आपका शहर Close

चंडीगढ़+

जम्मू

दिल्ली-एनसीआर +

देहरादून

लखनऊ

शिमला

जयपुर

उत्तर प्रदेश +

उत्तराखंड +

जम्मू और कश्मीर +

दिल्ली +

पंजाब +

हरियाणा +

हिमाचल प्रदेश +

राजस्थान +

छत्तीसगढ़

झारखण्ड

बिहार

मध्य प्रदेश

3 अक्तूबर प्रकृति दिवस पर विशेष-50 साल में आधी रह गई हरियाली

Etawah

Updated Wed, 03 Oct 2012 12:00 PM IST
इटावा। प्राकृतिक रूप से मिली संपदा का अधाधुंध दोहन करने से इटावा की तस्वीर ही बदल गई है। जल जमीन जंगल का अत्यधिक दोहन होने से पर्यावरण संतुलन पहले जैसा नहीं रहा। आधुनिकतम तकनीक के उपयोग से पानी का दोहन बढ़ा है लिहाजा भूजल स्तर का संतुलन बिगड़ गया है। प्रकृति से हुई छेड़छाड़ के चलते पक्षियों की महत्वपूर्ण प्रजातियां विलुप्त हो गईं। एक समय था जब जनपद के सुखद माहौल में प्रवासी पक्षी भी प्रजनन वास्ते आते थे लेकिन अब उनकी संख्या में काफी कमी आ गई है। यहां का जंगल न इंसानों को समृद्ध करता है और न जानवरों के लायक बचा है। हालांकि 21वीं सदी के शुरू होने के बाद लोगों में कुछ जागरूकता आई, लेकिन प्राकृतिक संतुलन की स्थिति को लाने के लिए अभी और प्रयास की जरूरत है।
---
वनों क ा हुआ अधाधुंध क्षरण
जिले में वन संपदा का अधाधुंध क्षरण हुआ। आबादी के बढ़ते दबाव के चलते वन क्षेत्र कम हुआ। पहले जहां हरियाली नजर आती थी वहां मकान बन गए। सड़कें भी बढ़ीं। विकास के नए-नए आयाम स्थापित हुए। लिहाजा वन क्षेत्र में गिरावट आई। आंकड़ों के मुताबिक 50 वर्ष पूर्व जनपद में हरियाली भरा क्षेत्र करीब 17-18 प्रतिशत था। वह अब घटकर 9.27 प्रतिशत रह गया है। वर्ष 2000 में तो करीब 6 प्रतिशत ही रह गया था। पिछली सपा सरकार में वृहद स्तर पर हुए वृक्षारोपण से इसमें कुछ सुधार हुआ है। हालांकि जिस जिस तरह का वृक्षारोपण कराया गया था उसमें पचास फीसदी भी सफल हो जाता तो काफी हद तक सुधार हो जाता। अधिकांश रोपित पौधे सुरक्षित नहीं रह सके।

