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विद्यार्थियों को आज भी हिंदी साहित्य से प्रेम

Etah

Updated Fri, 14 Sep 2012 12:00 PM IST
कासगंज। वैश्वीकरण के दौर में भले ही अंग्रेजी का बोलबाला हो लेकिन जनपद में स्नातक कक्षाओं में आज भी छात्र-छात्राओं का रुझान हिंदी साहित्य को पढ़ने के प्रति बना हुआ है। हालांकि जनरल हिंदी को लेकर विद्यार्थियों में रुचि कम देखने को मिल रही है। वहीं कॉन्वेंट स्कूलों के हालात हिंदी को लेकर काफी बदतर हैं। यहां के बच्चे ढंग से हिंदी बोलना भी नहीं जानते।
नगर के कोठीवाल आढ़तिया महाविद्यालय में स्नातक कक्षाओं में 420 सीटें हैं। इस वर्ष स्नातक कक्षा के प्रथम वर्ष में जिन विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया है, उनका रुझान हिंदी साहित्य की ओर नजर आया है। बीए प्रथम वर्ष में हिंदी साहित्य विषय लेने वाले विद्यार्थियों की तादात अच्छीखासी रही है। 360 विद्यार्थियों ने हिंदी साहित्य विषय लिया है। जबकि अंग्रेजी साहित्य विषय लेने वाले विद्यार्थियों की संख्या मात्र 50 है। इसके विपरीत अनिवार्य जनरल विषय में अंग्रेजी को विद्यार्थियों ने वरीयता दी है। महाविद्यालय की विभागाध्यक्ष डॉ. मिथलेश वर्मा का कहना है कि हिंदी को लेकर विद्यार्थियों में आज भी रुचि बरकरार है। साहित्यिक हिंदी में इतने छात्रों का विषय चयन करना इस बात का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि जनरल हिंदी के मुकाबले जनरल इंग्लिश सरल होती है। इसीलिए जनरल इंगलिश को छात्रों ने वरीयता दी है। उन्हाेंने बताया कि एमए कक्षाओं में भी हिंदी को लेकर छात्र-छात्राओं का खासा रुझान रहता है।
अंग्रेजी माध्यम से संचालित विद्यालयों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राएं अपनी मातृभाषा से दूर होते जा रहे हैं। न तो वे हिंदी गिनती के अंक ही समझते हैं और न ही हिंदी में पहाड़ा बोल पाते हैं। इन विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों का हिंदी ज्ञान अधकचरा है। नगर में सीबीएसई से कई स्कूल संचालित हैं। इन स्कूलों में हिंदी हालांकि विषय तो है, लेकिन इस विषय का विधिवत ज्ञान छात्र-छात्राओं को नहीं है। हिंदी दिवस को लेकर जब यहां के कई विद्यालयों में विद्यार्थियों के हिंदी ज्ञान को लेकर जानकारी की तो विद्यार्थियों का हिंदी ज्ञान अधूरा सामने आया। कक्षा दो के छात्र संजू से जब हिंदी का पहाड़ा सुना गया तो वह हिंदी के पहाड़े को सुनाते समय अटक गया। जबकि अंग्रेजी में उसने टेबल आसानी से सुना दी। कक्षा एक के छात्र स्वर से हिंदी की गिनती की जानकारी की गई तो वह हिंदी में गिनती नहीं बता सका। कक्षा चार के छात्र अभिषेक से हिंदी विषय की पुस्तक को जब पढ़वाया गया तो वह पुस्तक में कठिन शब्दों को बोलते समय काफी दिक्कतें महसूस कर रहा था।
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