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चीन को उलटे पांव लौटने को किया मजबूर

Farrukhabad

Updated Wed, 12 Dec 2012 05:30 AM IST
फर्रुखाबाद। फर्रुखाबादी वस्त्र छपाई कारोबार विदेशों में तेजी से तरक्की कर रहा है। पांच साल में यह कारोबार 100 से 500 करोड़ सालाना पर पहुंच गया है। यहां के हैंडमेड छापे के परदे, हैंड पेंटेड बेड कवर कम रजाई, स्टोल, स्कार्फ, शाल व साड़ियां 15 देशाें को निर्यात होती हैं। जिले के कारोबारियों ने अपने बूते चीन के बाजार को सिमटने पर मजबूर किया है। टेक्सटाइल पार्क का मसौदा परवान चढ़ गया तो अगले पांच साल में निर्यात 10 गुना यानी 5000 करोड़ सालाना का हो सकता है।
फर्रुखाबाद से सन् 1912 में परदे, साड़ी व बेडशीट का निर्यात अफगानिस्तान, चीन व नेपाल के साथ शुरू हुआ। वर्ष 1980 के बाद निर्यात कारोबार का विस्तार हुआ और आज करीब 15 देशों में डंका बजने लगा। हालांकि वर्ष 1990 से 2007 तक निर्यात का कारोबार 100 करोड़ सालाना पर ठहर गया था। 1990 में रंगदारी व कारोबार की बढ़त में समस्याओं से कई कंपनियां देश केे दूसरे हिस्साें मेें पलायन कर गईं। इससे कारोबार मंदा होता गया। इसका फायदा उठाते हुए कारोबार पर चीन का बाजार हावी होने लगा। इधर, कुछ नए कारोबारियाें ने मेहनत की। क्वालिटी को चमकाया तो विदेशों से आर्डर बढ़ने लगे। आज कारोबारियों की डाटाशीट बताती है कि सिर्फ स्कार्फ व स्टोल का सालाना निर्यात करीब 400 करोड़ का हो गया है। रजाई का विदेशी कारोबार 40 से 50 करोड़ का है। साड़ियां, शाल, इंब्रायडरी ड्रेस मैटेरियल की हिस्सेदारी भी करीब 50 करोड़ की है। इन आइटमाें पर हाथ से छपाई होती है। यह आइटम जर्मनी, बेल्जियम, बिट्रेन, अमेरिका, इटली, पाकिस्तान, ईरान, ईराक, दुबई, पाकिस्तान, अफ्रीका, इजरायल, हंगरी, टर्की, रूस देशों को निर्यात होते हैं। शहर में 12 इकाइयां ऐसी हैं जो सीधे निर्यात करती हैं। हालांकि आइटम बनाने वाली इकाइयों की तादाद 225 है। हालत ये है कि सीमित संसाधनों के चलते मांग पूरी नहीं हो पा रही है। भारतीय बाजार के तो आर्डर पूरे ही नहीं हो पाते। यही वजह है कि घरेलू बाजार करीब 100 करोड़ के आसपास ही सिमटा हुआ है। इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन फर्रुखाबाद चैप्टर चेयरमैन रोहित गोयल का कहना है कि कारोबारियोें की मेहनत, हौसलों और पुरानी साख की बदौलत यह मुकाम मिला है। इस साल निर्यात कारोबार करीब 500 करोड़ का आंकड़ा पार कर गया है। कारोबार का यही क्षेत्र ऐसा है जहां हमने विदेशों में चीन को मात दी और उसे उन देशों से काम समेटना पड़ा। उन्होंने बताया मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को भी डाटाशीट उपलब्ध कराई गई है। टेक्सटाइल पार्क शुरू हो जाए तो निर्यात 10 गुना बढ़ सकता है। घरेलू मांग आसानी से पूरी होने लगेगी। वस्त्र छपाई उद्योग समिति के अध्यक्ष सुरेंद्र सफ्फड़ कहते हैं कि बुनियादी सहूलियताें के साथ तकनीकी सुविधाएं मिले तो कारोबार में बरकत को नया मुकाम मिल जाएगा।
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