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अबकी धान खरीद में शुरुआत से ही लागू होगी आरटीजीएस

Faizabad

Updated Tue, 14 Aug 2012 12:00 PM IST
फैजाबाद। खरीफ विपणन सत्र-2012-13 में अबकी बार धान खरीद की शुरुआत से ही आरटीजीएस (रियल टाइम ग्रॉस सेटेलमेंट) लागू करने की तैयारी है। फिलहाल, अभी इस बाबत शासन से तो कोई आदेश नहीं पहुंचा है, लेकिन खरीद से जुड़े अधिकारियों ने नई व्यवस्था लागू होने की संभावना प्रबल बतायी है। जिम्मेदार अधिकारियों का कहना है कि जल्द इस संबंध में आदेश भी जारी होने की खबर है। वैसे, बीते गेहूं खरीद सत्र के आखिर में महज माहभर के लिए लागू हुई योजना का हश्र काफी कसैला रहा है। जिसे अधिकारी अभी तक पचा नहीं पा रहे हैं। मंडल में गेहूं बेचने वाले सैकड़ों ऐसे किसान हैं, जिन्हें अब तक भुगतान नहीं मिल पाया है और वह पेमेंट के लिए इधर-उधर भटक रहे हैं।
मालूम हो कि अब तक सरकारी खरीद में किसानों को अनाज बेचने के बाद केंद्र प्रभारी फौरन चेक बनाकर दे देता था। चेक के माध्यम से ही सालों से भुगतान होता रहा है। मगर बीते गेहूं खरीद सत्र 2011-12 के आखिरी दिनों में महज एक माह के लिए एक जून से नई व्यवस्था लागू कर किसानों को आरटीजीएस से भुगतान करने की हिदायत दी गई। इसके बाद से चेक कटने बंद हो गए। खरीद केंद्रों पर गेहूं बेचने वाले किसानों को प्रभारी ने यह कहते हुए वापस कर दिया कि आपके खाते में धन स्वत: पहुंच जाएगा। बावजूद इसके किसान कई दिनों तक इंतजार करते रहे, लेकिन खाते में धन नहीं पहुंचा। ऐसा हाल किसी एक जिले का नहीं, बल्कि पूरे मंडल भर की यही स्थिति रही। जब कई दिनों तक खाते में धन नहीं पहुंचा, तो किसान परेशान होने लगे। इस संबंध में किसानों का विरोध मुखर हुआ, तो मंडलीय अधिकारी सक्रिय हुए। वरिष्ठ संभागीय लेखाधिकारी कार्यालय से किसी तरह डॉटा फीडिंग होने के बाद धन किसानों के खाते में ट्रांसफर करने के लिए भेजा गया, तो बैंक में लटक गया।
ऐन-केन-प्रकारेण बैंक ने धन ट्रांसफर करना तो शुरू किया, मगर सैकड़ों की तादाद में अभी भी ऐसे किसान हैं, जिनके खाते में गेहूं का पैसा नहीं पहुंचा है। इसे दबी जुबां से जिम्मेदार अधिकारी भी स्वीकार करते हैं, लेकिन शासनस्तर का मामला बता कोई कुछ कहने से कन्नी काटता है।
अधिकारी बताते हैं कि अगर धान खरीद में शुरुआत से आरटीजीएस लागू हो जाती है, तो फिर भुगतान की समस्या जटिल हो जाएगी। दूसरी ओर समय पर धन न मिलने से किसानों की संख्या कम हो जाने की भी आशंका है। इससे लक्ष्य के अनुरूप धान खरीद में रोड़े आ जाएंगे।
वैसे मंडलीय अधिकारी तो योजना लागू होने संबंधी किसी दिशा-निर्देश से इंकार करते हैं, लेकिन जिलास्तरीय अधिकारी इसकी प्रबल संभावना जताते हैं।
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