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दावा बेमानीः कहीं खाद नहीं तो कहीं मनमानी

Farrukhabad

Updated Wed, 10 Oct 2012 12:00 PM IST
फर्रुखाबाद। साधन सहकारी समिति के जरिए किसानों को खाद मुहैया कराने का दावा हवाई साबित हो रहा है। खाद के लिए किसान समितियों के चक्कर काट रहे हैं। आम किसानों की अनदेखी की जा रही है वहीं रसूखदार किसान समितियों के कर्मचारियों की मिलीभगत से थोक के भाव खाद उठा रहे हैं। तमाम किसान समिति में खाद आते ही रातों रात उसे उठा ले जाते हैं, जबकि समिति के अन्य सदस्यों को टरका दिया जाता है। कई स्थानों पर सहकारी समितियां बंद हैं अथवा कर्मचारी जानबूझ पर उन पर ताले लगा कर किसानों को परेशान कर रहे हैं। अमर उजाला ने विभिन्न इलाके की सहकारी समितियों की पड़ताल की। इस दौरान जो नतीजे सामने आए, वे चौकाने वाले थे। पेश है साधन सहकारी समितियों की स्थिति को बयां करती लाइव रिपोर्ट:
स्थान- साधन सहकारी समिति अमृतपुर
समय- सुबह करीब 10 बजे
स्थिति- समिति पर तमाम किसान मौजूद मिले। सभी किसान चेक के जरिए खाद की खरीदारी कर रहे थे। काश्तकार राधेश्याम अवस्थी, मुन्नूलाल और राजेश शुक्ला ने बताया कि उन्हें 905 रुपए प्रति बोरी के हिसाब से खाद मिली है। समिति के सचिव बालमुकुंद पाठक की मानें तो यहां 3100 बोरी डीएपी और एनपीके की आ चुकी हैं। 2600 बोरी खाद बंट भी चुकी है।

स्थान- साधन सहकारी समिति कुतलूपुर
समय- 12.30 बजे
स्थिति- समिति में सन्नाटा। समिति पर मौजूद एकाउंटेंट वीरेंद्र मौजूद मिले। सन्नाटे के बावत पूछा तो वीरेंद्र ने बताया कि 1100 बोरी खाद आई है। सत्यापन न होने से वतरण शुरू नहीं किया गया है। कुछ किसान सुबह आए थे। उन्हें बता दिया गया कि सत्यापन के बाद खाद का वितरण होगा। वे चले गए। एक-दो दिन में वितरण शुरू होगा।


स्थान- साधन सहकारी समिति मोहम्मदाबाद
समय- 11.30 बजे
स्थिति- किसान आते हैं और खाद के बारे में पूछताछ कर खाली हाथ लौट जाते हैं। किसानों में खाद पाने की जल्दी है, लेकिन समिति ने हाथ खड़े कर दिए हैं। समिति के सचिव वेदप्रकाश वर्मा कागजों में निबटाने में व्यस्त हैं। यहां डीएपी और एनपीके की डिमांड है। ये दोनों खाद समिति से गायब हैं। सचिव दो-तीन दिनों में खाद आने की दुहाई देते हैं। खाद न आने के पीछे मूल कारण किसानों से वसूली न होना बताते हैं।

स्थान- साधन सहकारी समिति नाहरैया चौंसेपुर
समय- 12 बजे
स्थिति- सन्नाटा। करीब पांच मिनट बाद कुछ किसान आते हैं। खाद के बारे में पूछकर लौट जाते हैँ। सचिव अवधेश सिंह किसानों को बताते हैं कि पैसे जमा हो गए हैं। दो दिनों में खाद आ जाएगी। इसी दौरान कुछ किसान सचिव के मोबाइल पर भी फोन करते हैं और खाद के बारे में जानकारी लेते हैं। सचिव इन किसानों को भी दो दिन बाद आने की बात बताते हैं।



स्थान -साधन सहकारी समिति दक्षिणी कायमगंज
समय- दोपहर 12 बजे
स्थिति- किसान आते हैं और खाद लेकर रवाना हो जाते हैं। किसानों का कहना है कि इस बार भी उनके मन में खाद को लेकर डर था। यही वजह है कि जुताई से ज्यादा ध्यान खाद पर लगा रहा, लेकिन इस बार आसानी से खाद उपलब्ध है। वे बताते हैं कि पहले तो उन्हें इफ्को सेवा केंद्र के चक्कर काटने पड़तेे थे या फिर देर रात से आकर लाइन लगानी पड़ती थी। इस बार स्थिति सही है। समिति के सचिव श्याम सिंह बताते हैं कि खाद की कमी नहीं है। समिति में एनपीके की 957 तथा डीएपी की 1112 बोरी स्टाक में हैं और खाद आने वाली है।

