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इंडिया अगेंस्ट करप्शन ने किया दावा-धांधली तो हुई!

Etawah

Updated Tue, 16 Oct 2012 12:00 PM IST
फर्रुखाबाद। डॉ. जाकिर हुसैन मेमोरियल ट्रस्ट की ओर से विकलांगों को उपकरण मुहैया कराने वाली सूची में जिन लाभार्थियों का नाम है, उसमें से ज्यादातर न तो विकलांग हैं और न ही संबंधित पते पर रहते हैं। सोमवार को इंडिया अगेंस्ट करप्सन की पड़ताल में कई नाम ऐसे भी मिले, जो विकलांग हैं ही नहीं। इसके बाद भी ट्रस्ट की ओर से उपकरण मुहैया कराने वालों की सूची में उनका नाम है।
सूची में शहर के हाता बड़ा खेल निवासी मोहम्मद कलीम पुत्र दीन मोहम्मद का नाम है। मौके पर इनकी रिहाइश नहीं मिली। मोहल्ले के लोग भी इनके बारे में कुछ भी नहीं बता पाए। शहर के शेख इनायत खां मोहल्ले के नरेंद्र सिंह पुत्र शेर सिंह, अरविंद पुत्र हुकुम सिंह का नाम सूची में दर्ज है। नरेंद्र सिंह का पता भी गलत निकला। सूची में जो पता दिया गया है, उसके अनुसार मोहल्ले में कोई इस नाम का व्यक्ति ही नहीं है। सूची में मूसाखिरिया गांव के सलमान पुत्र इमरान का नाम चढ़ा है। इनकी भी रिहाइश गलत है। सूची में सलमान पुत्र पप्पू का भी नाम है। सूची में दर्शाए गए पते पर सलमान रहता जरूर है, लेकिन वह विकलांग नहीं है।

दबा दी गई फाइल
फर्रुखाबाद। एडिप योजना के तहत ट्रस्ट ने कायमगंज तहसील मेें 29 मई 2010 को विकलांगों को उपकरण वितरण के लिए कैंप लगाया था। लाभार्थियों की सूची विकलांग कल्याण निदेशालय भेजी गई थी। इस पर तहसीलदार मनमोहन सिंह व व सीएमओ डा. पीके पोरवाल के हस्ताक्षर थे। निदेशालय ने सूची जांच के लिए जिला विकलांग कल्याण अधिकारी को भेजी थी। तत्कालीन प्रभारी राम अनुराग वर्मा ने जांच की। उन्होंने इसे जिलाधिकारी रिग्जियान सैंफिल को सौंप दिया। इसमें दोनों के हस्ताक्षर फर्जी होने का मामला सामने आया था। ट्रस्ट ने सूबे के करीब 17 जिलाें में कैंप लगाए थे। खुलासे में 71 लाख रुपए की गड़बड़ी सामने आ रही हैं। वाटर शेड के निर्माण क ो लेकर 2001 में ट्रस्ट को ब्लैक लिस्ट करने की तत्कालीन सीडीओ एलपी पांडे ने शुरूआत की थी। विकास भवन के कर्मचारियों की मानें तो सीडीओ के तबादले के बाद फाइल ठंडे बस्ते में चली गई। अब यह फाइल भी यहां से गायब बताई जा रही है।

दौडे़ तो खूब नसीब कुछ नहीं हुआ
फर्रुखाबाद। ट्रस्ट की सूची में शामिल लाभार्थी अपने ठिकाने पर नहीं मिल रहे हैं। तमाम ऐसे लोग मिले, जो ट्रस्ट से उपकरण की आस में लगातार दौड़ लगाते रहे। अब यह लोग फर्जीवाडे़ की खबरों से चकित हैं। नवाब दिलावर जंग के फरजान पुत्र सरफुद्दीन, यहीं के नफीस पुत्र नजीर का कहना है कि विकलांग उपकरण के लिए कई बार दौड़ लगाई लेकिन कभी भी कुछ नहीं मिला। मूसाखिरिया गांव के शिवकुमार पुत्र रामप्रसाद, नितिन पुत्र राधेश्याम का कहना है कि विकलांगों के साथ ऐसा अन्याय नहीं होना चाहिए था। इसी गांव के जमरुद्दीन, संतोष, राजा बाबू, विजई नगला के अशोक, टिलियां अहमदगंज केे सिपाहीराम कहते हैं कि असली विकलांगोें को उपकरण मिल जाते तो उनका भला हो जाता।

