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बिकने वाले माल पर जारी हाे रहीं सेंट्रल सेल इनवॉइस

Faizabad

Updated Mon, 24 Sep 2012 12:00 PM IST
फैजाबाद। टैक्स इनवॉइस से फर्जी खरीद दिखा आईटीसी क्लेम किए जाने के बड़े खुलासे के बाद अब अफसर जल्द सेंट्रल सेल इनवॉइस के ‘खेल’ का भंडाफोड़ करने की फिराक में हैं। दरअसल, प्रदेश में बड़े पैमाने पर सेंट्रल सेल इनवॉइस के जरिए भी टैक्स चोरी किए जाने के सुराग मिले हैं। इसमें रजिस्टर्ड व्यापारियों द्वारा टैक्स बचाने की जुगत में प्रदेश में बेचे गए माल की एवज में व्यापारी को सेंट्रल सेल इनवाइॅस जारी कर दी जा रही। इस तरह माल सूबे में ही बिकता है, लेकिन विक्रेता व्यापारी विभाग को सिर्फ दो फीसदी टैक्स चुकाता है। वह भी तब जब माल बेचने वाला व्यापारी विभाग को इसकी सूचना दे । प्रदेश में माल बिक्री पर चार प्रतिशत टैक्स व्यापारियों को देना पड़ता है, जबकि गैर प्रदेशों में बेचे जाने पर सिर्फ दो प्रतिशत। वाणिज्य कर के उच्च पदस्थ सूत्रों की मानें तो आईटीसी क्लेम के सत्यापन के दौरान इसकी भनक मिली है। फैजाबाद जोन के अफसर संदेह के दायरे में आईं फर्मों के सबूत जुटाने में जुटे हैं। बीते दिनों वाणिज्य कर विभाग के फैजाबाद जोन के अफसरों ने टैक्स इनवॉइस पर फर्जी बिक्री दिखाकर आईटीसी क्लेम करने की व्यापारियों की जुगत बेनकाब की है। जिसमें रजिस्टर्ड फर्म की टैक्स इनवॉइस के जरिए करोड़ों रुपये की टैक्स चोरी और फर्जी आईटीसी क्लेम कराया जाना उजागर हुआ है। सूत्रों का कहना है कि इसी खुलासे के दौरान जोन के अफसरों ने टैक्स चोर व्यापारियों की ऐसी तरकीब खोज निकाली है, जो फर्जी तरीके से सेंट्रल सेल इनवॉइस जारी किए जाने के संकेत दे रही है। हालांकि अभी इसकी पुष्टि अफसर नहीं कर रहे हैं, लेकिन जोन के जिलों में सीएसटी (केंद्रीय व्यापार कर) पंजीयन कराने वाली कई ऐसी फर्मों का पता चला है, जिन्होंने फॉर्म-ए व फॉर्म-24 के माध्यम से सूचना तो नहीं दी, मगर एक साथ कई फॉर्म-38 विभाग से खरीद डाले हैं। इसके माध्यम से केंद्रीय बिक्री व खरीद दर्शाई गई है। जबकि माल प्रदेश में बेचे जाने के संकेत मिल रहे हैं। संदिग्ध फर्में जोन के बाराबंकी, गोंडा व गाजियाबाद सहित अन्य पश्चिमी जिलों की बतायी जा रही हैं। इसमें विभागीय अधिकारियों की संलिप्तता की बात भी सामने आ रही है। ऐसा इसलिए कि केंद्रीय पंजीयन वाले किसी व्यापारी को एक साथ कई फॉर्म-38 नहीं दिये जाते। अगर दिये भी जाते हैं, तो उसके व्यापार का पहले सत्यापन होता है। अभी जोन के अधिकारी पुष्टि नहीं कर रहे हैं, लेकिन सेंट्रल सेल इनवॉइस से टैक्स चोरी की बात खारिज भी नहीं करते हैं।
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