आपका शहर Close

चंडीगढ़+

जम्मू

दिल्ली-एनसीआर +

देहरादून

लखनऊ

शिमला

जयपुर

उत्तर प्रदेश +

उत्तराखंड +

जम्मू और कश्मीर +

दिल्ली +

पंजाब +

हरियाणा +

हिमाचल प्रदेश +

राजस्थान +

छत्तीसगढ़

झारखण्ड

बिहार

मध्य प्रदेश

इस दौर के केंद्रीय साहित्यिक व्यक्ति हैं अज्ञेय

Etawah

Updated Tue, 25 Sep 2012 12:00 PM IST
इटावा। कर्मक्षेत्र स्नातकोत्तर महाविद्यालय में हिंदी विभाग के तत्वावधान में सोमवार को अज्ञेय: प्रदेय एवं वैशिष्ट्य विषय पर तीन दिवसीय राष्ट्रीय परिसंवाद का शुभारंभ हुआ। प्रसिद्ध समालोचक प्रो. नित्यानंद तिवारी ने मुख्य अतिथि के रूप में इस कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस कार्यक्रम में हिंदी साहित्य के देश के बड़े-बड़े विद्वानों के अलावा जिले के हिंदी मनीषियों ने भाग लिया। कालेज की छात्र छात्राएं भी पूरे मन से अज्ञेय पर विद्वानों के विचारों को सुनते रहे।
मुख्य अतिथि नित्यानंद तिवारी ने अपने संबोधन में कहा कि अज्ञेय के साहित्यिक रचनाकार्य पर चाहे कितनी आलोचनात्मक चोट की गई हो लेकिन वे इस दौर के केंद्रीय साहित्यिक व्यक्ति हैं और अब यह वास्तविकता उनके आलोचकों ने भी स्वीकार कर ली है। कार्यक्रम के शुभारंभ में महाविद्यालय प्रबंध समिति के अध्यक्ष डा. लक्ष्मीपति वर्मा ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि ज्ञान के साबुन से ही मस्तिष्क के विचारों की धुलाई की जा सकती है। सेमिनार की संयोजक डा. स्नेहलता शुक्ला ने अतिथियों का परिचय देते हुए संचालन किया। आभार प्राचार्य डॉ. मौकम सिंह ने व्यक्त किया। गोष्ठी के दौरान डिवाइन लाइट इंटर कालेज के प्रबंधक रामनरेश यादव, माउंट लिटरा जी स्कूल के प्रबंधक अतिवीर सिंह यादव, डॉ. सुनीता तिवारी, डॉ. उदारता, डॉ. पुष्पलता श्रीवास्तव विशेष रूप से उपस्थित रहीं।

आलोचक भी कह उठे कि उनसे चूक हुई
प्रसिद्ध समालोचक एवं दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व अध्यक्ष, आचार्य हिंदी विभाग प्रो. नित्यानंद तिवारी ने कहा कि निराला के बाद सर्वाधिक चोट अज्ञेय के साहित्य पर ही हुई लेकिन जिन आलोचकों ने उनके साहित्य का अवमूल्यन किया, वे ही अब (नामवर सिंह जैसे लोग) यह कहने लगे हैं कि उनसे चूक हुई। सच तो यह है कि अज्ञेय ने जड़ता पर प्रहार किए और मुक्तिबोध, केदार, नागार्जुन जैसे रचनाकारों की तरह उन्होंने भी परंपराओं को तोड़ने और नए का साक्षात्कार करने को दिशा दी। व्यक्ति स्वातंत्र्य को उन्होंने अधिक महत्ता दी। अपनी रचनाओं में पहचान पर बल दिया। अज्ञेय ने टैगोर और जैनेंद्र की तरह संघर्ष का रचनात्मक उपयोग किया। प्रकृति व मनुष्य के उन्होंने ऐसे शब्द चित्र दिए जिन पर भरोसा किया जा सकता है।

अज्ञेय का साहित्य चमकीले द्वीप के समान
उद्घाटन सत्र में बीज वक्तव्य देते हुए रांची विश्वविद्यालय के पूर्व आचार्य हिंदी विभाग प्रो. रवि भूषण ने कहा कि अज्ञेय का साहित्य आकर्षक एवं चमकीले द्वीप के समान है। अज्ञेय के साहित्य को समझने के लिए यह ध्यान रखा जाना चाहिए कि उनके रचनाकाल का समय किस तरह का था। चिंतन दृष्टि रख कर उनकी रचना सृष्टि का मूल्यांकन किया जाना चाहिए। 1943 से 1959 का दौर नई कविता का शिखर समय था। साहित्य, समाज और राजनीति समेत पूरे परिदृश्य पर परंपरा, दर्शन और आधुनिकता के प्रति अज्ञेय एक नई मौलिक आधुनिक आवाज दे रहे थे। यह उस समय की मांग थी। मै आखिर विश्व की पीड़ा संचित कर रहा हूं, मैं सन्नाटे का छंट हूं और सबेरे उठा तो धूप खिली थी जैसी रचनाएं उन्हें मनुष्य और प्रकृति का कवि सिद्ध करती हैं।