टीम का दावा
इंडिया अगेंस्ट करप्सन के लक्ष्मण सिंह व मुन्नालाल राजपूत की मानें तो ट्रस्ट की ओर से किए गए दूसरे कार्यों के लाभार्थियों की भी सूची देखी जा रही है। सलमान खुर्शीद से जुड़े लोग उन्हें प्रलोभन देने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन लक्ष्मण सिंह का कहना है कि वह अपने फैसले पर अडिग है। भ्रष्टाचार के खिलाफ अंतिम सांस तक आंदोलन जारी रखेंगे।

पहले भी उठीं उंगलियां
पट्टे की जमीन सौंप दी ट्रस्ट को
फर्रुखाबाद। डा. जाकिर हुसैन ट्रस्ट पर हाकिमों की हमेशा से ही मेहरबानी रही है। इससे ट्रस्ट पर पहले भी उंगलियां उठती रहीं। गनीपुर जोगपुर में पट्टा निरस्त किए बिना इसे ट्रस्ट को सौंप दिया गया था।
नवाबगंज ब्लाक के गनीपुर जोगपुर में 12 नवंबर 1984 को ग्राम सभा के प्रस्ताव पर अपर जिलाधिकारी एसपी पांडे ने 25 एकड़ जमीन अब्दुल मुजीब पुत्र अब्दुल शकूर खां को दी थी। यह पट्टा 25 साल के लिए हुआ था। इसके बाद अप्रैल 1995 में इसे स्वास्थ्य विभाग के हवाले कर दिया गया। चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण कानपुर मंडल के निदेशक डा. आरके कश्यप ने 25 एकड़ की इस जमीन को 30 साल के लिए 100 रुपए वार्षिक किराए पर ट्रस्ट को दे दिया। गंभीर बात यह है कि 15 अप्रैल 1996 के खसरे के मुताबिक इस पर 488 बबूल, 2000 यूकेलिप्टस व 100 शीशम के पेड़ थे। इनकी लागत 1 करोड़ रुपए के लगभग दर्शायी गई। सवाल यह उठता है कि पेड़ों के बेचने से जो पैसा आया, वह किसे मिला। अब्दुल मुजीब किसी भी तरह का मुआवजा पाने से इनकार करते रहे हैं। हालांकि मुजीब इधर तीन दिन से चुप हैं। इस मुद्दे पर कुरेदने पर भी वह कहते हैं कि अभी कुछ भी नहीं बोलेंगे। उनकी चुप्पी का राज क्या है, यह भी सवाल बना हुआ है।

1986 से चल रहा ट्रस्ट
फर्रुखाबाद। विवादों में आए डा. जाकिर हुसैन ट्रस्ट की स्थापना 30 अक्टूबर 1986 को की गई थी। ट्रस्ट का रजिस्ट्रेशन नंबर 5267 है। कानून मंत्री सलमान खुर्शीद की पत्नी लुईस खुर्शीद इसकी प्रमोटर हैं। पितौरा के अलावा इसका कार्यालय 4, गुलमोहर एवेन्यू, जामियानगर, नई दिल्ली में भी है। सलमान खुर्शीद के नाना राष्ट्रपति रहे डा. जाकिर हुसैन की स्मृति में एग्रीकल्चर एजूकेशन एंड लिट्रेसी, फूड प्रोसेसिंग, हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर हाउसिंग व रूरल डेवलेवमेंट के लिए गठित किया गया था।

आरटीआई को दिखाया जा रहा ठेंगा
फर्रुखाबाद। ट्रस्ट से जुड़ी सूचनाएं देने से भी महकमे कतरा रहे हैं। भाजपा नेता व शहर के बजरिया मोहल्ले में रहने वाले दिलीप भारद्वाज ने जन सूचना अधिकार के तहत सीडीओ दफ्तर से ट्रस्ट के बारे में सूचनाएं मांगी थीं। यह इन्हें अभी तक नहीं मिल पाई हैं। उन्होंने 8 सालों में ट्रस्ट को दिए गए धन व काली सूची में डाले जाने की सूचनाएं चाही थीं। इनका कहना है कि यह अभी तक नहीं मिल पाईं।

फर्रुखाबाद में दहाडे़ंगे केजरीवाल
फर्रुखाबाद। कानून मंत्री सलमान खुर्शीद के गढ़ में अरविंद केजरीवाल दहाड़ सकते हैं। उनक ा कार्यक्रम इस महीने के आखिरी दिनों में लग सकता है। उन्होंने इंडिया अगेंस्ट करप्सन टीम के स्थानीय सदस्याें से इस बारे में चर्चाएं की हैं।

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