स्थान- साधन सहकारी समिति उत्तरी कायमगंज
समय- 12.30 बजे
स्थिति- यहां किसानों की संख्या काफी कम है। दो किसान आते हैं खाद लेकर चले जाते हैं। सचिव बचान सिंह बताते हैं कि किसानों की ज्यादा भीड़ सुबह होती है। सभी को समय से खाद मिल रही है, इसलिए दोपहर में भीड़ कम है। यहां डीएपी की 815 तथा यूरिया की 166 बोरी का स्टाक है।


स्थान- साधन सहकारी समिति कमालगंज
समय- 11 बजे
स्थिति- भीड़ लगी है। किसान आते हैं और खाद लेकर चले जाते हैं। किसानों का कहना है कि इसी तरह उन्हें समिति से खाद मिलती रहे तो पैदावार प्रभावित नहीं होगी। किसान रामशरन वर्मा बताते हैं कि इस बार की स्थिति अच्छी है। पहले तो लाइन लगानी पड़ती थी। सचिव कैलाश कटियार किसानों की बातें सुनने में व्यस्त हैं। वह कहते हैं कि स्टाक के बारे में तो शाम को जानकारी दे पाएंगे। सुबह से खाद बांटने में व्यस्त हैं।



बंद मिलीं समितियां
अमृतपुर। तहसील अमृतपुर में साधन सहकारी समिति हरसिंगपुर गहलवार, अमृतपुर, हुसैनपुर हड़ाई, कुबेरपुर, अलीगढ़, गांधी, बदनपुर, खंडौली, महमदगंज, सलेमपुर समेत 13 समितियां हैं। इसमें मंगलवार सुबह 10.30 बजे हुसैनपुर हड़ाई की समिति बंद मिली। कुछ में खाद का वितरण हो रहा था तो कुछ स्थानों पर खाद तो आ गई, लेकिन कागजी कार्रवाई पूरी न होने से वितरण शुरू नहीं किया गया है।

ज्यादा खाद कम कर देती पैदावार
फर्रुखाबाद। जिले के 90 फीसदी किसान खाद के जोर से ज्यादा उत्पादन लेने की होड़ में रहते हैं। इसके लिए वह खाद पाने को कोई भी जुगत लगाने से पीछे नहीं रहते हैं। कृ षि विशेषज्ञों की मानी जाए तो जरूरत से अधिक खाद उत्पादन कम कर देती है। खेत की मिट्टी पर भी खतरनाक असर दिखाई देता है। कृषि विज्ञान केंद्र के डा. जगदीश का कहना है कि मात्रा से अधिक खाद डालने से पौधों की तो खूब वृद्धि होती है लेकिन उत्पादन उतना नहीं होता है। 10 सालों में कैल्शियम व कार्बोनेट का प्रतिशत खेतों में बढ़ा है। इससे जमीन के बंजर होने के लक्षण बनने लगे हैं।

यह हैं खाद के मानक
खेत का रकबा- 1 एकड़
डीएपी- 100 किलो ग्राम
यूरिया - 110 किलो ग्राम
जिंक - 10 किलो ग्राम
बोरेक्स- 3 किलो ग्राम
सल्फर- 10 किलो ग्राम

ब्लैक की शिकायत पर बख्शेंगे नहीं : नारद
अमर उजाला ब्यूरो
फर्रुखाबाद। जिला सहायक निबंधक सहकारी समितियां नारद यादव से अमर उजाला ने खाद की समस्याओं पर बात की। उनका कहना है कि ब्लैक की शिकायत पर किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।
सवाल-वर्तमान में खाद की क्या स्थिति है
जवाब- इस समय 5300 टन डीएपी, 6 हजार टन एनपीके व 13 हजार टन यूरिया उपलब्ध है।
सवाल- मांग के बाद कितने दिनों में समितियाें को खाद मिल जाती है
जवाब- समितियों की मांग के बाद कागजी कार्रवाई में दो तीन दिन निकल जाते हैं। विभाग के स्तर से कोई देरी नहीं होती है।
सवाल- ब्लैक की शिकायताें पर क्या कार्रवाई होगी?
जवाब- अभी तक ऐसी कोई शिकायत नहीं मिली है। शिकायत मिलेगी तो कडी़ कार्रवाई होगी।
सवाल- क्या भंडारित खाद पर्याप्त है?
जवाब- खाद की मांग आने पर और मुहैया करा दी जाएगी, फिलहाल भंडारण पर्याप्त ही है।
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