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दरकते पुल पर हर पल मंडराता खतरा

Etawah

Updated Wed, 01 Aug 2012 12:00 PM IST
इटावा। इटावा-ग्वालियर राष्ट्रीय राजमार्ग पर चंबल नदी पर बना पुल किसी भी दिन बड़े हादसे का गवाह बन सकता है। पुल की रेलिंग जगह-जगह टूट चुकी है। पुल के बीचोबीच बड़ी सी दरार है। सौ साल तक चलने वाला पुल 43 साल में ही जर्जर हो गया। नेशनल हाइवे -92 के अधिकारी इसका ठीकरा जिला प्रशासन पर फोड़ रहे हैं। उनका कहना है कि समय से पहले पुल के जर्जर होने के पीछे क्षमता से अधिक लोड वाहनों का गुजरना है। जिसकी रोकथाम को जिला प्रशासन ने कभी प्रयास नहीं किए।
मंगलवार को एनएच-92 के मुख्य अभियंता व सेतु निगम के एमडी आरएस यादव ने इटावा आकर पुल का जायजा लिया। कहा कि मरम्मत के लिए पुल को 10 से 12 दिन तक बंद करना पड़ेगा। पुलिस प्रशासन सहित जिला प्रशासन को पुल पर आवागमन रोकने को लेटर पहले ही दिया जा चुका है, लेकिन यातायात अभी तक नहीं रुका है। अधिकारियों ने बीचोबीच हुए 4 बाई 6 फुट के गड्ढे की मरम्मत कराने की बात कही, लेकिन विशेषज्ञों की मानें तो गड्ढा मरम्मत अस्थाई विकल्प है। स्थाई विकल्प के लिए या तो उस हिस्से का पूरा स्लेव बने या फिर नया पुल का निर्माण हो। मरम्मत से पुल कमजोर ही रहेगा। अगर कभी भारी वाहन फंस गया तो गड्ढा दोबारा भी हो सकता है।

समय से पहले क्यों जर्जर हुआ पुल
उत्तर प्रदेश-मध्य प्रदेश को जोड़ने के लिए वर्ष 1969 में चंबल नदी पर पुल बनकर तैयार हुआ। मात्र 43 वर्षों में ही पुल जर्जर क्यों हो गया यह एक बड़ा सवाल है। सेतु निगम के एक अधिकारी ने बताया कि अगर पुल का निर्माण मानकों के अनुरूप हुआ है तो पुल की लाइफ 75 से 100 वर्ष तक होती है। एनएच 92 के अधिकारी समय से पहले पुल जर्जर होने का कारण अधिक लोड वाले वाहन बता रहे हैं। वहीं इस विभाग के कुछ अधिकारियों का कहना है कि समय से पहले पुल के जर्जर होने का कारण देखभाल में लापरवाही है। पुल पर इतना बढ़ा और गहरा गड्ढ़ा एक साथ एक ही दिन में नहीं हो गया। गड्ढे में दिख रहीं सरिया भी टूट चुकीं हैं। पहले पुल का डामर टूटा होगा, फिर स्लैब की आरसीसी टूटी होगी, जो बाद में बढ़ते-बढ़ते इतने बड़े गड्ढे में तब्दील हो गई। जब गड्ढा होने की शुरुआत हुई थी तभी मरम्मत कर दी जाती तो यह हाल न होता।

अधिकारी पहुंचे निरीक्षण को
चंबल पुल में गड्ढा होने का समाचार जब अखबारों में छपा तो अधिकारियों को इस पुल की सुध आई। क्षेत्रीय अधिकारियों के निरीक्षण के बाद मंगलवार को एनएच 92 के मुख्य अभियंता/सेतु निगम के एमडी आरएस यादव, अधीक्षण अभियंता एसके अग्रवाल स्थानीय अधिकारियों के साथ पुल पर पहुंचे और निरीक्षण किया। मुख्य अभियंता ने कहा कि पुल की मरम्मत के लिए पारीक्षा (झांसी) और लखनऊ से एक्सपर्ट बुलाए गए हैं। मरम्मत कार्य शुरू होने से दस दिन तक पुल पर पूरी तरह से यातायात प्रतिबंधित रहेगा। सिर्फ दोपहिया और पैदल यात्रियों को ही अनुमति दी जाएगी। पुलिस और जिला प्रशासन को आवागमन बंद कराने के लिए सख्त कदम उठाने चाहिए। जब तक पुल पर कंपन होगा मरम्मत नहीं हो सकती।

अधिकारियों को नहीं पता कब बना पुल
जिस विभाग के अफसरों के पास पुल की देखरेख का जिम्मा हो उन्हीं अधिकारियों को यह नहीं पता है कि पुल कब बना था। सब बोले, पुल उनके समय में नहीं बना इसलिए जानकारी नहीं है। जब मुख्य अभियंता की मौजूदगी में अधिकारियों से पुल निर्माण के संबंध में पूछा गया तो इटावा डिवीजन के एक अधिकारी ने पुल निर्माण का वर्ष 1976 बता दिया तभी दूसरे अधिकारी ने पुल 1969 में बनने की बात कही। बाद में सभी अधिकारियों ने पुल का निर्माण 1969 में होना बताया।

कारगर नहीं होगी मरम्मत
कोई भी पुल अगर मानक के अनुरूप बने तो उसकी लाइफ 75 से 100 वर्ष तक होती है। चंबल पुल के बीच में इतना बड़ा गड्ढा हो गया है कि उसकी मरम्मत केवल अस्थाई विकल्प है। पुल मरम्मत के बाद भी कमजोर ही रहेगा और जब कभी भारी वाहन का पहिया मरम्मत किए हिस्से से गुजरा तो वह हिस्सा फिर बैठ जाएगा। होना तो यह चाहिए कि या तो पुल का क्षतिग्रस्त पूरा स्लैब का नए सिरे से निर्माण हो या फिर नए पुल की स्वीकृति दी जाए।
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