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हम तो साल में पांच बार मनाते दीवाली

Farrukhabad

Updated Wed, 07 Nov 2012 12:00 PM IST
फर्रुखाबाद। वैसे तो दीवाली साल में एक बार आती है लेकिन बौद्ध अनुयायी साल में पांच बार दीवाली मनाते हैं। कार्तिक अमावस्या की दीवाली उनकी पांचवीं दीवाली होती है। इसका खास महत्व है। इस रात बौद्ध अनुयायियों के घर, बुद्ध विहार व बौद्ध स्तूप दीपों से सजाए जाते हैं। पंचशील का संकल्प भी दोहराया जाता है।
जिले में करीब 80 हजार बौद्ध अनुयायी हैं। ये फिजूलखर्ची व शोर से बचने को आतिशबाजी से परहेज करते हैं। बौद्ध दर्शन के व्याख्याता व डिग्री कालेज प्राचार्य डॉ. शैतान सिंह शाक्य बताते हैं कि बौद्ध अनुयायियों में अमावस्या की रात दीपावली मनाने की परंपरा बहुत पुरानी है। बौद्ध रीति रिवाजों से पूजा वंदना के बाद उजियारा किया जाता है। वहीं तथागत बुद्ध विहार अंगूरी बाग के भंते नागसेन का बताते हैं कि अशोक धम्म विजय दशमी को भी दीपावली मनाई जाती है। इस दिन सम्राट अशोक ने अस्त्र-शस्त्र त्यागकर बौद्ध धर्म स्वीकार किया था। वहीं दूसरी दीवाली बुद्ध पूर्णिमा को मनाई जाती है। इस दिन तथागत के जन्म व ज्ञान प्राप्त करने की स्मृति है। तीसरी दीवाली शरद पूर्णिमा को मनाते हैं। इस दिन बुद्ध के स्वर्ग से सीढ़ी के जरिए संकिसा में उतरने की मान्यता है। चौथी दीवाली बैसाख पूर्णिमा को मनाते हैं। इस दिन बुद्ध ने पहले पांच शिष्यों को ज्ञान दिया था।

कार्तिक अमावस्या की खासियत
मान्यता 1
ढाई हजार साल पहले की घटना बताई जाती है। कौशल नरेश प्रसेनजित ने गौतम बुद्ध को उपदेश देने के लिए राज्य में आमंत्रित किया था। वापसी मेें रात हो गई। प्रसेनजित ने रथ भेजने का प्रस्ताव दिया। बुद्ध ने मना कर दिया। अंधेरे में पैदल ही चेतवन विहार के लिए चल दिए। यह अमावस की रात थी। देवताओं ने उनके रास्ते में दीप जलाए थे। इस याद में अनुयायी दीपावली मनाते हैं।

मान्यता 2
यह ईसा से 263 साल पहले की घटना मानी जाती है। सम्राट अशोक ने देश में 80 हजार बौद्ध विहार व 84 हजार बौद्ध स्तूप बनवाए थे। इनका अनावरण कार्तिक अमावस्या को किया गया था। सभी जगह धार्मिक आयोजन हुए थे। दीप जलाए गए थे। इस स्मृति में भी यह दीप पर्व मनाया जाता है।

खास-खास
बुद्ध प्रतिमा के सामने पूरा कुनबा इकट्ठा होता है। वंदना के बाद धम्म पूजा, संघ पूजा व बोधि पूजा होती है।
बुद्धं शरणं गच्छामि, धम्मं शरणं गच्छामि व संघं शरणं गच्छामि का पाठ होता है।
पंचशील के अनुकरण का संकल्प दोहराया जाता है। इसमें चोरी, नशा, व्यभिचार, हिंसा, झूठ से बचने का मंत्र शामिल है।
सभी का मंगल हो, कल्याण हो व सभी देवता सभी पर कृपा करें की सामूहिक प्रार्थना होती है।
घरों, बुद्ध विहारों, स्तूपों में दीप व मोमबत्ती जलाकर रोशनी की जाती है।
फर्रुखाबाद के संकिसा में गौतम बुद्ध के त्रेएतिस से सोने की सीढ़ी के जरिए उतरने की मान्यता है। इससे उल्लास चरम पर रहता है।
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