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अवध विवि में गोपनीय प्रिटिंग के नाम पर 9.67 करोड़ डकारे

Lucknow Bureau

Lucknow Bureau

Updated Fri, 10 Nov 2017 10:47 PM IST
फैजाबाद। अवध विवि के पूर्व कुलपति रहे प्रो. जीसीआर जायसवाल समेत परीक्षा नियंत्रक व प्रभारी कुलसचिव रहे एएम अंसारी की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ के आदेश पर शासन ने विस्तृत जांच कराई तो गैरकानूनी तरीके से कॉलेजों की संबद्धता आदि के नाम पर छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने समेत तमाम वित्तीय अनियमितताएं सामने आई हैं। गोपनीय प्रिंटिंग के नाम पर 9.67 करोड़ डकारने का पुष्टि की गई है। मामले में फैजाबाद के कमिश्नर मनोज मिश्र ने जांच रिपोर्ट उच्च शिक्षा विभाग के विशेष सचिव को भेज दी है, जिसमें एएम अंसारी के भ्रष्टाचार की 25 पेज में रिपोर्ट तैयार की गई है।
एडीएम नगर विंध्यवासिनी राय की अध्यक्षता वाली जांच टीम में शामिल डीएम कार्यालय के प्रशासनिक अधिकारी सतवंत सिंह सेठी, सहकारी समितियां एवं पंचायतों के ज्येष्ठ लेखा परीक्षक संतोष कुमार सिंह, संजय कुमार यादव व राजेंद्र प्रसाद यादव, जिला विकास अधिकारी कार्यालय के लेखाकार राधेश्याम कन्नौजिया, संयुक्त शिक्षा निदेशक कार्यालय के ज्येष्ठ लेखा परीक्षक सूर्यभान सिंह ने जांच रिपोर्ट दी है। जांच में पाया गया कि 2014-15 में गोपनीय प्रिंटिंग के लिए 10 करोड़ का बजट आवंटित किया गया, मगर टेंडर/कोटेशन न प्राप्त कर वर्ष 2013-14 में निर्धारित दर के आधार पर पहले की एजेंसी से प्रिंटिंग कराई गई। इसी तरह 2015-16 में 16 करोड़ का खर्च प्रिंटिंग के लिए उसी एजेंसी से उसी दर पर हुआ। मगर बजट बढ़ने की दर से न तो छात्र संख्या बढ़ी न ही गोपनीय प्रिंटिंग के दर में कोई वृद्धि आई। जांच टीम ने तत्कालीन प्रभारी कुलसचिव एएम अंसारी को दो सालों में 9.67 करोड़ की क्षति विवि को पहुंचाने का दोषी पाया है। सुरक्षा एजेंसियों को ठेके दिए जाने में भी एएम अंसारी ने अनियमितता की। कम से कम तीन फर्मों से एक का चयन होने का नियम दरकिनार कर दो की निविदा दिखाई गई। जबकि 10 निविदाएं प्राप्त होने का उल्लेख वित्त अधिकारी कक्ष की नोटसीट पर पाया गया। साथ ही स्टांप बिक्री के पूर्व के अनुबंध पत्र पर हस्ताक्षर किया जाना फर्जी अभिलेख तैयार करने का श्रेणी में पाया गया। जांच टीम ने पाया कि प्रभारी कुलसचिव रहते एएम अंसारी ने नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए सुरक्षा कर्मी उपलब्ध कराने का अनुबंध किया। जबकि विवि अधिनियम की धारा 15(16) में उल्लेख है कि सभी संविदाओं को वित्त अधिकारी द्वारा विवि की ओर से किया जाएगा। विवि कर्मियों के स्थानांतरण में उपकुलसचिव रहते पद के अधिकारों का अतिक्रमण करते हुए एएम अंसारी ने तृतीय श्रेणी कर्मी छेदीलाल के डिग्री विभाग से गोपनीय विभाग नई तैनाती आदेश परीक्षा नियंत्रक की हैसियत से जारी किया, जो गलत था। विवि में कोई शिविर कार्यालय न होते हुए भी रोजाना गार्ड व कुक के नाम पर भुगतान विवि से कराना। शीला देवी और केशलाल के नाम क्रमश: 28 व 17 माह में 1 लाख 26 हजार का गैरकानूनी भुगतान कर विवि को क्षति पहुंचाया। पुस्तकालय में नियुक्त लैंडिग सहायक अरुण प्रताप सिंह प्रकरण में विवि को छह लाख की क्षति पहुंचाना। शासनादेश के विपरीत समायोजन करना।
जांच में पाया गया कि मनमानेपूर्ण तरीके से परीक्षा केंद्रों का निरस्तीकरण व संचालन किया गया। रामनेवाज सिंह महाविद्यालय कुमारगंज का परीक्षा केंद्र अनियमितता व दुर्व्यवस्था में 19 मार्च 2016 को निरस्त किया गया, जबकि निरीक्षण टीम ने ऐसी कोई रिपोर्ट ही नहीं दी थी। परीक्षा समिति ने 11 अप्रैल 2016 से पुन: उक्त केंद्र को बहाल किया। जबकि बिहारीलाल स्मारक पीजी कॉलेज आमादरवेशपुर, अंबेडकरनगर को पर्यवेक्षक डॉ. श्रीराम विश्वकर्मा की रिपोर्ट पर परीक्षा केंद्र निरस्त किया गया था, परंतु लगातार परीक्षाएं होती रहीं। ऐसे कई मामलों में परीक्षा नियंत्रक व प्रभारी कुलपति रहे एएम अंसारी को दायित्वों से विमुख होकर कार्य करने का दोषी ठहराया गया है। जांच में कई महाविद्यालयों को शिक्षकों व भौतिक संसाधनों का मानक पूरा न होने के बावजूद प्रवेश व कक्षा संचालन का नियम विरुद्ध ढंग से अनुमति प्रदान करने का भी दोषी पाया गया। जांच में यह भी पाया गया कि बोर्ड ऑफ स्टडीज की संस्तुतियों की अनदेखी कर प्रायोगिक परीक्षाओं में आंतरिक व वाह्य परीक्षक बनाए गए। यह भी पाया गया कि श्री अंसारी ने आरटीआई की सूचना न देने पर लगाए गए अर्थदंड को विवि के धन से भुगतान कर क्षति पहुंचाई है। जांच टीम ने पाया कि श्री अंसारी ने सभी महाविद्यालयों में छात्रों की संख्या बढ़ाने का आदेश जारी किया जबकि वहां के शिक्षकों व संसाधनों की अनदेखी की। जांच टीम ने पाया कि छात्रों के भविष्य से विवि प्रशासन ने खिलवाड़ किया। संबद्धता व कक्ष संचालन की अनुमति एक गंभीर व व्यापक प्रकरण है। विवि से संबंधित सभी कॉलेज प्राविधानिक शर्तों का पालन करते हैं या नहीं इसकी सघन व व्यापक जांच बगैर किसी सक्षम टीम से कराए ही छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ किया गया। मामले में तत्कालीन कुलपति प्रो. जीसीआर जायसवाल समेत कुलसचिव का काम देख रहे एएम अंसारी को संयुक्त रूप से जिम्मेदार पाया गया। जांच में शासनादेश का उल्लंघन कर पुस्तकालय समेत दर्जनों नियुक्तियों को करने का आरोप जांच में सही पाया गया। जांच में पाया गया कि विवि प्रशासन ने नियमों के विरुद्ध मनमाने तरीके से किसी कॉलेज को एक वर्ष तो किसी को दो वर्ष या किसी को तीन वर्ष की संबद्धता प्रदान की।
हालांकि एएम अंसारी यहीं से बीते साल रिटायर हो चुके हैं। जबकि कुलपति रहे प्रो. जीसीआर जायसवाल का कार्यकाल खत्म होने पर नए कुलपति प्रो. मनोज दीक्षित कार्य कर रहे हैं।

