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चोरी से चावल बेच बुरे फंसे राइस मिल मालिक

Faizabad

Updated Sat, 24 Nov 2012 12:00 PM IST
फैजाबाद। चोरी से चावल बेच राइस मिलों के मालिकान बुरे फंस गए है। दरअसल, अब राइस मिल मालिकानों को दो बार वाणिज्य कर विभाग को टैक्स चुकाना पड़ेगा। एक बार धान की खरीद पर, तो दूसरा धान से चावल बनाकर बेचने पर। अगर राइस मिलों की ओर से टैक्स चोरी कर चावल न बेचा जाता और इसे भारतीय खाद्य निगम के गोदामों में भंडारित करा दिया जाता, तो विभाग को केवल धान खरीद पर ही टैक्स मिलता। वजह यह कि कस्टम चावल होने के नाते यह टैक्स फ्री है। इस पर विभाग को कोई कर देय नहीं होता है। हालांकि फैजाबाद जोन में उजागर हुई राइस मिलों की कर चोरी से एक तरह से विभाग को मुनाफा हुआ है। बशर्ते, अफसरों के खुलासे के बाद वाणिज्य कर की भरपाई हो जाए और विभाग को उसका टैक्स मिल जाए। मालूम हो कि फैजाबाद जोन के वाणिज्य कर अफसरों ने एक बार फिर टैक्स चोरी का बड़ा खुलासा किया है। बीते दिनों ‘फर्जी टैक्स इनवॉइस’ का प्रकरण उजागर किया था। अब ताजातरीन मामला बड़े पैमाने पर राइस मिलों में टैक्स चोरी करने का सामने आया है। जहां खाद्य विभाग को दिए जाने वाले सरकारी चावल (सीएमआर व लेवी) को राइस मिलों ने चोरी-छिपे बेचकर बड़ा मुनाफा कमाया है। इस बिक्री के बारे में न तो खाद्य विभाग को अवगत कराया और न ही वाणिज्य कर विभाग को। इतना भर ही नहीं कई मिलों ने तो चोरी-छिपे खरीद-बिक्री कर वाणिज्य कर के साथ मंडी शुल्क की भी चपत लगाई है। मसलन, अंबेडकरनगर की न्योरी चौराहा स्थित शिवम् राइस मिल ने 10,171 कुंतल धान की खरीद अवैध तरीके से कर ली। इस पर मंडी शुल्क व वाणिज्य कर नहीं चुकाया। गुरुवार को वाणिज्य कर अफसरों के छापे में यह बात उजागर हुई है। इसी तरह जिले के पूराबाजार की प्रकाश ग्रामोद्योग समिति में वृहदस्तर पर कॉमर्शियल टैक्स चोरी उजागर हुई है। जबकि जोन के बाराबंकी, बहराइच, अमेठी, सुल्तानपुर, बलरामपुर, श्रावस्ती, गोंडा जिलों की कई अन्य राइस मिलों की जांच विभाग की विशेष अनुसंधान शाखा (एसआईबी) के अफसर कर रहे हैं। खास बात यह है कि अफसरों के इस खुलासे में चावल बिक्री और धान खरीद दोनों पर टैक्स चोरी की बात उजागर हुई है। इस तरह अब राइस मिलों को विभाग को दो बार का टैक्स चुकाना होगा। वाणिज्य कर विभाग अफसर भी इसे स्वीकार करते हैं। वह बताते हैं कि अगर नियमानुसार सरकारी चावल भारतीय खाद्य निगम के गोदामों में जमा हो जाता, तो विभाग को सिर्फ एक बार धान खरीद पर ही टैक्स मिलता। अब जबकि सरकारी चावल भी चोरी से बेच लिया गया है, तो चावल बिक्री पर भी टैक्स देना पड़ेगा। अन्यथा, एफसीआई गोदाम में भंडारण की स्थिति में चावल पर विभाग को टैक्स न मिलता।
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