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महानगर, विकास प्राधिकरण का मुद्दा खास है इस बार

Farrukhabad

Updated Wed, 16 May 2012 12:00 PM IST
फर्रुखाबाद। आगामी स्थानीय निकाय चुनाव से पूर्व फर्रुखाबाद को महानगर पालिका बनाने एवं फर्रुखाबाद विकास प्राधिकरण के गठन की जरुरत जनमानस के भीतर अहम मुद्दा है। लोगों का मानना है कि यदि फर्रुखाबाद विकास प्राधिकरण का गठन हो गया तो फर्रुखाबाद-फतेहगढ़ युग्म नगर का समुचित विकास तेजी के साथ हो सकेगा। वहीं नगर पालिका से महानगरपालिका अर्थात नगर निगम बनाने की मांग आगामी निकाय चुनाव में वोट मांगने वालों के समक्ष खास तौर से आएगी।
वर्तमान समय में 37 वार्डों वाली नगर पालिका परिषद फर्रुखाबाद, फतेहगढ़ में लगभग तीन लाख आबादी निवास करती है और लगभग दो लाख मतदाता चेयरमैन का चयन करते हैं। इतनी बड़ी संख्या में मतदाता होने के बाद भी इसे नगर निगम का दर्जा नहीं दिया गया है। पिछली बार वर्ष 2006 के पूर्व हुए परिसीमन के समय भी लोगों का अनुमान था कि फर्रुखाबाद को नगर निगम का दर्जा मिल जाएगा। परिसीमन में प्रदेश में केवल झांसी को ही नगर निगम का दर्जा मिल सका किंतु फर्रुखाबाद वंचित रह गया। लोगों का कहना है कि जनसंख्या, क्षेत्रफल एवं मतदाताओं की संख्या के आधार पर फर्रुखाबाद को नगर निगम का दर्जा मिलना ही चाहिए। भाजपा के सह मीडिया प्रभारी दिलीप भारद्वाज का कहना है कि फर्रुखाबाद को नगर निगम का दर्जा मिलने पर न केवल मिलने वाले बजट में बढ़ोत्तरी होगी, बल्कि सुविधाएं भी बढ़ेंगी। वहीं बजरिया हरलाल में रहने वाले कुलदीप दलेला का कहना है कि अच्छे विकास के लिए फर्रुखाबाद को नगर निगम बनाना जरूरी है। व्यापार मंडल के प्रांतीय मंत्री अरूण प्रकाश तिवारी ददुआ, बीबीगंज के जयप्रकाश शाक्य, गोविंद अवस्थी, विद्यार्थी परिषद के विभाग संयोजक अभिषेक त्रिवेदी का भी कहना है कि फर्रुखाबाद को नगर निगम का दर्जा मिलना चाहिए। फर्रुखाबाद नगर की जनता में फर्रुखाबाद विकास प्राधिकरण के गठन की मांग उठने लगी है।
लोगों का कहना है कि प्रदेश में अनेकों जिला मुख्यालय ऐसे हैं, जहां विकास प्राधिकरण का गठन हो चुका है। इनमें से कई ऐसे हैं, जिनके मुख्यालय क्षेत्रफल, जनसंख्या एवं मतदाता संख्या में फर्रुखाबाद से कहीं पीछे हैं। वहां के नेताओं की पैरवी के कारण विकास प्राधिकरण का गठन हो गया किंतु फर्रुखाबाद के नेताओं की अनदेखी के चलते विकास प्राधिकरण का गठन नहीं हो सका। विदित हो कि नगर पालिका परिषद फर्रुखाबाद में लगातार दस वर्षों तक विजय सिंह की पत्नी दमयंती सिंह चेयरमैन रहीं। उनके दूसरे कार्यकाल में विजय सिंह विधायक रहे और सत्तापक्ष के बेहद करीब रहे किंतु विधायक विजय सिंह ने कभी भी फर्रुखाबाद विकास प्राधिकरण के गठन के लिए प्रयत्न नहीं किया।
इसके बाद वर्ष 2006 में हुए नगर पालिका चुनाव में मनोज अग्रवाल चेयरमैन बने और कुछ समय बाद ही सदर क्षेत्र से विधायक अंटू मिश्रा बसपा सरकार में ताकतवर मंत्री रहे। मनोज अग्रवाल भी फर्रुखाबाद से विधान परिषद सदस्य चुने गए। प्रदेश में बसपा सरकार होने के बाद भी मनोज अग्रवाल ने भी कभी भी फर्रुखाबाद विकास प्राधिकरण गठन के लिए प्रयत्न नहीं किया। इन नेताओं की कमी के कारण ही अभी तक फर्रुखाबाद विकास प्राधिकरण का गठन संभव नहीं हो सका है।
कई लोगों का मानना है कि विकास प्राधिकरण बन जाने से विकास में तेजी आएगी। सुविधाओं में वृद्धि होगी। वहीं चेयरमैन की बजट खर्च करने की मनमानी पर रोक लग जाएगी किंतु हित जनता का ही होना है। अपनी बेबाक राय प्रकट करते हुए सदर तहसील के अधिवक्ता अतुल मिश्रा कहते हैं कि यदि फर्रुखाबाद का समुचित विकास कराना है तो फर्रुखाबाद विकास प्राधिकरण का गठन प्राथमिकता के आधार पर किया जाना चाहिए। लंबे समय तक छात्र राजनीति में विद्यार्थी परिषद की जिले में अगुवाई करने वाले ज्ञानेश गौड़ का स्पष्ट मानना है कि नगर फर्रुखाबाद को यदि विकास के पटल पर देखना है तो फर्रुखाबाद विकास प्राधिकरण का गठन करना आवश्यक है। उनका कहना है कि विकास प्राधिकरण के गठन के लिए होने वाले किसी भी आंदोलन में बढ़चढ़कर हिस्सा लेने को तैयार हैं। सभासद चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे अमर सिंह का कहना है कि वह तो वार्ड के विकास के लिए चुनाव लड़ रहे हैं। ऐसे में फर्रुखाबाद विकास प्राधिकरण के गठन पर उन्हें भला क्या आपत्ति हो सकती है।
समाज के विभिन्न वर्गों का मानना है कि उन्हें राजनीति नहीं विकास से मतलब है। यदि विकास प्राधिकरण से विकास को गति मिल सकती है तो इसका गठन अवश्य होना चाहिए। फर्रुखाबाद जनता की यह आवाज चुने हुए जनप्रतिनिधियों के कान में पहुंचकर क्या असर दिखाती है। यह तो आने वाला समय ही बताएगा। लेकिन जनता की भावना को शासन और प्रशासन ज्यादा समय तक अनदेखी नहीं कर पाएगा। यह अवसर नेताओं की परीक्षा की घड़ी भी है कि वे जनता की आवाज पर कोई कदम उठाते हैं या जनता की बात को हर बात की तरह अनसुना कर देते हैं।
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