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बैंक आएं जनाब! खाना-पीना लेकर

Etawah

Updated Wed, 05 Sep 2012 12:00 PM IST
इटावा। बैंक से जुड़ा कोई काम निकल आए तो लोगों के हाथ पैर फूलने लगते हैं। बैंक परिसर में कदम रखते ही काउंटर पर लोगों का हुजूम देख मन विचलित हो जाता है। सोचना पड़ता है कहां जाएं, किससे पूछें, किस काउंटर पर कैसे काम होगा। वगैरह- वगैरह। बैंकों में भीड़ भाड़ रोजमर्रा के सामान्य कामकाज के ढर्रे में शामिल हो गई है। बेरोजगारी भत्ता, छात्रवृत्ति, स्कूलों और पेंशन के नए खातों के कारण बैंकों में लोड काफी बढ़ गया है। अमर उजाला ने शहर की कई बैंकों का जायजा लिया। हालात बेहद खराब दिखे। बैंक ग्राहकों की ढेरों समस्याएं सामने आईं। पासबुक में एंट्री तक के लिए कतारें दिखीं। खाता खुलवाने के लिए लोग जद्दोजहद करते दिखे। पेमेंट को लेकर भी मारामारी रही।
एसबीआई, शास्त्री चौराहा
शास्त्री चौराहा स्थित स्टेट बैंक की मुुख्य शाखा में सुबह करीब 11.30 बजे नई इमारत में चारों तरफ लोगों की भीड़ दिख रही थी। भीड़ के बीच घिरे व्यक्तिक मैनेजर अरशद नजीब को देखना तक मुमकिन नहीं था। चार काउंटराें पर खाता खुलवाने की प्रक्रिया के बीच लोग झूलते दिखे। व्यक्तिक मैनेजर से फार्म वैरीफाइड होने के बाद एक अन्य काउंटर पर विवेक यादव कंप्यूटर में फीड कर रहे थे। सहायक मैनेजर चेक कर रहे थे। तब कहीं जाकर यह फार्म एक अन्य काउंटर पर जमा हो रहा था। खाता खुलवाने वालों में अमूमन बेरोजगारी भत्ता के लिए आवेदन करने वाले रहे। फिक्सड डिपाजिट बांड बनवाने के काउंटर पर पेमेंट के लिए महिलाओं की कतार लगी हुई थी। कई महिलाएं अपने दुधमुंहे बच्चों के साथ जननी सुरक्षा के तहत मिली चेक को भुनाने के लिए जद्दोजहद करती दिखीं। वह भीड़भाड़ के चलते बच्चे को होने वाली परेशानी का वास्ता भी काउंटर क्लर्क देती रहीं। इस काउंटर पर एफडी बनवाने वाले इक्का दुक्का ही रहे। एक अन्य काउंटर पर पास बुक एंट्री के लिए भी लोगों की लंबी कतार लगी रही। इस भीड़ में बैंक के पुराने ग्राहक या लोन आदि लेने वाले काफी कम दिखे। लॉकर ऑपरेट कराने के लिए सीट से उठकर आने पर व्यक्तिक मैनेजर से बातचीत संभव हो पाई।

हर रोज करीब 40 से 50 नए खाता खोले जा रहे हैं। कई प्रकार पेंशन एवं अन्य योजनाओं के पेमेंट चल रहे हैं। सभी कार्य जरूरी हैं। लोन आदि अन्य कार्य प्रभावित न हो इसके लिए शाम 4:00 बजे का वक्त निर्धारित कर रखा है। एक काउंटर पर कई कार्य भी कराए जा रहे हैं। ताकि लोगों को सहूलियत रहे। - अरशद नजीब, व्यक्तिक मैनेजर, एसबीआई मुख्य शाखा, इटावा

बैंक आफ बड़ौदा, कचहरी रोड
कचहरी रोड स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा शाखा में खाता खुलवाने एवं पेमेंट के लिए काउंटरों पर भीड़ लगी दिखी। पासबुक एंट्री के काउंटर पर कोई कर्मचारी न होने से लोग वापस लौटते रहे। पता चला कि पहले इस काउंटर का कंप्यूटर खराब था। इस वजह से एंट्री नहीं हो पा रही थी। अब जब कंप्यूटर ठीक हो गया तो कर्मचारी छुट्टी पर है। कर्मचारी खाता खोले जाने के सरकारी फरमान से खासे खिन्न दिखे। स्कूलाें में जाकर भी खाता खोलने के आवेदन को पूर्ण किया जा रहा है। यहां बेरोजगारी भत्ता के हर रोज 20 से अधिक खाता खोले जा रहे हैं।

बैंक पर वर्क लोड अधिक हो गया है। तकरीबन सारे काम बैंक पर निर्भर हैं। वजीफा वितरण में स्कूलों द्वारा हेरफेर किया गया तो यह कार्य भी बैंक से किया जाने लगा। होना तो यह चाहिए था कि हेरफेर करने वालों को जेल भेजा जाता। संसाधन सीमित है। एक दिन पूर्व ही दो स्टाफ कर्मियों को कटरा साहब खां स्थित मदरसा इस्लामियां स्कूल भेजा था। जहां करीब 150 बच्चों के खाता खोलने के आवेदन पूर्ण कराए गए। -सहदेव सिंह, ज्वाइंट मैनेजर, बैंक ऑफ बड़ौदा इटावा


शहर की सेंट्रल बैंक
दोपहर करीब डेढ़ बजे भीड़ कुछ हल्की दिखी। कर्मचारी वाउचरों की गड्डी दिखाते हुए बताते है कि सुबह काफी भीड़ थी। यहां भी बेरोजगारी भत्ता व छात्रवृत्ति के लिए खाते खुलवाने वालों की भीड़ लगी रहती है। ब्रांच मैनेजर डीपी शर्मा असिस्टेंट की टेबिल पर वाउचर वैरीफाइड करते दिखे। पूछने पर बताया कि इस सीट पर कार्यरत रहे राजीव का तबादला हो गया है। इसलिए इसकी जिम्मेदारी संभालनी पड़ रही है। 16458 खाताधारकों के लिए चार कर्मचारियों का यहां स्टाफ तैनात हैं। रुपए जमा करने से लेकर धन निकासी तक के लिए लोगों को काफी वक्त बर्बाद करना पड़ता है।


शैक्षिक सत्र के शुरू होते ही जुलाई माह में ही यदि खाता खुलने की प्रक्रिया शुरू करा दी जाए। तो इतनी परेशानी न हो। खाता खोलना टाइम बाउंड न हो। बैंक की परिस्थिति पर भी गौर होना चाहिए। वैसे बैंक में जितने खाते खुले, वह हमारे लिए अच्छा ही है। लोन आदि के मामलों में कभी कभार लोगों से अगले दिन आने का आग्रह कर लिया जाता है। -डीपी शर्मा, शाखा मैनेजर, सेंट्रल बैंक इटावा
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