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संकल्प लें, दूसरों को दुनिया दिखाएंगे

Etawah

Updated Thu, 11 Oct 2012 12:00 PM IST
इटावा। राजकिशोर की पीड़ा उनके मुंह से निकले शब्दों से समझ में आती है। संसार में राजकिशोर जैसे न जाने कितने लोग हैं जिन्हें जन्म से या किसी हादसे का बाद से दिखना बंद हो गया है। मरने के बाद आपकी आंखों से किसी के अंधेरे जीवन में उजाला हो सकता है। आपके द्वारा दान की गईं आंखें दो लोगों के जीवन में रंग भर सकती हैं। आप भी नेत्रदान का संकल्प लें और दूसरों को भी नेत्रदान के लिए प्रेरित करें। आपको इतना करना है कि नजदीकी नेत्र बैंक से संपर्क करके एक फार्म भरें और अपनी इस इच्छा के बारे में अपने परिवारीजनों को अवगत कराएं ताकि मृत्यु के पश्चात परिवारीजन सही समय पर सूचना देकर आपकी आंखों को सुरक्षित करा सकें। इसके अलावा आन लाइन भी नेत्रदान किया जा सकता है। आओ हम सभी विश्व अंधता निवारण दिवस पर नेत्रदान का संकल्प लें।
कैसे करें नेत्रदान
नजदीकी आई बैंक से संपर्क करके आप अपना शपथ पत्र भरें। शपथ पत्र पर नाम, पता, पारिवारिक विवरण सहित कुछ अन्य औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी। शपथ पत्र भरते समय एक गवाह की जरूरत होती है। नेत्रदान के इच्छुक हैं तो इस संबंध में जिला अंधता निवारण समिति के पदाधिकारियों को भी जानकारी दे सकते हैं। आप ऑन लाइन भी नेत्रदान कर सकते हैं।

दो लोगों की रोशन होगी जिंदगी
यह तो तय है कि मरने के बाद आपका शरीर सिर्फ खाक में मिलना है। फिर चाहे उसे चिता में जलाया जाए या फिर दफनाया जाए। आपके द्वारा किया गया नेत्रदान दो लोगों की जिंदगी को गुलजार कर सकता है। चिकित्सक नियमानुसार एक व्यक्ति को सिर्फ एक ही आंख ट्रांसप्लांट करते हैं। इस प्रकार एक व्यक्ति द्वारा किए गए नेत्रदान से दो व्यक्ति इस दुनिया को देख सकेंगे।

बीमारी नहीं है बाधक
एक्सपर्ट की राय मानें तो नेत्रदान में कोई भी बीमारी बाधक नहीं है। चाहे वह गंभीर ही क्यों न हो। क्योंकि दान किए गए नेत्र की पुतली का इस्तेमाल किया जाता है। पुतली में ब्लड सप्लाई नहीं होता इसलिए इसमें बीमारी नहीं होती है। सिर्फ आंख की एकआध बीमारी नकारात्मक हो सकती हैं।

अपना कर्तव्य निभाएं
नेत्रदान एक पुनीत कार्य है। नेत्रदान करने के बाद जिन लोगों के परिजन मृत्यु की सूचना नहीं देते वह मरने वाले के प्रति अपने कर्तव्य को नहीं निभाते हैं। नेत्रदान करने वाले से ज्यादा जिम्मेदारी उसके परिवारीजनों की होती है। सभी लोग बढ़कर नेत्रदान करें। अगर जरूरत पड़े तो मैं जिंदा में ही अपनी एक आंख दूसरे को देने को तैयार हूं।- डॉ. लक्ष्मीपति वर्मा, प्रबंधक, केकेडीसी

व्यवस्था सुधारने की जरूरत
जिले में नेत्रदान की व्यवस्था हो जाए तो नेत्रदान करने वाले बहुत मिलेंगे। हमारा तो शरीर राख होना ही है अगर कोई अंग किसी के काम आ जाए तो इससे बड़ा सुख मनुष्य के लिए क्या होगा। अगर सुविधा मिले तो मैं स्वय तथा परिवार के साथ एक सैकड़ा से अधिक जानने वालों के नेत्रदान का वचन देता हूं। -संतोष चौधरी, पूर्व अध्यक्ष, लायंस क्लब

हम सभी लें नेत्रदान का संकल्प
शरीर से रूह निकलने के बाद इस शरीर को मिट्टी में मिल जाना है। लेकिन यह हमारी खुशकिस्मत है कि हमारी आंखें या अन्य अंग मरने के बाद किसी के काम आ जाएं। हम सभी लोग मिलकर नेत्रदान का संकल्प लें।-डा. राजीव चौहान

युवा निभाएं जिम्मेदारी
पुरानी परंपराओं को भुलाकर युवा मानवता के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाएं। खुद नेत्रदान का संकल्प लें और दूसरों को भी प्रेरित करें।-विकास अग्रवाल

हमारा दर्द हमीं जानते हैं
संसार को न देख पाने का दर्द नेत्रहीन ही जानता है। मैं बचपन से नेत्रहीन हूं। कैसे जिंदगी जी रहा हूं मै बता नहीं सकता। अगर सरकार व समाज के लोग वास्तव में अंधता निवारण चाहते हैं तो संसाधन जुटाएं और लोगों को जागरूक करें। लोग नेत्रदान करेंगे तभी हमारी जैसे लोग देश दुनिया को देख पाएंगे। -राजकिशोर गुप्ता, प्रधानाचार्य, स्पर्श दृष्टि बाधित शिक्षण एवं प्रशिक्षण संस्थान।

जागरूकता की जरूरत
ऐसे हजारों लोग मिल जाएंगे जो नेत्रदान के लिए तैयार हो जाएंगे। इसके लिए जागरूकता की जरूरत है। सिर्फ विज्ञापनों के माध्यम से नेत्रदान नहीं होगा। विज्ञापन पर कम ध्यान देकर सरकार को व्यवस्थाआें पर ध्यान देना चाहिए। हर व्यक्ति को नेत्रदान करना चाहिए। -पदम सिंह, व्यवसायी
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