बेटी के पक्ष में भी किया पद व अधिकारों का दुरुपयोग
अवध विवि का बतौर परीक्षा नियंत्रक और प्रभारी कुलसचिव एएम अंसारी ने 2015 में आदेश जारी किया था कि किसी भी विद्यार्थी को प्रायोगिक परीक्षा में 75 प्रतिशत से अधिक अंक देने पर औचित्य स्पष्ट करना पड़ेगा। यदि औचित्य स्पष्ट नहीं किया तो संबंधित के खिलाफ विधिक कार्रवाई होगी। जांच में पाया गया कि परीक्षा नियंत्रक एएम अंसारी की पुत्री बुशरा उर्दू की प्रायोगिक परीक्षा में 81 प्रतिशत दिया गया, लेकिन औचित्य का स्पष्टीकरण नहीं दिया गया, फिर भी संबंधित के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं की गई। जांच में श्री अंसारी पर अपने पाल्य के पक्ष में पद व अधिकारों का दुरुपयोग किए जाने की पुष्टि की गई है। इससे अलावा जांच में परीक्षा की नियंत्रक की पुत्री को एमए उर्दू प्रथम व अंतिम वर्ष में अधिकाधिक अंक दिलाने में परीक्षा नियंत्रक एएम अंसारी समेत बाबा बरुआदास महाविद्यालय परुइया आश्रम, अंबेडकरनगर के एसोसिएट प्रोफेसर व मूल्यांकन के संयोजक डॉ. नसीम खां को विवि विरुद्ध कार्य का जिम्मेदार पाया गया है।

परिसर के आवास से कार्यालय तक रोज हुई 80 किमी यात्रा
परीक्षा नियंत्रक पर विवि के धन से प्राइवेट वाहन का प्रयोग कर लाखों रुपये के दुरुपयोग का मामला भी पकड़ा गया है। जांच टीम ने लिखा है कि गाड़ी की लॉगबुक की जांच में पाया गया है कि अपने आवास से विवि व विवि से आवास व लोकल यात्रा में औसतन रोजाना 80 किमी यात्रा दर्शाई गई है। गाड़ी का प्रयोग परीक्षा कार्य में होने का कोई प्रमाण नहीं मिला। कुल दो लाख 3 हजार 479 रुपये खर्च दिखाए गए। जबकि विवि अधिनियम में परीक्षा नियंत्रक के लिए किसी गाड़ी की व्यवस्था नहीं है। यह अनियमितता कुलपति की मिलीभगत से की गई। जबकि परीक्षा नियंत्रक आवास से विवि की दूरी मात्र डेढ़ किमी है।

वर्जन
- परीक्षा कंट्रोलर और अनिल यादव का आपसी विवाद था। कंट्रोलर के घर में घुसकर हमला आदि मामले में अनिल यादव पर रिपोर्ट भी दर्ज है। इसी खुन्नस में शिकायत की गई, जबकि सारे आरोप निराधार हैं। मेरे कार्यकाल में न ही कहीं वित्तीय अनियमितता हुई है न ही संबद्धता आदि में कोई गड़बड़ी हुई है। सारे आरोप निराधार है, शासन से पूछा जाएगा तो तथ्यपरक जवाब देंगे।
- प्रो.जीसीआर जायसवाल, पूर्व कुलपति अवध विवि
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