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चारपाई तक सीमित हैं कमथरी के बाढ़ पीड़ित

Farrukhabad

Updated Thu, 30 Aug 2012 12:00 PM IST
शमसाबाद/कायमगंज। गंगा में आई बाढ़ से टापू में तब्दील हुए कमथरी गांव में अभी तक प्रशासन की ओर से मदद पहुंचना तो दूर किसी अधिकारी के गांव जाकर ग्रामीणों का हाल लेने की जहमत तक न उठाने से ग्रामीणों मे रोष व्याप्त है। यहां तक की ग्राम प्रधान ने भी एक बार भी गांव जाकर अपने क्षेत्र की जनता क ी खैर खबर लेना तक मुनासिब नहीं समझा। जनता के सैलाब में डूबे होने और प्रधान के आलीशान कोठी में आराम फरमाने से बाढ़ पीड़ितों का आक्र ोश है।
बता दें कि ग्राम सभा गुटैटी दक्षिणी का मजरा कमथरी जिसमें 40 सालों से ग्रामीण रहा करते थे। वर्ष 2010 में आई बाढ़ में साफ हो गया था। उसके बाद ग्रामीणों ने पास ही में पुन: अपना आशियाना बनाया। गांव में करीब 28 परिवार आज भी रहते हैं। इस बार आई बाढ़ के पानी में चारों ओर से गांव घिर गया है। पानी में घिरे गांव से लोगों का निकलना मुश्किल हो गया है। लोगों के घरों में पानी भरा है। ग्रामीण चारपाइयों पर खाना बना रहे हैं। चारपाई पर ही कपड़े धोए जा रहे हैं। सारा सारा दिन महिलाएं और बच्चे चारपाई और तखत पर बैठ कर दिन बिताते हैं।
यहां के बाशिंदों ने बताया कि पिछले लंबे अर्से से बाढ़ के पानी में घिरे होने के कारण बीमारियां बढ गई हैं। उन्होंने बताया कि आज तक उनकी सुुध लेने शासन प्रशासन तो दूर लेखपाल तक गांव नहीं आया। उन्होंने कहा कि अधिकारी सड़क तक आते हैं उन्हें वहीं चाय नाश्ता कराकर उनके अधीनस्थ रिपोर्ट थमा कर चलता कर देतेे हैं। ग्रामीणों ने कहा कि अधिकारी ही नहीं उनके गांव के प्रधान यासीन खां जिन्होंने शमसाबाद में कोठी बना ली है वे भी अभी तक उनके वेदना देखने नहीं आए। ग्रामीणों ने बताया कि गांव के लिए प्रशासन द्वारा एक नाव उपलब्ध कराई गई है जिसके चले जाने पर घंटों उसके लौटने का इंतजार करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि गांव में फैली बीमारियों से लोग उल्टी सीधी दवा खाकर निपट रहे हैं। शासन प्रशासन का सहयोग न मिलने के कारण ग्रामीणों में रोष व्याप्त है।
आज जब अमर उजाला प्रतिनिधि नाव से उनका हाल लेने गांव पहुंचा तो ग्रामीणों को आस बंधी की उनकी दशा को प्रशासन तक पहुंचाने का माध्यम उनके बीच आ गया है। ग्रामीणों ने उसे घेर कर अपनी वेदना बताई और शासन-प्रशासन व प्रधान को खूब कोसा।

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