अज्ञेय ज्ञानोदय के साथ मानव उद्धार के कवि
समारोह की अध्यक्षता गुरुनानक देव विश्वविद्यालय अमृतसर के पूर्व अध्यक्ष, आचार्य हिंदी विभाग प्रो. शशिभूषण शीतांशु ने की। कहा कि अज्ञेय को ज्ञानोदय का कवि कहा जाता है। रामभरोसे लाल चतुर्वेदी जैसे उनके प्रथम आलोचक ने उनके लिए लिखा कि उन्होंने रोमांश से बुद्धिवाद की छलांग लगाई। अज्ञेय यदि ज्ञानोदय के कवि हैं तो मानव उद्वार के भी। मुक्तिबोध ने यदि मध्यवर्ग को केंद्रित करके ही रचनाएं लिखीं तो अज्ञेय के साहित्य में विधाओं, विषयों, शिल्पभाषा आदि का वैविध्य मिलता है। प्रसाद के यहां बुद्धि पर हृदय हावी है तो अज्ञेय के भाव भी मान्य हैं और विवेक भी साथ ही उनके साहित्य में लेखकीय स्वाभिमान भी दिखाई देता है।

तीन पुस्तकों का हुआ विमोचन
कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में तीन पुस्तकों का विमोचन हुआ। इसमें डॉ. स्नेहलता शुक्ला द्वारा रचित पुस्तक अज्ञेय दृष्टि और सृष्टि व विषय आधारित अज्ञेय: प्रदेय और वैशिष्ट्य के अलावा डा. हिमांशु कुमार की पुस्तक साहित्य के सरोकार शामिल हैं।

वर्तमान शून्य है
प्रो. शशिभूषण शीतांशु ने देश की यूपीए सरकार पर कटाक्ष भी किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान को समृद्धि करने के लिए ही इतिहास को याद किया जाता है, लेकिन पं. जवाहर लाल नेहरू से लेकर मनमोहन सिंह तक के इतिहास में वर्तमान शून्य ही है।
  • कैसा लगा
Write a Comment | View Comments

Browse By Tags

man agyey

स्पॉटलाइट

इस तरह से रहना पसंद करते हैं नए नवेले राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद

  • मंगलवार, 25 जुलाई 2017
  • +

बारिश में कपल्स को रोमांस करते देख क्या सोचती हैं ‘सिंगल लड़कियां’

  • मंगलवार, 25 जुलाई 2017
  • +

शाहरुख को सुपरस्टार बना खुद गुमनाम हो गया था ये एक्टर, 12 साल बाद सलमान की फिल्म से की वापसी

  • मंगलवार, 25 जुलाई 2017
  • +

बिग बॉस ने इस 'जल्लाद' को बनाया था स्टार, पॉपुलर होने के बावजूद कर रहा ये काम

  • मंगलवार, 25 जुलाई 2017
  • +

इस मानसून फ्लोरल रंग में रंगी नजर आईं प्रियंका चोपड़ा

  • मंगलवार, 25 जुलाई 2017
  • +

Most Read

कभी 30 रुपये देकर इसी किराये के मकान में रहते थे कोविंद, अब यहां जश्न

some important facts about ramnath kovind
  • शुक्रवार, 21 जुलाई 2017
  • +

यूपी: पेपर लीक गैंग ने लगाई दरोगा भर्ती में सेंध, पूरी परीक्षा रद्द

up police recruitment entire process cancel
  • मंगलवार, 25 जुलाई 2017
  • +

J&K: आर्मी के जवानों ने थाने में घुसकर पुलिस को पीटा, अब्दुल्ला बोले- कार्रवाई हो

soldier beat policemen in jammu six injured
  • रविवार, 23 जुलाई 2017
  • +

बुरे वक्त से निपटने के लिए लालू ने बनाया प्लान B, माया-मांझी का लेंगे सहारा!

RJD leader Lalu Prasad prepares plans alternate pact with Mayawati and Manjhi
  • मंगलवार, 25 जुलाई 2017
  • +

अलगाववादियों को भारत सरकार से भी मिल चुके हैं पैसे: फारूक अब्दुल्ला

GOI too gave funds to separatists says farook abdullah
  • सोमवार, 24 जुलाई 2017
  • +

5 साल की बेटी को नहला रही थी मां, दोनों को मिली खौफनाक मौत

5 year old and mother died after electrocuting
  • सोमवार, 24 जुलाई 2017
  • +
Top
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking Hindi news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper
Your Story has been saved!