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कोयले के कारोबार से चार करोड़ की चपत

Deoria

Updated Fri, 07 Dec 2012 05:30 AM IST
देवरिया। कोयले के काले कारोबार में हर साल सरकार को करीब चार करोड़ रुपये की चपत लग रही है। जनपद के ईंट भट्ठों की चिमनियाें का धुंआ अवैध तरीके से लाए गए कोयले से ही निकलता है।
सब कुछ आइने की तरह साफ है फिर भी कोयले के इस काले कारोबार पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। अधिकृत रूप से जनपद में कुल 284 ईंट भट्ठे हैं। इनमें 15 से लेकर 21 पाए तक र्के इंट भट्ठे हैं। पूरे सीजन तक चलाने के लिए एक ईंट भट्ठे को करीब 600 टन यानी तीस ट्रक कोयले की जरूरत पड़ती है। जानकार लोगों के मुताबिक सीजन में एक ईंट भट्ठा करीब सात चक्र ईंट पकाता र्है। ईंट पकाने के लिए एक चक्र में 75 से 100 टन कोयले की जरूरत पड़ती है। एक ट्रक कोयला जनपद में मंगाने पर करीब 1.25 लाख रुपये चिमनी मालिक को व्यय करना पड़ता है। कोयले की लागत का चार प्रतिशत वैट और दो प्रतिशत प्रवेश कर वाणिज्य कर विभाग लेता है। वाणिज्य कर हर साल समाधान योजना चलाता है। इसके तहत एकमुश्त टैक्स जमा करना होता है। इस योजना में करीब 275 ईंट-भट्ठे शामिल होते हैं। समाधान योजना में शामिल ईंट-भट्ठों को विभाग कोयला लाने के लिए फॉर्म 38 जारी करता है। समाधान योजना में शामिल 16 पाए की चिमनी के लिए पूरे सीजन में 108 टन और 21 टन के लिए 129 टन कोयला लाने की अनुमति दी जाती है। इतने ही कोयला का फार्म 38 भी दिया जाता है। इतने कोयले से दो चक्र भी ईंट की पकाई नहीं हो पाती है। चिमनी चलाने के लिए मजबूरन ईंट-भट्ठे मालिक अन्य हथकंडों का सहारा लेते हैं। शेष पांच चक्कर चिमनी चलाने के लिए एक चिमनी मालिक को करीब 22 ट्रक अतिरिक्त कोयले की जरूरत पड़ती है, जिसकी कीमत करीब लगभग 27 लाख रुपये होती हैं। वैध तरीके से मंगाने पर चिमनी मालिक को करीब 1.60 लाख रुपये टैक्स देना पड़ता। जनपद में समाधान में शामिल करीब 275 चिमनियों को अतिरिक्त कोयले के लिए करीब चार करोड़ टैक्स के लिए देने पड़ते हैं। अवैध तरीके से मंगाने पर वाणिज्य कर विभाग हर साल चार करोड़ रुपये के टैक्स से वंचित होता है। इस बाबत वाणिज्य कर अधिकारी विनय कुमार गुप्ता कहते हैं कि इस टैक्स चोरी को रोकने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। अभी स्वीकृति नहीं मिली है। स्वीकृति मिलते ही विभाग इस चोरी को रोक देगा।
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