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नजरे इनायत है कि नजरअंदाज किए जा रहे

Etawah

Updated Thu, 30 Aug 2012 12:00 PM IST
इटावा। सरकारें बदलती रहीं पर बिजली विभाग के बाबू अपनी सीट पर डटे रहे। मलाईदार सीटों पर जमे उन बाबुओं पर या तो नजर इनायत है या नजर अंदाज किए जा रहे। तभी तो कोई अफसर इन्हें बदलने की जहमत नहीं लेता। यदाकदा किसी का तबादला हो गया तो वह अपने रसूख का इस्तेमाल करके आदेश निरस्त करा लेता है।
इटावा जनपद के बिजली विभाग में कर्मचारियों का टोटा है। नई भर्ती पर रोक लगी है। ऐसे में स्टाफ की कमी होना स्वाभाविक है लेकिन शासन का आदेश है कि किसी एक पटल पर एक कर्मचारी तीन वर्ष से अधिक समय तक न रहे। यह शासनादेश इस जनपद में धरासाई है। विभाग में जो कर्मचारी तैनात हैं वह वर्षों से एक ही सीट पर काबिज हैं। शुरुआत बिजली विभाग के अधीक्षण कार्यालय से करते हैं। यहां कार्यरत अखिलेश कुलश्रेष्ठ व मोहित दुबे दस वर्ष से इसी कार्यालय में एक ही सीट पर काबिज हैं। सरकारें बदलीं, अधिकारी भी बदलते रहे लेकिन इनकी सेहत पर असर नहीं पड़ा। ऐसा ही हाल विद्युत वितरण खंड कार्यालय का भी है। बिलिंग क्लर्क विवेक शर्मा और मुकेश शुक्ला वर्षों से एक ही सीट पर जमे हैं। इसी तरह मोहनलाल शर्मा को हेड एकाउंटेंट रहते कई बरस बीत गए। इस विभाग में शायद ही कोई कर्मचारी ऐसा हो जो तीन वर्ष के अंदर एक सीट पर काबिज हो।
ऐसा नहीं है कि स्थानांतरण नहीं होते। किसी ने शिकायत कर दी तो विभाग के उच्चाधिकारियों को नींद टूटी और उन्होंने स्थानांतरण भी किए। उपरोक्त कर्मचारियों में कई ऐसे कर्मचारी हैं जिनके गैर जनपद स्थानांतरण हुए। बावजूद इसके वह कर्मचारी अपनी अपनी सीटों पर अपनी तैनाती को बरकरार रखने में सफल रहे। स्थानांतरण होने के कुछ दिन तक तो वह इधर उधर रहे फिर जुगाड़ लगाकर स्थानांतरण निरस्त करा लिया।

हनक के आगे सारे आदेश बौने
अधीक्षण अभियंता कार्यालय में कार्यरत अखिलेश कुलश्रेष्ठ की हनक के आगे सभी अधिकारी बौने साबित हुए। पिछली सपा सरकार में वह इसी कार्यालय में कार्यरत थे। सत्ता परिवर्तन के साथ ही तत्कालीन प्रबंधक कृपाल सिंह ने 14 अगस्त 2007 क ो इटावा से फर्रुखाबाद के लिए स्थानांतरण कर दिया था लेकिन तत्कालीन अधीक्षण अभियंता ने कार्यमुक्त नहीं किया। इसके बाद कई वर्षों तक विभागीय अधिकारियों के मौखिक आदेश पर काम करते रहे। 22 जनवरी 11 को मुख्य अभियंता रहे एपी सिंह ने मुख्यमंत्री कार्यालय के आदेश को संदर्भ में लेते हुए अधीक्षण अभियंता से अखिलेश कुलश्रेष्ठ को कार्यमुक्त करने को कहा। उसी दिन इटावा सदर विधायक महेंद्र सिंह राजपूत व लखना के विधायक भीमराव अंबेडकर के पत्र पर ऊर्जा मंत्री रामवीर उपाध्याय ने उनका स्थानांतरण निरस्त करने का आदेश प्रबंध निदेशक को जारी कर दिया। अखिलेश आज तक अधीक्षण अभियंता के कार्यालय में बड़े बाबू की हैसियत से कार्यरत हैं। इधर, प्रबंध निदेशक ओपी जैन ने उनका स्थानांतरण एक बार फिर फर्रुखाबाद कर दिया है तो चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है।

विभाग में कर्मचारियों के स्थानांतरण के लिए हर वर्ष नीति तय की जाती है। कर्मचारियों की कमी को देखते स्थानांतरण किए जाते हैं। यह सब शासनस्तर पर तय होता है। हमारी भूमिका नहीं के बराबर रहती है।-एके बंसल, अधीक्षण अभियंता इटावा
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