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मुख्यमंत्री के जिले में अन्नदाता का पुरसाहाल नहीं

Etawah

Updated Sat, 26 May 2012 12:00 PM IST
ऊसराहार/भरथना/इटावा। मुख्यमंत्री के जिले में भी किसानों का कोई पुरसाहाल नहीं है। कहीं किसान अपने गेहूं का सरकारी मूल्य पाने के लिए मारा-मारा फिर रहा है तो कहीं बारदाना न होने या मानक का बहाना बनाया जा रहा है। इसके अलावा 85 रुपए प्रति कुंतल खर्चे की मांग तो कहीं पर कटौती के नाम पर किसानों का शोषण हो रहा है। प्रशासन लाख दावा करे कि खरीद केंद्रों पर किसानों का गेहूं खरीदा जा रहा है पर सच्चाई इसके विपरीत है। सरकारी खरीद केंद्र आज भी प्रभारियों की मनमानी के चलते सन्नाटे में दिख रहे हैं जबकि आढ़तियों के यहां गेहूं के ढेर लगे हैं। जहां किसानों को सरकारी मूल्य देने की बजाय सस्ते में उनका गेहूं खरीदा जा रहा है।
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कुछ पर मिले लटके ताले तो कुछ पर दिखा सन्नाटा
नई मंडी में गेहूं की सरकारी खरीद के लिए चार केंद्र खुले हैं। यूपीएसएस के खुले केंद्र शुक्रवार को बंद पाए गए। जबकि नैफेड व कर्मचारी कल्याण निगम के केंद्र खुले तो मिले लेकिन उनपर सन्नाटा पसरा मिला। केंद्र प्रभारियों का कहना रहा कि किसान गेहूं लेकर ही नहीं आ रहा है तो तौल किसकी करें। इसके इतर नई मंडी में आढ़तियों के यहां गेहूं के ढेर लगे मिले। जानकारी करने पर पता चला कि वहां भी सरकारी दर पर गेहूं नहीं खरीदा जा रहा है। आढ़ती कहते हैं कि उनके पास सरकारी बारदाना ही नहीं है। तब खरीद कैसे करें। एक आढ़त पर मिले किसान रामसिंह का कहना रहा कि वह सरकारी मूल्य पाने के लिए केंद्रों पर कई दिनों से भटक चुके हैं कहीं पर भी उनका गेहूं नहीं खरीदा गया। किसी ने कहा कि मानक के अनुरूप गेहूं नहीं है तो किसी ने कहा कि बारदाना नहीं है। मजबूर होकर आढ़त पर बेचने को लाना पड़ा। इसी तरह की बात नगलाबर निवासी सोवरनसिंह ने भी कही।
कटौती से इंकार किया तो गेहूं हो गया मानक विहीन
ऊसराहार। ताखा क्षेत्र के अधिकांश केंद्रों पर खर्चा व कटौती लेने का बोलबाला चल रहा है। किसान ने इससे इंकार किया तो उसका गेहूं मानकविहीन हो जाता है। बेचारे किसान को सरकारी मूल्य तो नहीं मिल पाता अलबत्ता उससे भाड़ा जरूर लग जाता है। खरीद केंद्र पर गेहूं लेकर पहुंचने वाले किसानों से प्रति कुंतल 85 रुपए खर्चा की मांग की जाती है तो कुछ केंद्रों पर तुलाई के नाम पर 5 से 7 किलो प्रतिकुंतल कटौती मांगी जा रही है। बेवजह की जा रही इस मांग से किसान परेशान है। पुरैला गांव के किसान तिलक सिंह बताते हैं कि यदि कटौती से मना करो तो उसी क्षण केंद्र प्रभारी गेहूं को मानकविहीन बताकर खारिज कर देता है। केंद्रों पर बिना कटौती दिए गेहूं तुलवाना टेड़ी खीर साबित हो रहा है। सरसईनावर के किसान नेता अगर सिंह शाक्य का कहना है कि उन्हाेंने स्वयं आला अधिकारियों के पास गेहूं की खरीद केंद्रों पर हो रहे शोषण की बात पहुंचाई लेकिन कई फर्क नहीं पड़ा।
झूठी खरीद दर्शाई जा रही है
माकपा के प्रांतीय कोषाध्यक्ष और किसान नेता मुकुटसिंह का कहना है कि विपणन विभाग के केंद्रों पर किसानों के नाम पर झूठी खरीद दर्शाई जा रही है। अब तक इन केंद्रों पर जो भी खरीद हुई है यदि उसकी जांच कराई जाए तो गेहूं खरीद की असलियत सामने आ जाएगी।
सिर्फ रसूखदारों का ही तुल रहा है गेहूं
भरथना (इटावा)। पिछले एक सप्ताह से आम किसान खरीद केंद्रों पर गेहूं की तुलाई न होने से चकरघिन्नी बना हुआ है। तेज तपिश में किसान गेहूं की तुलाई के इंतजार में खड़ा रहता है लेकिन केंद्र पर सिर्फ रसूखदारों का ही गेहूं तौला जा रहा है।
स्थानीय कृषि उत्पादन मंडी में स्थित सरकारी क्रय केंद्रों पर किसान को यदि गेहूं बेचना है तो उसे 15 दिन पहले गेहूं लेकर आना होता है इसके बावजूद भी उसका गेहूं खरीद लिया जाएगा इसकी कोई गारंटी नहीं होती है। हनुमंतपुरा रौरा निवासी किसान योगेंद्र कुमार ने बताया कि उसको 15 दिन पूर्व यहां से टोकन दिया गया था। लेकिन उसकी जगह किसी और का गेहूं तौला जा रहा है। नगला सबल निवासी अजब सिंह कहते हैं कि उसे 8 दिन हो गए हैं लेकिन आज कटौती देेने पर उसका गेहूं तौला गया। वहीं ऊमड़सेंडा निवासी राजेश कुमार ने बताया कि उसे 5 दिन हो गए हैं। उसका गेहूं नहीं बिक सका। खितौरा निवासी नरेंद्र सिंह यादव का कहना रहा कि जिन किसानों का गेहूं तुल जाता है उन्हें चेक पाने के लिए चक्कर लगाना पड़ता है। वहीं खाद विभाग के केंद्र प्रभारी मिथलेश ने बताया कि टोकन से गेहूं को तौला जाता है।
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