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145 कैदियाें की दया याचिकाएं लंबित

Farrukhabad

Updated Mon, 10 Dec 2012 05:30 AM IST
फर्रुखाबाद। सेंट्रल जेल में आजीवन सजा काटने वाले कैदियाें की दया याचिकाएं दो साल से शासन में लंबित हैं। सजायाफ्ता 145 कैदियाें की दया याचिकाओं पर अभी तक कोई भी फैसला नहीं हो पाया है। इनमें से 60 फीसदी बीमार रहते हैं। अब 15 से 20 फीसदी कैदी चलने फिरने में भी लाचारी महसूस कर रहे हैं।
सेंट्रल जेल में 2450 कैदी सजा काट रहे हैं। इनमें से 400 कैदी 60 साल के ऊपर पहुंच गए हैं। कुछ कैदी तो 83 से 88 साल तक के हैं। आधे से ज्यादा अक्सर बीमार रहते हैं। यह आंख, सांस, कमजोरी, चलने-फिरने में असमर्थता, दमा, गठिया, पेट रोग, ह्दय रोग के रोगी हैं। बीमार कैदियाें पर जेल प्रशासन को औसतन 3 से 5 लाख रुपए मासिक खर्च करना पड़ता है। इनमें से 145 कैदियाें ने जेल प्रशासन को रिहाई के लिए दया याचिकाएं दी हैं। इन्हें आईजी जेल को भेज दिया गया है। वहां से शासन के पास निर्णय के लिए भेजी गई हैं। वहां से अभी कोई निर्णय नहीं आया है।
जेल मैनुअल के हिसाब से आजीवन सजा पाए कैदियों की 14 साल की सजा पूरी हो जाने पर वह रिहाई की पैरवी कर सकते हैं। सेंट्रल जेल में आजीवन सजा पाने वाले ऐसे कैदी 200 के करीब हैं जो 14 साल की सजा काट चुके हैं। डिप्टी जेलर यूपी सिंह का कहना है कि अभी तक दया याचिकाओं के बारे में शासन से कोई निर्देश नहीं मिले हैं।

केस 1
कानपुर देहात के थाना गजनेर के बारा गांव के मूल निवासी भालू सिंह की उम्र 81 साल है। इन्हें आजीवन कारावास की सजा मिली है। इनके लिए चलना फिरना मुश्किल है। इन्होंने रिहाई की दया याचिका दी है जो लंबित है।

केस 2
जिले के कंपिल थाने के बहवलपुर के मूल निवासी देव सिंह की उम्र 77 साल है। इनकी हालत भी खराब है। शरीर शिथिल है। इनकी भी दया याचिका लंबित है।

केस 3
इटावा जिले के सैफई थाने के गांव उदयपुर के मूल निवासी भूरे की उम्र 83 साल है। इन्हें भी आजीवन करावास की सजा मिली है। यह सेंट्रल जेल में सजा काट रहे हैं। इनकी शारीरिक हालत सही नहीं है। अक्सर बीमार रहते हैं। इनकी भी दया याचिका लंबित है।

वर्ष 2000 से नहीं हुई रिहाई
सन 2000 में शासनादेश के तहत 182 कैदी छोड़े गए थे। बाद में इस शासनादेश को निरस्त कर दिया गया था। इसके बाद रिहा होने वालोें के पकड़े जाने की कार्रवाई शुरू हुई। इनमें से 170 को पकड़ कर दोबारा जेल भेज दिया गया, जबकि बाकी को तलाशा ही नहीं जा सका। इसके बाद से अब तक दया याचिका पर किसी भी कैदी को नहीं छोड़ा गया।

अब रिहाइशी जिलों में होगी रिहाई की सुनवाई
फर्रुखाबाद। कैदियों की समय पूर्व रिहाई के लिए अब तरीका बदल दिया गया है। सेंट्रल जेल में आजीवन सजा काटने वाले कैदियाें को उनके जिले की जेल में पेश किया जाएगा। यहां कमेटी उनक ी रिहाई की फरियाद सुनेगी। इसके बाद वह शासन को संस्तुति भेजेगी। इसके बाद रिहाई का फैसला होगा।
जेल मैनुअल के मुताबिक सिद्ध दोष बंदियाें की फार्म ए नामिनल रोल एवं इनफरमिटी रोल के आधार पर समय पूर्व रिहाई का नियम है। आजीवन सजा पाने वाले कैदी 14 साल की सजा पूरी होने के बाद शासन से समय पूर्व रिहाई की फरियाद कर सकते हैं। फैसला शासन करता है। अब तरीका बदल गया है।
करागार प्रशासन एवं सुधार सेवाएं के अपर निदेशक एमएल प्रकाश के मुताबिक सेंट्रल जेल कैदियों के मूल निवास वाले जिले की जेल में उनकी सूची भेजेगी। वहां तय तारीख पर कै दी को प्रस्तुत करना होगा। कैदी के निवास वाले जिले के डीएम, एसपी, जेल अधीक्षक व प्रोबेशन अधिकारी कैदी से बातचीत करेंगे। इसके बाद रिहाई की रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। सेंट्रल जेल में हरदोई, कानपुर देहात, बरेली, बदायूं, मैनपुरी, एटा, उरई, उन्नाव, इटावा, फिरोजाबाद आदि जिलों के कैदी सजा काट रहे हैं। डिप्टी जेलर यूपी सिंह ने बताया कि आजीवन सजा पाने वाले ऐसे कैदी 200 के करीब हैं जो 14 साल की सजा काट चुके हैं। इनकी सूची 15 दिसंबर तक मूल निवास वाले जिलाें की जेलों में भेज दी जाएगी। जनवरी के दूसरे सप्ताह में यह कमेटी के सामने पेश होंगे।
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