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मिडडे मील: कहीं चूल्हा बुझा तो कहीं बुझने वाला है

Etawah

Updated Tue, 16 Oct 2012 12:00 PM IST
इटावा। रसोई गैस के दाम में करीब तीन गुना बढ़ोत्तरी से परिषदीय विद्यालयों में मिडडे मील के चूल्हे की आंच धीमी होने लगी है। कुछ विद्यालयों में रसोई गैस के अभाव में चूल्हे बुझ चुके हैं तो कहीं बुझने के कगार पर है। ऐसे में स्कूली बच्चे दोपहर के भोजन के लिए घर की राह नापने को मजबूर हो रहे हैं।
विद्यालयों में मिड डे मील का संचालन सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के तहत कें द्र सरकार द्वारा कराया जा रहा है। योजना के तहत अनाज में गेहूं चावल की व्यवस्था सरकारी कोटे की दुकानाें के जरिए होती है। इसके अलावा भोजन पकाने के लिए रसोई गैस, दालें, मसाले, सब्जियां, सोयाबीन, सरसों का तेल, दूध आदि की व्यवस्था के लिए सरकार क नवर्जन कास्ट के रूप में धनराशि देती है। केंद्र सरकार ने मिड डे मील के लिए बगैर सब्सिडी वाले सिलेंडरों की व्यवस्था निर्धारित की है, जिसकी कीमत करीब तीन गुना है, जबकि कनवर्जन कास्ट की धनराशि में कोई बढ़ोत्तरी नहीं की।
मिड डे मील के लिए कनवर्जन कास्ट के रूप में प्राइमरी विद्यालयों के बच्चों के लिए 3.11 रुपए प्रति बच्चे क ी दर से तथा जूनियर विद्यालयों के बच्चों के लिए 4.65 रुपए प्रति बच्चे की दर से धनराशि उपलब्ध कराई जाती है। पहले रसोई गैस सिलेंडर 409 रुपए में उपलब्ध हो जाता था। अब वही सिलेंडर 1200 रुपए में उपलब्ध हो रहा है। ऐसे में प्रधान और विद्यालय के प्रधानाध्यापक परेशान हैं कि वह खाना पकाने के लिए रसोई गैस खरीदें अथवा खाद्य सामग्री। इसकी वजह सिलेंडर की बढ़ी कीमतों के सापेक्ष कनवर्जन कास्ट की धनराशि का कम होना है। इसके चलते मिडडे मील का चूल्हा ठंडा पड़ने लगा है।
जानकारी करने पर पता चला कि किसी भी प्राइमरी विद्यालय में 100 बच्चों के लिए भोजन तैयार करने के लिए महीने में तीन सिलेंडर खप जाता है। 100 बच्चों के लिए 3.11 रुपए प्रति बच्चे की दर से 311 रुपए एक दिन की कनवर्जन कास्ट मिलती है। एक महीने में 22 से 25 दिन के भोजन के लिए ही कनवर्जन कास्ट की धनराशि मिलती है। यदि 25 दिन की धनराशि मिलती है तो कुल 7775 रुपए होते हैं। इस धनराशि में पहले तीन सिलेंडर 1227 रुपए के आ जाते थे। वर्तमान में यह कीमत एक सिलेंडर की हो गई है अर्थात तीन सिलेंडरों के लिए 3600 रुपए खर्च होंगे। ऐसे में शेष बची 3175 रुपए की धनराशि से कैसे खाद्य वस्तुओं की खरीद हो सकेगी।
केस हिस्ट्री एक
-प्राथमिक विद्यालय एवं जूनियर विद्यालय बरालोकपुर। प्राथमिक विद्यालय में 363 और जूनियर विद्यालय में 294 बच्चे पंजीकृत हैं। औसतन 70 फीसदी बच्चे रोजाना उपस्थित होते हैं। अर्थात प्राथमिक विद्यालय में 254 और 209 बच्चों की औसतन उपस्थिति रहती है। दोनों ही विद्यालयों में हर महीने 8-8 सिलेंडरों की खपत होती है। इसके सापेक्ष कनवर्जन कास्ट के रूप में प्राथमिक विद्यालय को पूरे माह 19485 रुपए तथा 24296 रुपए की धनराशि मिलती है। पहले 8 सिलेंडरों पर 3272 रुपया खर्च करना पड़ता था लेकिन रसोई गैस की कीमतें बढ़ जाने से अब 8 सिलेंडर पर 9600 रुपए व्यय हो जाएंगे। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि करीब 6400 रुपए का आया अंतर कैसे पूरा होगा। निश्चित तौर पर खाने की क्वालिटी तो गिरेगी ही साथ ही साथ चूल्हे की आग भी बीच-बीच में ठंडी पड़ती रहेगी।
केस हिस्ट्री दो
- तमाम स्कूल ऐसे हैं, जहां पर बच्चों की संख्या कम है। ऐसे में उनके सामने यह समस्या है कि कनवर्जन कास्ट से मिलने वाली धनराशि से एक सिलेंडर भी नहीं खरीदा जा सकता है। प्राथमिक विद्यालय पहाड़पुर में 21, प्राथमिक विद्यालय लवारपुरा में 22, जूनियर हाईस्कूल नगला केहरी में 11 बच्चे है। यदि इन विद्यालयों में सभी की उपस्थिति प्रतिदिन मान भी ली जाए तो प्राथमिक विद्यालय पहाड़पुर को पूरे महीने के लिए कनवर्जन कास्ट के रूप में 1632 रुपए ही मिलेंगे। यही स्थिति लवारपुरा के प्राथमिक विद्यालय की होगी। जूनियर हाईस्कूल नगला केहरी को कनवर्जन कास्ट के रूप में 1278 रुपए मिलेंगे। इस आधार पर यह विद्यालय तो महीने में सिर्फ सिलेंडर ही खरीद पाएंगे अन्य सामग्री की व्यवस्था कैसे होगी। इस मसले पर ग्राम प्रधान व प्रधान टीचर दोनों किसी नतीजे पर नहीं पहुंच रहे हैं।

इन विद्यालयों में बुझ गई चूल्हे की आग
बकेवर। रसोई गैस क ी बढ़ी कीमतों के चलते क्षेत्र के कई विद्यालयों में मिड डे मील बनना बंद हो गया है।
जूनियर हाईस्कूल चंद्रपुराशाला में तीन दिन से मिड डे मील नहीं बन रहा है। प्रधानाध्यापक रामनरेश राठौर ने बताया कि तीन दिन से सिलेंडर नहीं है। प्रधान को खबर भेज दी गई है। पर सिलेंडर नहीं मिला है। प्राथमिक विद्यालय हर्राजपुरा में भी चार रोज से मिड डे मील नहीं पक रहा है। यह विद्यालय शिक्षामित्र के सहारे चल रहा है। शिक्षामित्र का कहना है कि महंगा होने के कारण सिलेंडर की व्यवस्था नहीं हो पा रही। प्राथमिक विद्यालय लड़ैयापुर में भी सोमवार को मिड डे मील नहीं बना। बच्चे अपने-अपने घरों पर खाना खाने गए। प्रधानाध्यापिका ने बताया कि रसोइया के परिवार में किसी को प्रसव हुआ है, इस कारण वह नहीं आई।

वर्जन:
अभी तक मिड डे मील में रसोई गैस की समस्या के संबंध में कहीं से कोई शिकायत नहीं मिली है। यदि प्रधान अथवा शिक्षक इस संबंध में किसी प्रकार की समस्या बताते हैं तो उच्च अधिकारियों को लिखा जाएगा।
-अरुण यादव जिला समन्वयक मिड डे मील
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