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जिंदा होने का सबूत देने में दांव पर लगी जिंदगी

Farrukhabad

Updated Fri, 23 Nov 2012 12:00 PM IST
फर्रुखाबाद। हम अभी जिंदा हैं। हमारी पेंशन जारी रखी जाए। इसका सबूत देने के लिए सरकारी नौकरियों से सेवानिवृत्त होने वालों को जिंदगी दांव पर लगानी पड़ रही हैं। चलने में तकलीफ होने के बाद भी बुर्जूगों को ट्रेजरी कार्यालय जिंदा होने का प्रमाण पत्र देने को कई दिनों तक चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। ऐसा ही माहौल गुरुवार को कोषागार कार्यालय में दिखाई दिया। कही पति की पेंशन बरकरार रखने को वृद्ध महिलाएं कार्यालय प्रांगण में लेटी रहीं तो कोई महिला बीमार पति को टेंपो से लेकर आई। वृद्ध महिलाएं और पुरुष कार्यालय कर्मचारियों से मदद मांगते दिखाई दिए।
बीमार पति को टेंपो से लेकर आई
फर्रुखाबाद। मेरापुर निवासी सेना से सेनानिवृत्त हुए शीशराम 80 साल की उम्र पार कर चुके हैं। वह बीमारी हैं और चलने में असमर्थ हैं। पत्नी चंदावती टेंपो से पति को लेकर कोषागार कार्यालय में जीवित होने का प्रमाण पत्र देनी आईं ताकि पति की पेंशन बनी रहे। पति को टेंपों में छोड़ कर पत्नी बाबू के पास गई। वहां पर बाबू ने कार्य में व्यस्त बताकर टरका दिया। वह काफी देर तक इंतजार करती रहीं, पर जीवित होने का प्रमाणपत्र नहीं दे पाई। चंदावती ने बताया कि वह लगातार चार बार आ चुकी हैं। अभी तक जीवित होने का प्रमाणपत्र नहीं भर सके।

कोई नहीं सुन रहा हमारी
फर्रुखाबाद। कोषागार कार्यालय में जमीन पर लेटी 85 साल की बेवा रामदेवी हर किसी से सहायता मांग रही थीं। उनके मुंह से बस यही निकल रहा था कि उसकी कोई नहीं सुन रहा हैं। चार दिन से चक्कर काट रही हूं। रामदेवी ने बताया कि अपने पति की पेंशन चालू रखवाने को जिंदा होने का प्रमाण पत्र देने पुत्र के साथ आई हूं। तीन दिन से लगातार चक्कर काट रही हूं। अभी तक प्रमाणपत्र संबंधी कार्रवाई पूरी नहीं हो सकी। बाबू कोई न कोई कमी बताकर वापस लौटा देते हैं।

का कहै मजबूर हूं
मोहम्मदाबाद के गांव करनपुर निवासी आर्मी मेडिकल कोर से सेवानिवृत्त हुए गंगादीन अपने पुत्र के साथ लाठी के सहारे कोषागार कार्यालय में जीवित होने का प्रमाण पत्र देने आए। वह कार्यालय में काफी देर तक बैठे रहे। पुत्र प्रमाणपत्र भरने की प्रक्रिया को पूरा करने चले गए। वह अकेले अपने बुढ़ापे को कोसते दिखाई दिए। उन्होंने बताया कि जब जवानी थी। तब कुछ देर में कई लोगों की सहायता कर देते थे। अब कार्यालय में जवान लोग बूढ़े लोगों की मदद नहीं करते । वह लगातार पांच दिन से कार्यालय के चक्कर पुत्र के साथ काट रहे हैं।

कैसे होगी पुत्री की शादी
फर्रुखाबाद। सिपाही रामदास की बेवा गंगादेवी एक सप्ताह से अपने पति की पेंशन पाने को भटक रही हैं। 24 नवंबर को पुत्री की शादी हैं। अगर पेंशन नहीं मिली तो उसकी पुत्री की शादी कैसे होगी। यह पीड़ा लिए बेवा कर्मचारियों के पास दौड़ती रही। उसकी किसी ने नहीं सुनी। संबंधित बाबू ने बैंक में धन पति के खाते में पहुंच जाने के बाद वापस न आने की बात कहकर उसे लौटा दिया। वह कार्यालय परिसर में बेटी की शादी की चिंता लिए रोती रही। उसने अपनी पीड़ा वरिष्ठ कोषाधिकारी को बताई। तब उसकी समस्या का समाधान हुआ।

न सुधरे तो कार्यालय परिसर मे अनशन
फर्रुखाबाद। पूर्व सैनिकों ने वरिष्ठ कोषाधिकारी को कार्यालय में होने वाले परेशानियों से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि कार्यालय कर्मचारियों ने सुधार नहीं किया तो वह प्रांगण में अनशन करेंगे। उन्होंने कहा रक्षा फैमली पेंशन अदायगी पाने के लिए जीवित होने का प्रमाण पत्र देना होता हैं। कार्यालय में जीवित होने का प्रमाण पत्र देने के लिए बुर्जूगों को जीवन दांव पर लगाना पड़ रहा हैं। इस दौरान समाज सेवी लक्ष्मण सिंह, आरएन दीक्षित, नरेंद्र शाक्य, एसके यादव, सीपी सिंह, डीएस राठौर समेत आदि शामिल रहे।

डाक में पड़ी रही बैंक की चेक
फर्रुखाबाद। सिपाही रामदास की बेवा गंगादेवी के पति के खाते में अधिक धन पहुंच जाने के बाद बैंक से धन वापसी की चेक कोषागार कार्यालय में भेजी गई। यह चेक 10 तारीख को कार्यालय में आ गई। कर्मचारियों की लापरवाही से डाक में पड़ी रही। पूर्व सैनिकों के हंगामे के बाद कर्मचारी को वरिष्ठ कोषाधिकारी ने बुलाया और डाक से दिखवाई। तब वह चेक मिली। कार्यालय कर्मचारी की लापरवाही से बेवा महिला की फैमिली पेंशन शुरू नहीं हो सकी।

वरिष्ठ कोषाधिकारी श्रीनिवास शुक्ला ने बताया कि शिकायत मिली हैं। चेक डाक में रखी हुई थी। कर्मचारी की लापरवाही से चेक पटल बाबू के पास नहीं पहुंच सकी। कर्मचारी को चेतावनी दे दी गई हैं। महिला की समस्या का जल्द समाधान कर दिया जाएगा। कर्मचारियों को हिदायत दे दी गई हैं। जीवित होने का प्रमाण पत्र कर्मचारी बैंक से भी भिजवा सकता हैं।
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