दोहन ने बढ़ाया जल का संकट
आबादी बढ़ने के साथ जल का दोहन भी बढ़आ। 50 वर्ष पहले लोगों की पानी को लेकर निर्भरता कुओं पर रहती थी। गांव-गांव में ही नहीं शहरी क्षेत्रों में भी रहने वाले लोगों के घरों में कुएं होते थे। कुओं से पानी खींचने में मेहनत पड़ती थी इसलिए उसका अनावश्यक दोहन कम होता था लेकिन आधुनिक तकनीक के चलते पानी का दोहन बढ़ा। सिंचाई के लिए भी भूगर्भ जल का उपयोग होने लगा। आज ट्यूबवेल और सबमर्सिबल पंप काफी तादाद में लगे। सबमर्सिबल पंपों के जरिए पानी की बर्बादी सर्वाधिक हो रही है। तालाब घटते गए तो पानी रिचार्ज होना भी कम हो गया। बुजुर्गों की मानें तो पहले पचास फीट गहराई पर पानी उपलब्ध हो जाता था। आज 125 फुट पर पानी उपलब्ध तो हो जाता है लेकिन वह पीने काबिल नहीं होता।
---
पशु पक्षियाें की कई प्रजातियां हुई विलुप्त
वनों के क्षरण और बढ़ते प्रदूषण से पशु पक्षियों की कई प्रजातियां विलुप्त हो गई हैं। इनका पर्यावरण संतुलन में बड़ा महत्व रहता था। 50 वर्ष पहले आसमान में काफी तदाद में गिद्ध उड़ते दिखाई देते थे। अब गिद्ध कहीं नजर नहीं आते। गौरैया (घरेलू चिड़िया) की प्रजाति अब न के बराबर रह गई है। घरेलू कौवे भी कम हुए हैं। पहले जनपद के सुरक्षित प्राकृत वासों के चलते बड़ी तादाद में प्रवासी पक्षी प्रजनन के लिए यहां आते थे। अब उनकी संख्या में भी कमी आ गई है। अब प्रवासी पक्षियों क ी संख्या 20 से 25 फीसदी रह गई है। वनों में हिरन थे लेकिन 1970 के दशक में जंगल में विलायती बबूल बो दिए जाने हिरन विलुप्त होते गए। जंगली जानवर जैसे तेंदुआ आदि गायब हो गए।
--
अभी और जागरुकता की आवश्यकता
पर्यावरणविद स्कॉन के महासचिव डा. राजीव चौहान बताते हैं कि यह सही है कि प्राकृतिक संपदा का अधाधुंध दोहन हुआ लेकिन कुछ वर्षों से इस दिशा में कुछ सकारात्मक प्रयास किए गए। जिससे इसमें सुधार आया है। जलदोहन और प्राकृत वास के संरक्षण में अभी जागरूकता की जरूरत है। इस दिशा में शासन-प्रशासन स्तर पर प्रयास किए जाने चाहिए, तभी प्रकृति का बिगड़ा स्वरूप सुधर सकेगा।
  • कैसा लगा
Write a Comment | View Comments

Browse By Tags

october 3 nature day

स्पॉटलाइट

Nokia 3310 की कीमत का हुआ खुलासा, 17 मई से शुरू होगी डिलीवरी

  • मंगलवार, 25 अप्रैल 2017
  • +

फॉक्सवैगन पोलो जीटी का लिमिटेड स्पोर्ट वर्जन हुआ लॉन्च

  • मंगलवार, 25 अप्रैल 2017
  • +

सलमान की इस हीरोइन ने शेयर की ऐसी फोटो, पार हुईं सारी हदें

  • बुधवार, 26 अप्रैल 2017
  • +

इस बी-ग्रेड फिल्म के चक्कर में दिवालिया हो गए थे जैकी श्रॉफ, घर तक रखना पड़ा था गिरवी

  • बुधवार, 26 अप्रैल 2017
  • +

विराट की दाढ़ी पर ये क्या बोल गईं अनुष्का

  • मंगलवार, 25 अप्रैल 2017
  • +

Most Read

हार के बाद बौखलाई आप! मान बोले- अनाड़ियों की तरह लड़े सीनियर नेता

Bhagwant mann on Delhi mcd elections
  • बुधवार, 26 अप्रैल 2017
  • +

सीएम योगी का आदेश बेअसर, डॉक्टर नहीं मान रहे आर्डर

Yogi's order is ineffective, doctor not writing medicine names in capital letter
  • बुधवार, 26 अप्रैल 2017
  • +

जानिए 2012 में तीनों नगर निगम में क्या था बीजेपी का हाल, अब क‌िस न‌िगम में कौन है आगे

all three mcd results 2017 and comparison with 2012 results
  • बुधवार, 26 अप्रैल 2017
  • +

MCD चुनावः उत्तरी दिल्ली नगर निगम में इस हालत में थीं बीजेपी

north mcd seats allotment in 2012 and results in 2017
  • बुधवार, 26 अप्रैल 2017
  • +

सुकमा हमले की वजह से दिल्ली MCD चुनाव की जीत का जश्न नहीं मनाएगी बीजेपी

BJP will not celebrate the victory of Delhi MCD elections due to Sukma Maoist attack
  • बुधवार, 26 अप्रैल 2017
  • +

यूपी डीजीपी का पद छोड़ते वक्त ये ट्वीट कर गए जावीद अहमद, आपने पढ़ा?

javeed ahmed tweets before leaving the post of UP dgp
  • शनिवार, 22 अप्रैल 2017
  • +
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper
Your Story has been saved!
Top