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फल-सब्जी की पैदावार बढ़ाने के गुर बताए

Etawah

Updated Mon, 24 Sep 2012 12:00 PM IST
इटावा। राष्ट्रीय बागवानी मिशन के अंतर्गत शहर के कंपनी गार्डन में आयोजित किसान मेला के दूसरे व अंतिम दिन भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान से आए वरिष्ठ वैज्ञानिकों ने किसानों को फल, सब्जी, पुष्प उत्पादन के गुर सिखाए।
कार्यक्रम में उपस्थित किसानों को जानकारी देते हुए भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान पूसा नई दिल्ली के वैज्ञानिक डा. भोपाल सिंह तोमर ने कृषकों को सलाह दी कि वह बाजार से फल और सब्जियां न खरीदें, क्योंकि बाजार में उपलब्ध फल और सब्जियों में हानिकारक रसायन हो सकते हैं। इसका खराब प्रभाव शरीर पर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि यदि किसान अपने ट्यूबवेल के नजदीक एक बीघा खेती में समसामयिक सब्जियां उगाए तो वह कुपोषण और बीमारियों से बच सकेगा। धन की बचत भी कर सकेगा। डा. तोमर ने अच्छे उत्पादन के लिए स्वस्थ बीज पर चर्चा की। उन्होंने किसानों को सलाह दी कि वह स्वयं अच्छा बीज उत्पादन कर सकते हैं। इसके लिए वह ब्रीडर/आधारीय बीज लाकर अपने खेत पर सही तरीके से उत्पादन करें और बीज में आत्मनिर्भर बनें।
पूसा नई दिल्ली के वैज्ञानिक डा. नावेद साविर ने किसानों से फल एवं सब्जियों में कीट रोग एवं निमेटोड के नियंत्रण में हो रहे अंधाधुंध रासायनिक दवाओं पर रोक लगाने के अपील की। बताया कि बीज, पौध लगाने से पहले ही किसान बीच को ट्राइकोडर्मा या किसी फफूंदनाशी से शोधित कर लें एवं खेत में भी ट्राइकोडर्मा को सड़ी गोबर की खाद में मिलाकर प्रयोग करें जिससे बीज एवं मृदाजनित रोग नहीं आएंगे। इसी प्रकार खड़ी फसल में यदि कीड़ों का प्रकोप हो तो विभिन्न प्रकार के गंधफांस का प्रयोग करें या एनपीबी, स्यूडोमोनास, विवेरिया, वेस्यिाना की संतुत मात्रा का छिड़काव करें। यदि इसके बावजूद भी कीट, रोग का नियंत्रण न हो तो तभी रासायनिक दवाओं का संतुलित मात्रा में प्रयोग करें।
वैज्ञानिक रामआसरे ने फल और सब्जियों के उत्पादन के बाद तुड़ाई उपरांत प्रबंधन कैसे करना चाहिए की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि फल और सब्जियों की तुड़ाई सुबह दस बजे या सायंकाल चार बजे के बाद ही करनी चाहिए। इससे सब्जियों में ताजगी बनी रहती है और गुणवत्ता पर कोई बुरा असर नहीं पड़ता है। जैन इरीगेशन सिस्टम से आए प्रतिनिधि द्वारा टपक सिंचाई से फल और सब्जी उत्पादन में होने वाले लाभ बताए।
कार्यक्रम में प्रो. बृजेश चंद्र यादव, डा. एसपी सिंह, अतहर वारसी, डा. विनोद प्रकाश आदि उपस्थित रहे। कार्यशाला में भारी संख्या में किसानों ने प्रतिभाग किया।
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