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पानी नहीं, बीमारी पी रहे बच्चे

Etawah

Updated Sat, 22 Sep 2012 12:00 PM IST
केस हिस्ट्री-1
ग्राम जुगरामऊ स्थित प्राथमिक विद्यालय परिसर में एक हैंडपंप लगा है। इससे निकलने वाले पानी में बालू होती है। विद्यालय में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है कि बर्तन में पानी को स्टोर करके रखा जाए जिससे बालू तली में बैठ जाए। बच्चे हैंडपंप से निकलने वाले पानी को पीकर प्यास बुझाते हैं। पानी के साथ बालू भी उनके पेट में जा रही है। यह बालू उनके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।

केस हिस्ट्री दो
ग्राम पायकलां में स्थित प्राथमिक विद्यालय में पेयजल के लिए हैंडपंप ही सहारा है। पूरे गांव के हैंडपंपों से खारा पानी निकलता है। हालत ये है कि गांव के लोग कम उम्र में ही बुढ़ापे की डगर पर पहुंच जाते है। ग्रामीण की मजबूरी है कि वह दूसरे गांव से पानी लाकर अपनी प्यास बुझाएं। प्राथमिक विद्यालय में लगा हैंडपंप भी खारा पानी उगलता है। बच्चे उसी हैंडपंप का पानी पीते हैं।
इटावा। परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को शुद्ध पानी नहीं मिल पा रहा है। उपरोक्त दो केस हिस्ट्री तो महज नमूना हैं। स्कूलों में पेयजल आपूर्ति के लिए हैंडपंप तो लगे हैं लेकिन इनसे पानी कैसा निकल रहा इसकी जांच नहीं कराई जाती है। कहीं पर बालूयुक्त तो कही खारा पानी बच्चे पी रहे हैं। हालांकि इन विद्यालयों में पढ़ाने वाले शिक्षक अपने स्वास्थ्य के प्रति पूरी तरह सजग हैं। तभी तो वह अपने साथ पानी की बोतल लेकर आते है। वह स्कूल में लगे हैंडपंप का पानी कभी पसंद नहीं करते। जबकि बच्चों को वही पानी पीना पड़ता है।

यहां है ध्यान देने की जरूरत
महेवा ब्लाक क्षेत्र
बढ़पुर ब्लाक क्षेत्र
जसवंत नगर ब्लाक क्षेत्र
(इनमें बढ़पुर और जसवंत नगर क्षेत्र बीहड़ है और महेवा क्षेत्र अशुद्ध भूगर्भ जल के लिए जाना जाता है।)

जिम्मेदार बोले
तीन चार दिन पूर्व ही उन्हें जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी का अतिरिक्त चार्ज मिला है। अभी उन्हें इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है। फिर भी वह पता कराएंगे। पानी की जांच नहीं होती है तो उसकी व्यवस्था कराई जाएगी।- ओपी सिंह डीआईओएस/प्रभारी बीएसए इटावा

प्राथमिक विद्यालयों में लगे हैंडपंपों के पानी की जांच की जिम्मेदारी उनकी नहीं है। बीएसए व फूड इंस्पेक्टर समन्वय स्थापित करके पानी का सैंपल लेकर जांच के लिए भेज सकते हैं।- डा. एसएच जायसी सीएमओ इटावा
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