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ढाबों में समानांतर आरटीओ कार्यालय

Etawah

Updated Fri, 07 Sep 2012 12:00 PM IST
केस हिस्ट्री-1
04 अप्रैल 2011 को शहर के बाइसख्वाजा रोड से नोइंट्री में प्रवेश कर रहे एक ट्रक को वहां तैनात ट्रैफिक सिपाही ने रोका तो ट्रक चालक एक टोकन दिखाकर सिपाही से विवाद करने लगा। सूचना पर टीआई अपनी टीम के साथ पहुंचे और उन्होंने ट्रक पर एक हजार रुपए का जुर्माना ठोक दिया। टीम ने जो टोकन चालक से बरामद किया उस पर जसवंतनगर क्षेत्र के एक ढाबा का नाम खिला था। टीआई अशोक कुमार यादव ने इस संबंध में तत्कालीन एसएसपी को लिखित शिकायती पत्र देकर टोकन के दम पर चल रहे ट्रक की जानकारी दी थी।

केस हिस्ट्री-2
बुधवार को आईटीआई चौराहे से पास लोहे के गाटर लदे ट्रक को पकड़ा तो चालक ने रौब के साथ टोकन दिखाया। इस टोकन पर मेजर साहब, गाड़ी नंबर, हस्ताक्षर व एक ढाबे का नाम लिखा स्टीकर लगा था। टीम ने ट्रक को सीज करके सिविल लाइन थाना पुलिस के सुपुर्द कर दिया। यह ट्रक बनारस के लिए जा रहा था। टीआई अशोक कुमार यादव ने ढाबा मालिक पर कार्रवाई के लिए एक बार फिर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखकर पूरे खेल की जानकारी दी है।

इटावा। इटावा में समानांतर आरटीओ आफिस चल रहा है। यहां चुनिंदा ढाबे में रुककर समस्या बताएं, ढाबा मालिक आपको एक टोकन देगा और इस टोकन को लेकर कहीं भी बिना रोक टोक गाड़ी ले जाई जा सकती है। टोकन की कीमत दूरी व माल के हिसाब से तय होती है।
यह सारा खेल एआरटीओ कर्मचारियों व रसूखदार दलालों की मिलीभगत से चल रहा है। मोटा कमीशन मिलता है, इस वजह से सभी जानकर अनजान बने हुए हैं। यह धंधा उन ट्रक चालकों के लिए है जिन्हें रास्ते में चेकिंग से बचना होता है। ढाबे पर दूरी और वाहन में लदे माल की कीमत के हिसाब से एक रकम देनी पड़ती है। उसके बाद वहां मौजूद व्यक्ति एक टोकन वाहन चालक को दे देता है। रास्ते में कोई विभागीय टीम वाहन को रोके तो चालक उस टोकन को दिखाकर छुटकारा पा लेता है। टोकन देखने के बाद चेकिंग दल उनसे कागज भी नहीं मांगता। दरअसल टीम के सदस्य टोकन देखने के बाद समझ जाते हैं कि इस ट्रक को पास करने का कमीशन उनके आदमियों के पास पहुंच चुका है। जिले में यह खेल लंबे समय से चल रहा है। जिले के कई प्रमुख ढाबों से तरह-तरह के कोड लिखकर ट्रक चालकों को टोकन दिए जा रहे हैं।

कैसे खेला जाता है यह खेल
जो ढाबा मालिक इस खेल में शामिल हैं वह ट्रक मालिकों या चालकों से दूरी और माल के हिसाब से पैसा लेकर एक टोकन देते हैं। इस टोकन पर एक कोडवर्ड, ट्रक का नंबर, एक हस्ताक्षर तारीख के साथ होते हैं। यह टोकन जिस ट्रक चालक के पास होगा उसे रास्ते में एआरटीओ चेकिंग के दौरान परेशान नहीं किया जाएगा।

प्रदेश में फैला है नेटवर्क
इस खेल को खेलने वालों का नेटवर्क प्रदेश भर में फैला हुआ है। तभी तो खिलाड़ी बेखौफ होकर एक जिले से दूसरे जिले या फिर प्रदेश के किसी भी जिले तक की गारंटी ले लेते हैं। अगर कहीं कोई ट्रक पकड़ा जाता है तो उसे वहां के दलालों की मदद व अधिकारियों की मुट्ठी गरम करके छुड़वाया जाता है।

वसूली का गणित
ट्रैफिक पुलिस द्वारा बुधवार को पकड़े गए ट्रक के चालक ने बताया कि इटावा के एक ढाबा पर करीब सात हजार रुपए लेकर बनारस तक के लिए टोकन दिया गया था। इससे पहले कई बार माल लेकर जा चुका हूं। टोकन दिखाने पर कोई रोकता-टोकता नहीं है। प्रति ट्रक से लिए गए पैसे में एक हिस्सा एआरटीओ को जाता है तो कुछ हिस्सा एआरटीओ कार्यालय में बैठे रसूखदार दलाल व अन्य कर्मचारियों की जेब में जाता है। उसने इस कमाई में पुलिस की भी हिस्सेदारी की बात कही।

एसएसपी चाहते तो कब का रुक जाता यह खेल
इटावा। जिले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक चाहते तो वसूली का यह खेल कब का रुक जाता। इस पूरे खेल की जानकारी जिले की पुलिस को है, लेकिन कोई कार्रवाई आज तक नहीं हुई है। 04 अप्रैल 2011 को तत्कालीन यातायात प्रभारी ने शहर से गुजरते समय एक ट्रक को पकड़ा था। इस ट्रक चालक ने रौब के साथ एक ढाबा से दिया गया टोकन ट्रैफिक टीम को दिखाया था। तत्कालीन टीआई द्वारा तत्कालीन वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को लिखित रूप में टोकन व टोकन जारी करने वाले ढाबा मालिक के संबंध में जानकारी दी गई थी। एसएसपी द्वारा इस संबंध में कोई कार्रवाई नहीं की गई।

अफसर बोले-
टोकन का खेल काफी समय से चल रहा है। बिना एआरटीओ कार्यालय की संलिप्तता के टोकन नहीं चल सकता है। सबकुछ एआरटीओ कार्यालय व दलालों की साठगांठ से हो रहा है। पिछली साल जब ट्रक को टोकन के साथ पकड़ा था तो तत्कालीन एसएसपी को पत्र लेकर पूरे मामले से अवगत कराया गया था। इस बार वर्तमान एसएसपी को पत्र लिखकर जानकारी दी गई है। -अशोक कुमार सिंह यादव, यातायात प्रभारी, इटावा
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