तो उन्हें सिली हुई ड्रेस का वितरण तो करना ही है। यही कारण है कि बितरण की जानी वाली ड्रेसों की गुणवत्ता बहुत ही घटिया है। किसी भी स्कूल के छात्रों में बांटी गई ड्रेसें महीनेभर से अधिक चलने वाली नहीं हैं। ऐसी हालत में साफ है कि बांटी गई ड्रेसों से कोई भी छात्र-छात्रा चालू सत्र में स्कूल नहीं पहुंच पाएंगे। ड्रेसों की गुणवत्ता साफ बता रही है कि दोनों ड्रेसें कोई भी बच्चा महीनेभर से अधिक नहीं पहन पाएगा।
इंसेट
मंशा के अनुरूप बांटी गई ड्रेस
फतेहपुर। बेसिक शिक्षा अधिकारी राजेंद्र प्रसाद यादव का कहना है कि शासन की मंशा के अनुरूप ड्रेसों का वितरण किया जा चुका है। प्रत्येक बच्चे को दो सेट ड्रेस दी जा चुकी हैं।
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