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अवध के आसमां में विदेशी मेहमानों की परवाज

Faizabad

Updated Mon, 03 Dec 2012 05:30 AM IST
फैजाबाद। पर्यटकों के साथ ही देश-विदेश के दुर्लभ पक्षियों को भी अवध क्षेत्र का इलाका लुभाने लगा है। अवध क्षेत्र की ऐतिहासिक इमारतों व धरोहरों को देखने के लिए यहां सैलानियों का जमावड़ा तो सालभर बना ही रहता है, अब दुर्लभ प्रजाति के पक्षियों ने भी अपना बसेरा बनाना शुरू कर दिया है। अवध क्षेत्र में अगर बहराइच के तटवर्ती इलाकों को छोड़ दें, तो अब फैजाबाद मंडल में भी देशी-विदेशी दुर्लभ व बहुतायत न नजर आने वाले मेहमानों की आमद दर्ज होने लगी है। शायद इसी का नतीजा है कि फैजाबाद मंडल में अबकी बार सारस की संख्या अपेक्षाकृत अधिक पाई गई है। हाल ही में हुई वार्षिक गणना में अबकी बार मंडलभर में कुल 263 सारस मिले हैं। सबसे ज्यादा बाराबंकी जनपद में कुल 193 सारस पाए गए हैं। इससे साफ जाहिर है कि विदेशी धरती का अधिक पसंद करने वाले सारस पक्षी को अब बाराबंकी की माटी अधिक लुभा रही है।
प्रत्येक वर्ष की भांति इस बार भी वन विभाग ने सारस की गणना करायी है। हाल ही में बीते अक्तूबर माह में प्रदेशभर के सभी जिलों में ‘एक साथ-एक समय’ पर हुई सारस की वार्षिक गणना में फैजाबाद मंडल में कुल 263 सारस की आमद दर्ज की गई है। वन संरक्षक सरयू वृत्त व क्षेत्रीय निदेशक अरविंद गुप्ता बताते हैं कि मंडल में सबसे ज्यादा बाराबंकी में कुल 193 सारस मिले हैं। अमेठी में 34, फैजाबाद में 24 तथा सुल्तानपुर में 12 सारस पाए गए हैं। जबकि अंबेडकरनगर में एक भी सारस गणना के दौरान नहीं देखे गए। हालांकि इसे ताज्जुब ही कहा जाएगा कि अंबेडकरनगर जैसे अधिक तटवर्ती इलाके में वनकर्मियों ने गिनती के समय एक भी सारस नहीं देखा। वनाधिकारियों का कहना है कि ऐसा संभव भी हो सकता है कि गणना के दौरान नहीं पाया गया हो। यह बात अलग है कि अंबेडकरनगर में सारस अक्सर देखे जा सकते हैं। वनाधिकारी बताते हैं कि गणना के दौरान खास बात यह देखने को मिली कि जितने सारस देखे गए, उनमें से ज्यादातर अपने जोड़े के साथ मिले। हालांकि जंतु विज्ञानी बताते हैं कि स्वभाव से बेहद शर्मीले और हल्की सी आहट पर चौकन्ने हो जाने वाले सारस अक्सर जोड़े में दिखते हैं। ज्यादातर तटीय इलाके में नजर आने वाले सारस क्रेन की चोंच लंबी व हल्के ग्रे रंग की होती है। सदैव सतर्क रहने की वजह से यह पक्षी जल्दी शिकारियों के शिकंजे में नहीं फंसते हैं।
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