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जिलेभर के ईंट-भट्ठे बंद रखने का एलान

Fatehpur

Updated Sat, 20 Oct 2012 12:00 PM IST
फतेहपुर। मनमाने ढंग से मिट्टी खनन रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए जारी आदेश के अनुपालन में शासन द्वारा उठाए गए कदम के बाद ईंट भट्ठा संचालकों में हड़कंप है। जिनका मानना है कि जिस तरह से खनन में बंदिशें लगाई जा रही हैं उससे ईंट उद्योग चौपट हो जाएगा और पेशे से जुड़े तमाम लोग बर्बाद हो जाएंगे। हालांकि मामले में अभी तक कोई शासनादेश नहीं आया है। जिला खनन अधिकारी के कहना है कि शासन को पत्र लिखकर मिट्टी खनन संबंधी गाइड लाइन मांगी गई है। उधर, भट्टा संचालकों द्वारा इस संबंध में सरकार द्वारा सार्थक कदम न उठाए जाने तक भट्टा बंद रखने का निर्णय लिया गया है। मालूम हो कि एक अक्टूबर 2012 को हाईकोर्ट ने एक याचिका की सुनवाई करते हुए सरकार को आदेश जारी किया है। जिससे तहत मिट्टी का मनमाने तरीके से हो रहे खनन पर अंकुश लगाने के लिए आवश्यक कदम उठाने को कहा गया है। भट्टा मालिकों का कहना है कि खनन संबंधी जो शर्तें लागू की जा रही हैं उनका अनुपालन भट्टा मालिकों के लिए मुश्किल है और यदि तय शर्तों के बगैर उद्योग का संचालन करते हैं तो इससे न्यायालय की अवमानना होगी।
यदि भट्टा संचालक निर्णय पर अडिग रहे और ईंट निर्माण का काम बंद रहता है तो उससे उपभोक्ताओं की मुश्किलें बढ़ना स्वाभाविक जानकारों की माने तो ईंट की शार्टेज से कीमतों में तेजी आएगी जिससे निर्माण कार्य प्रभावित होंगे और विकास कार्य में शिथिलता आएगी। इसके अलावा सैकड़ाें लोगों की रोजी छिनेगी वह एक और समस्या। बता दें कि जनपद में ईंट भट्टों की कुल संख्या 253 हैं। एक अनुमान के मुताबिक करीब दो सौ व्यक्ति सीधे तौर पर जुड़े होते हैं। इनमें पथाई का काम करने वाले मजदूर, झोकाई का काम करने वाले व अन्य कर्मी शामिल हैं। इस प्रकार यदि एक सीजन तक भट्ठों का संचालन बंद रहा तो सैकड़ों परिवारों के सामने रोटी का संकट पैदा हो जाएगा।

इंसेट
क्या है मामला
फतेहपुर। सर्वोच्च न्यायालय के आदेश संख्या दिनांक 29/02/2012 के अनुपालन में शासन ने भट्टा संचालकों के लिए मिट्टी खनने से पहले पर्यावरण एवं वन मंत्रालय से स्वच्छता प्रमाण पत्र लेना अनिवार्य कर दिया है। प्रमाण पत्र मिलने के बाद ही संचालक खनन करके ईंटों का निर्माण कर पाएंगे। इसके साथ ही पर्यावरण को देखते हुए संचालकों के लिए चिमनियों की निर्धारित उंचाई एवं ईंट भट्टों के आसपास हरियाली का आदि मानक दुरुस्त रखने को कहा है। इसी क्रम में एक याचिका की सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने 1/10/12 को प्रदेश सरकार को सुप्रीम कोर्ट के आदेश का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित कराने के लिए ठोस कदम उठाने को कहा है। जिसके बाद से भट्टा मालिकों में हड़कंप है।

इंसेट
मिट्टी खनन को लेकर जिस तरह की जटिलताएं पैदा की जा रही हैं। उससे ईंट उद्योग तबाह हो जाएगा। वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से स्वेच्छा प्रमाण पत्र लेने की प्रक्रिया जटिल होने के साथ खर्चीली भी है, लेकिन यदि संचालकों द्वारा निर्वहन नहीं किया जाता है तो यह माननीय न्यायालय के आदेश का उल्लंघन हो जाएगा। ऐसी जटिल परिस्थिति में जब तक प्रदेश सरकार बाधाओं के समाधान का नहीं कर लेती है तब तक ईंट भट्टे बंद रखने का निर्णय लिया गया है। -क्षत्रपाल सिंह भदौरिया, अध्यक्ष भट्ठा एसोसिएशन फतेहपुर।

इंसेट
मिट्टी खनन से संबंधित दिंनाक 01/10/2012 को माननीय न्यायालय ने जो आदेश दिया है उस संबंध में अभी तक लिखित में शासन से कोई दिशा-निर्देश नहीं मिले हैं। शासन ने डायरेक्शन मांगा गया है। जो भी आदेश होगा उसका अनुपालन सुनिश्चित कराया जाएगा। भट्टा संचालकों को भी पूर्वाग्रह से बचना चाहिए।
-एनके पांडेय, जिला खनन अधिकारी
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