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सोरों ही असली सूकरखेत और तुलसी जन्मभूमि

Etah

Updated Tue, 11 Dec 2012 05:30 AM IST
सोरों। प्रदेश सरकार द्वारा गोंडा को सूकरखेत और तुलसी जन्मभूमि के विकास के नाम पर 20 लाख रुपये के अनुदान देने की घोषणा का सूकरखेत के साहित्य मर्मज्ञ पुरजोर विरोध कर रहे हैं। महाकवि तुलसीदास और सूकरखेत के बारे में विवाद संबंधी खबर का तीर्थनगरी के विद्वानों और साहित्यकारों ने इस तीर्थ के खिलाफ सुनियोजित षड्यंत्र करार दिया है।
साहित्यकारों की बैठक की अध्यक्षता करते हुए केए महाविद्यालय कासगंज के पूर्व हिंदी विभाग के वरिष्ठ प्रवक्ता डा. रामकृष्ण शर्मा ने कहा कि वाराह पुराण में गंगा के तट को सूकरखेत बताया गया है। जबकि आचार्य रामचंद्र शुक्ल सूकरखेत को सरयू नदी के किनारे गोंडा में बता रहे हैं। जो पूर्णत: गलत और भ्रामक तथ्य है।
तुलसी मानस पत्रिका के संपादक डा. प्रभाकर पाराशरी ने कहा कि पाठ्यपुस्तकों में तुलसीदास की जन्मभूमि राजापुर बताना दुर्भाग्यपूर्ण है। तुलसीदास ने मानस में स्पष्ट कहा है कि मैंने अपने गुरु से पुन: रामकथा सूकरखेत में सुनी, लेकिन तब मैं बालपन की अचेतावस्था में था, इसलिए मैं भलीभांति समझ न सका। फिर भी गुरु के बार-बार रामकथा कहने पर मेरी समझ में जो कुछ भी आया उसको मैंने भाषाबद्ध किया है।
केए महाविद्यालय के हिंदी के वरिष्ठ प्राध्यापक व शोधपरक ग्रंथ आदि तीर्थ सूकरखेत के लेखक डा. राधाकृष्ण दीक्षित ने कहा कि हिंदी के मूर्धन्य विद्वान डा. शंभूनाथ सिंह, बाबू गुलाबराय, रामकुमार वर्मा, राहुल सांकृत्यायन, डा. कृष्ण माधव मिश्र, पं. रामनरेश त्रिपाठी, रामदत्त भारद्वाज, गौरीशंकर द्विवेदी, लाला सीताराम आदि ने तुलसीदास जी की जन्मभूमि को केवल सोरों में ही होना स्वीकारा है।
तीर्थ पुरोहित भारत किशोर दुबे ने कहा कि डिस्ट्रिक्ट गजेटियर ऑफ यूनाईटेड प्रोविन्सेज 1909, इंपीरियल गजेटियर ऑफ इंडिया कलकत्ता 1908, स्टेटिसटिकल डिस्क्रप्शन एंड हिस्टोरिकल एकाउंट ऑफ द नॉर्थ प्रॉविंसेज ऑफ इंडिया 1874 के अनुसार एटा जनपद की कासगंज तहसील के अंतर्गत स्थित सोरों को तुलसीदास की जन्मभूमि और राजापुर को तुलसी द्वारा बसाया गया बताया गया है। भारत सरकार ने सोरों को ही सूकरखेत मानते हुए 1978 में सोरों रेलवे स्टेशन और सोरों डाकघर का नाम परिवर्तित कर सोरों सूकरक्षेत्र कर दिया। पूरे विश्व में गंगा तट पर सूकरखेत केवल सोरों ही है। जबकि पसुका जिला गोंडा, जो सूकरखेत होने का दावा करते हैं वह सरयू घाघरा के संगम पर है।
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