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चुनौतियों संग शुभ फल लाएगा 12-12-12

Faizabad

Updated Tue, 11 Dec 2012 05:30 AM IST
अयोध्या। आने वाला समय किंचित अवरोध के साथ शुभ और आचार्यत्व कर्म में लगे लोगों को फलक पर उभारने वाला होगा। यह तबका चुनौतियों का सामना करने के बावजूद जीवन और समाज में शुभता की प्रतिष्ठा में सफल होगा। इस अनुमान के पीछे 12-12-12 की तारीख का संयोग है।
ज्योतिर्विद व निष्काम सेवा ट्रस्ट के व्यवस्थापक महंत रामचंद्रदास 12 के अंक और इसकी तीन बार आवृत्ति को बृहस्पति को प्रभावित करते हैं। उनके अनुसार 12 का मूलांक तीन होता है और इसकी तीन बार आवृत्ति का योग नौ है। ज्योतिष शास्त्र में तीन और नौ अंक बृहस्पति का प्रतिनिधित्व करते हैं। यानी इस तारीख के प्रभाव से समाज में बृहस्पति के गुणों के वाहक तबके की निर्णायक भूमिका होगी। बृहस्पति ज्ञान, अध्ययन, परंपरा, पुरातत्व, पैतृक और पौराणिक क्षेत्र से संबद्ध होता है। फलत: यह समझा जाता है कि आगामी दिनों में इस क्षेत्र में काफी हलचल देखने को मिलेगी। चूंकि गुरु बृहस्पति इस समय अपने शत्रु शुक्र की राशि वृष में भ्रमण कर रहा है, इसलिए कुछ समय के लिए बृहस्पति अपना प्रभाव छोड़ने के साथ कुछ कुपित भी रहेंगे, जो अपने गुण और तत्व के साथ कुछ समस्या भी खड़ी करेंगे। बृहस्पति के प्रभाव वाले जातकों को कुछ दिक्कतों का भी सामना करना पड़ेगा। मौजूदा राष्ट्रीय परिदृश्य को ध्यान में रखकर आसन्न ज्योतिषीय संयोग की व्याख्या करते हुए श्री दास का मानना है कि बाबा रामदेव पुन: सुर्खियों में रहेंगे। वे अन्ना के लिए भी आने वाला समय महत्वपूर्ण मानते हैं। उनका कहना है कि पुराने ख्याल और अंदाज के अन्ना भी नए तान-तेवर के साथ मैदान में हो सकते हैं और उनकी गतिविधि से भ्रष्टाचार व अनाचार में लगे तबके को दिन में तारे नजर आ सकते हैं। हालांकि इस कोशिश में अन्ना जैसों को भी मुसीबत का सामना करना पड़ेगा। श्री दास के अनुसार फौरी तौर पर भी 12-12-12 की तारीख विशेष फलदायी है। इस तारीख को सौम्य योग, सर्वार्थ सिद्धि योग व अमृत सिद्ध योग बन रहा है। यह दुर्लभ संयोग है, जो सच्चे मन और सद्प्रयास करने वालों को बेहतर परिणाम देगा।
आने वाले दिनों में ग्रहों की गति पर गौर करें तो 12-12-12 का प्रभाव लंबे समय तक कायम रहेगा। यह एक प्रकार से नवयुग की भाव भूमि प्रशस्त करने वाला काल होगा, जो सन् 2018-20 तक कायम रहकर परिवर्तन को परिपूर्णता प्रदान करेगा। भविष्यवक्ता नेस्त्रादमस की भविष्यवाणी के अनुसार भी यह अवधि व्यापक परिवर्तनकारी और नवयुग का सूत्रपात करने वाली होगी। इस अवधि में ऐसे भी दौर आएंगे, जब क्रांति का मंजर नजर आएगा।
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