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किसानों पर जुल्म के खिलाफ महापंचायत का ऐलान

Farrukhabad

Updated Wed, 13 Jun 2012 12:00 PM IST
फर्रुखाबाद। कायमगंज के पुलगालिब क्षेत्र में पुलिस और किसानों के बीच सोमवार को हुए संघर्ष के बाद भारतीय किसान यूनियन के कई जिलों के किसान आक्रोशित हो उठे हैं। आगरा मंडल अध्यक्ष चौधरी धर्मवीर सिंह यादव के नेतृत्व में एकजुट हुए किसान नेताओं का कहना है कि यह शालीन और निहत्थे किसानों पर सरासर पुलिस व प्रशासन की गुंडई है। इसका हिसाब लेकर रहेंगे।
मंगलवार को रेलवे स्टेशन रोड स्थित एक होटल में प्रेसवार्ता करते हुए चौधरी धर्मवीर सिंह, भाकियू के कानपुर जिला अध्यक्ष भानु प्रताप सिंह, मैनपुरी के जिलाध्यक्ष तिलकसिंह राजपूत, कन्नौज के जिलाध्यक्ष शमीम सिद्दीकी आदि ने कहा कि मप्र. में किसानों की जमीन अधिगृहण और चौधरी राकेश टिकैत सहित अन्य लोगों की गिरफ्तारी के खिलाफ एसडीएम को शांतिपूर्ण तरीके से ज्ञापन देने के लिए किसान कायमगंज उप जिलाधिकारी अरुण कुमार के पास पहुंचे थे। लेकिन केवल धारा 144 कानून का उल्लंघन बताकर ही एसडीएम ने पुलिस बुलवा ली और किसानों पर बर्बर लाठीचार्ज करा दिया और भाकियू नेताओं के वाहन सीज किए।। कहा कि यह सरासर गुंडई है। बताया कि लाठीचार्ज के बाद से ही दो किसान साथी कायमगंज के पतरौली गांव निवासी राजकुमार और अरयारा गांव के निवासी श्याम सिंह राजपूत अभी तक घर नहीं पहुंचे हैं। अंदेशा है कि पुलिस कर्मियों ने उन्हें कहीं बंधक बना रखा है या फिर कोई अप्रिय बात हुई है। चौधरी धर्मवीर सिंह ने कहा कि पुलिस और प्रशासन का यह घिनौना कृत्य बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कहा कि किसानों का दर्ज मुकदमे वापस लेते हुए उनकी रिहाई की जाए, सीज हुई गाड़ियों को छोड़ा जाए नहीं तो हरिद्वार में होने वाले भाकियू के राष्ट्रीय पंचायत में रणनीति तय कर जल्द ही फर्रुखाबाद जिला मुख्यालय पर पूरे प्रदेश की महापंचायत आयोजित करा दी जाएगी। इसके अलावा एक प्रतिनिधि मंडल लखनऊ भी जाकर मुख्यमंत्री से मिलेगा और किसानों पर हुए जुल्म की दास्तां बताएगा।
मंडल अध्यक्ष ने कहा कि इससे पहले वे जिलाधिकारी डा.मुथुकुमार स्वामी बी. से मिलेंगे। उनके स्तर से ही भाकियू की सभी मांगें पूरी हो जाएंगी तो आंदोलन थम सकता है।
इधर, पुलिस व भाकियू कार्यकर्ताओं में हिंसक झड़प के बाद कोतवाली पुलिस ने पकड़े गये पांच किसानों का सीएचसी में चिकित्सीय परीक्षण कराकर जेल भेज दिया। वही अन्य भाकियू नेताओं की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने जाल बिछा दिया है। मध्य प्रदेश सरकार द्वारा किसानों के भूमि अधिग्रहण एवं नवाबगंज के गांव गनीपुर जोगपुर में गली में कब्जे के विवाद एवं अन्य जनसमस्याओं को लेकर भाकियू टिकैत गुट ने सोमवार को तहसील परिसर में धरना प्रदर्शन किया था जिसमे मांगो पर तुरत कार्यवाही न होने पर एसडीएम से असंतुष्ट होकर उन्होने नगर के पुलगालिब पर जाम लगा दिया था पुलिस द्वारा जाम खोलने के दवाब पर भाकियू कार्यकर्ता आक्रोषित हो गये थे जिसमें पथराव व लाठी चार्ज से तीन भाकियू कार्यकर्ता एवं दरोगा चुटहिल व एक सिपाही घायल हुआ था। पुलिस ने मौके पर भाकियू कार्यकर्ता देवेन्द्र शाक्य, लखमीचन्द्र, अनिल, संजीव, देशराज को हिरासत में ले लिया गया था। पुलिस ने बीती देर 52 नामजद सहित 60-70 अज्ञात लोगो के खिलाफ मुकद्मा दर्ज कर लिया था जिसमे पुलिस ने हिरासत में लिये गये भाकियू कार्यकर्ता का मंगलवार को सीएचसी में चिकित्सीय परीक्षण कराया और उनका चालान कर जेल भेज दिया। इधर पुलिस ने भाकियू के बरिष्ठ पदाधिकारियों की गिरफ्तारी के लिए जाल बिछाना शुरू कर दिया है। समाचार लिखे जाने तक अन्य किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई थी।
उधर, भाकियू द्वारा तहसील परिसर में प्रदर्शन के दौरान विवाद के मामले में नवाबगंज क्षेत्र के गनीपुर जोगपुर गांव में रास्ते पर कब्जे के विवाद के मामले में तहसील प्रशासन द्वारा की गई जांच में वादी द्वारा दलित के घर की जमीन से रास्ता बनाने की बात कही गई है। एसडीएम ने कहा है कि जो न्यायसंगत नहीं है। सोमवार को भाकियू नेताआें के साथ तहसील पहुंचकर प्रदर्शन में शामिल रहे गनीपुर जोगपुर गांव निवासी राजेश के मामले में एसडीएम अरूण कुमार के निर्देश पर कानूनगो व क्षेत्रीय लेखपाल ने जांच की और रिपोर्ट तहसीलदार रामजी को सौपी। जिसमें पाया गया कि गाटा संख्या 766 के लिए पहले से ही खडंजे से दो रास्ते जुडे हुए हैं। जिसमें से एक रास्ते को शिकायतकर्ता द्वारा स्वयं बंद कर दिया गया है। जांच में ग्रामीणों द्वारा बताया गया कि दलित रामवीर व नन्हें का घर पूर्व में गिर गया था। जिससे कि ग्रामीणों ने निकलना शुरू कर दिया था। जब रामवीर द्वारा घर का निर्माण शुरू किया गया तो राजेश ने भाकियू का सहारा लेकर रामवीर के घर से एक नया रास्ता बनाए जाने की मांग की। एसडीएम अरूण कुमार ने बताया कि तहसीलदार की जांच के बाद दो रास्ते होने की सूरत में किसी के घर से नया रास्ता बनाया जाना न्यायसंगत नहीं है।
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