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थियेटर के दीवाने 200 से अधिक लिख चुके हैं गजल

Deoria

Updated Tue, 11 Dec 2012 05:30 AM IST
सलेमपुर। थियेटर की दुनियां में एक जगह रखने वाले वरिष्ठ रंगकर्मी बलदाऊ जी विश्वकर्मा बदलते परिवेश और मंच से रंग गायब होने के चलते दो वर्ष पूर्व थियेटर की दुनियां से नाता तोड़ लिया। बंगाल में पले बढ़े बलदाऊ जी किशोर अवस्था से ही थियेटर के दीवाने हो गए।
उनका कहना है कि जिसके भीतर थियेटर का कीड़ा होगा वह आधा पेट खाकर भी नाटक करेंगा। रंगकर्म सबसे पहले मनुष्य को मनुष्य बनाता है। उसका समाज के प्रति दायित्व अन्य मनुष्य से ज्यादा महत्वपूर्ण है। थियेटर से नाता तोड़ने के बाद बलदाऊ जी इन दिनों 200 से अधिक गजल और दो दर्जन से अधिक भोजपुरी नाटक और एकांकी लिख चुके हैं। सिंचाई मंत्री बीर बहादुर सिंह समेत कई बड़े लोगों के हाथों सम्मानित भी हो चुके हैं।
उन्होंने अमर उजाला रिपोर्टर से बातचीत के दौरान अपनी दिल की बात साझा किया। थियेटर के पीछे अपनी पूरी जवानी समर्पित कर देने वाले 66 वर्षीय बलदाऊ जी विश्वकर्मा विशुनपुर गांव के मूल निवासी है। लंबे समय से नगर में ही पूरे परिवार के साथ रहते हैं।
बलदाऊ जी के पिता कोलकाता में प्राइवेट नौकरी करते थे। इनकी बचपन से ही शिक्षा दीक्षा पश्चिमी बंगाल में हुई। जब वह वहां कक्षा चार के छात्र थे तो स्कूल में चल रहे नाटक में पहली बार भाग लिया था। इसके बाद इनका मन थियेटर के ऊंचाईयों पर पहुंचने को लेकर बेकरार हो गया। बीएससी करने के दौरान इनके पिता गंभीर बीमारी से पीड़ित हो गए उसके बाद इनका पढ़ार्ई से नाता टूट गया। उसके बाद यह सलेमपुर पहुंचे और जीवन यापन करने के लिए इलेक्ट्रानिक की दुकान खोल दी। इलेक्ट्रानिक उपकरणों के जाने माने मैकेनिक भी रहे। उस समय पूर्वांचल में होने वाले नाटकों और मंचों पर मंचन करते थे। बताते है कि थियेटर में काफी समय देने के बाद धीरे-धीरे मेेरी दुकान टूट गई। वह खुद का नाटक लिखकर मंचन किया करते थे। वर्ष 2001 में उन्होंने ‘पूर्वांचल के मेघदूत यात्रा’ लिखा जो विश्व के भोजपुरी नाट्य शिल्प के इतिहास में ‘प्रथम नृत्य गीता नाटिका के रूप में शामिल हुआ। पूर्वांचल के जाने माने रंगकर्मियों में इनका एक अलग ही पहचान है। बदलते परिवेश में बाजारीकरण के चलते थियेटर से नाता तोड़ लिया। बलदाऊ जी ने ढलती उम्र में भी रातभर जागकर करीब 200 गजल, भोजपुरी नाटक लिखे। धुरी क सोहाग, कहानी एक घर की, पुरवईया भोजपुरी गीत संकलन कर चुके हैं। जल्द ही गजल की किताब मार्केट में ‘काशी से काबा तक’ गजल संग्रह मार्केट में आने वाली है। थियेटर की दुनियां में तीन सौ से अधिक इनकी ओर से तैयार किए गए कलाकार आज भी मंचन कर रहे हैं।
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